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बाढ़ का बढ़ता क़हर: क्या तबाही टालने के कोई तरीक़े हैं

एक व्यक्ति एक महिला की मदद कर रहा है, जिसकी कार कमर तक भरे पानी में फँस गई है. दुनिया भर में वर्षा पहले से कहीं अधिक चरम हो रही है, जिसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव हैं.
© WMO/Teguh Prihatna
एक व्यक्ति एक महिला की मदद कर रहा है, जिसकी कार कमर तक भरे पानी में फँस गई है. दुनिया भर में वर्षा पहले से कहीं अधिक चरम हो रही है, जिसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव हैं.

बाढ़ का बढ़ता क़हर: क्या तबाही टालने के कोई तरीक़े हैं

जलवायु और पर्यावरण

जुलाई में, हिमालयी क्षेत्रों से लेकर अमेरिका के टैक्सस प्रान्त के ग्रामीण इलाक़ों तक आई भीषण बाढ़ की घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान चली गई, और समय-पूर्व चेतावनी प्रणालियों की गम्भीर ख़ामियाँ उजागर हुईं. संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी (WMO) ने आगाह किया है कि इस विनाश के पीछे तेज़ी से हो रहा नगरीकरणभूमि उपयोग में बदलाव व जलवायु परिवर्तन जैसी वजहें हैंजिनसे वातावरण में नमी बढ़ रही है और बाढ़ का ख़तरा भी लगातार गहराता जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन (WMO) ने सोमवार को कहा कि भारी बारिश और हिमनदों के टूटने से जुड़ी बाढ़ की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं. बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक आई इन बाढ़ों की चपेट में आए समुदायों के लिए इसके परिणाम बेहद घातक साबित हो रहे हैं.

WMO के जल विज्ञान, जल और क्रायोस्फीयर निदेशक स्टेफ़ान उहलनब्रुक ने कहा, “आकस्मिक बाढ़ें (flash floods) कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन अनियोजित नगरीकरण, भूमि उपयोग में बदलाव और बदलती जलवायु के कारण अब कई क्षेत्रों में बाढ़ों की बारम्बारता और तीव्रता लगातार बढ़ रही है.”

हर अतिरिक्त एक डिग्री सैल्सियस तापमान बढ़ने पर, वायुमंडल लगभग 7 प्रतिशत अधिक जलवाष्प, अपने भीतर संचित कर सकता है.

उन्होंने कहा, “इस स्थिति से अत्यधिक वर्षा की घटनाओं का जोखिम बढ़ रहा है. साथ ही, गर्म होती जलवायु के कारण तेज़ी से पिघलती बर्फ़ से हिमनद से जुड़ी बाढ़ का ख़तरा भी बढ़ रहा है.”

हर साल हज़ारों मौतें

बाढ़ और आकस्मिक बाढ़ की घटनाओं में हर साल हज़ारों लोगों की जान चली जाती हैं और अरबों डॉलर का नुक़सान होता है. 

2020 में, दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों में भीषण बाढ़ की घटनाओं में साढ़े 6 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई और लगभग 105 अरब डॉलर की आर्थिक क्षति दर्ज की गई.

दो साल बाद 2022 में, पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ में 1,700 से अधिक लोगों की मौत हुई, 3.3 करोड़ से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए और 40 अरब डॉलर से अधिक का नुक़सान हुआ, जिससे वर्षों की विकास प्रगति पर पानी फिर गया.

इस साल भी यह सिलसिला थमा नहीं है. केवल जुलाई महीने में ही दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में एक के बाद एक, बाढ़ की घातक चरम घटनाएँ देखी गईं - कहीं भारी मानसूनी बारिश, कहीं हिमनदी झीलों का विस्फोट, और कहीं अचानक आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़.

हर साल, चरम मौसम और जलवायु से जुड़ी घटनाएँ दुनियाभर में जीवन और अर्थव्यवस्थाओं पर भारी प्रभाव डालती हैं.
© WMO/Arya Manggala

एशिया में मानसून का क़हर जारी

भारत और पाकिस्तान में भारी मानसूनी बारिश के कारण परिवहन व्यवस्था ठप हो गई, घर बह गए और कई जगहों पर भूस्खलन की घटनाएँ हुईं. 

पाकिस्तान के सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और झेलम नदी के ऊपरी हिस्से में गम्भीर बाढ़ की चेतावनी के बाद, राहत व बचाव कार्यों के लिए सैन्य हैलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं.

टैक्सस की कैर काउंटी में कुछ ही घंटों में 46 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई.
© NASA

दक्षिण कोरिया में 16 से 20 जुलाई के बीच रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई, जहाँ कुछ इलाक़ों में वर्षा दर 115 मिमी प्रति घंटे से भी अधिक पहुँच गई. इस आपदा में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 13 हज़ार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा.

हाँगकाँग में टाइफ़ून विफ़ा के क़हर के ठीक एक दिन बाद, दक्षिणी चीन में 21 जुलाई को अचानक बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी जारी की गई. लगातार आते तूफ़ानों ने इस क्षेत्र में बढ़ते हुए सम्मिलित जोखिमों को और भी स्पष्ट कर दिया है.

टैक्सस में रातों-रात आई आकस्मिक बाढ़

3 से 4 जुलाई की रात, अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने टैक्सस के पहाड़ी क्षेत्र को तबाही के मंज़र में बदल दिया, जिसमें 100 से अधिक लोगों की जान चली गई और अनेक लोग लापता हो गए. 

कुछ ही घंटों में हुई 10–18 इंच (25–46 सेमी) बारिश से ग्वाडालूप नदी तट डूब गया, और नदी का जलस्तर केवल 45 मिनट में 26 फीट (8 मीटर) के उफ़ान पर पहुँच गया.

अधिकाँश पीड़ित वो लड़कियाँ थीं जो ग्रीष्मकालीन शिविर (summer camp) में रहने आईं थीं और सुबह लगभग 4 बजे सोते समय अचानक आई बाढ़ की चपेट में आ गईं. 

हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी, लेकिन स्थानीय सायरन प्रणाली की ओर से ख़ामी रही और अन्तिम चेतावनी तब जारी हुई जब ज़्यादातर लोग गहरी नींद में सो रहे थे.

हिमनद टूटने से आई बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि

इस महीने आई सभी बाढ़ें केवल बारिश की वजह से नहीं थीं.

7 जुलाई को नेपाल के रसुवा ज़िले में एक हिमनदी की सतह पर बनी "सुप्राग्लेशियल" झील फटने से अचानक आई बाढ़ में कुछ जलविद्युत संयंत्र, एक प्रमुख पुल और कई व्यापार मार्ग बह गए. 

इस भीषण घटना में कम से कम 11 लोगों की जान गई, जबकि अनेक लोग अब भी लापता हैं.

विश्व मौसम संगठन (WMO) के साझीदार, एकीकृत पहाड़ी विकास के लिए अन्तरराष्ट्रीय केन्द्र (ICIMOD) के वैज्ञानिकों का कहना है कि हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में हिमनदी-स्रोत वाली बाढ़ें अब पहले की तुलना में कहीं अधिक बार देखने को मिल रही हैं - जबकि दो दशक पहले ऐसी बाढ़ें आमतौर पर हर पाँच से दस साल में एक बार आती थीं.

केवल मई और जून 2025 के दौरान ही नेपाल, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में हिमनदी विस्फोट से जुड़ी तीन बाढ़ दर्ज की गईं, और 7 जुलाई को नेपाल में ऐसी दो और घटनाएँ हुईं. 

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि वैश्विक तापमान इसी गति से बढ़ता रहा, तो इस सदी के अन्त तक ऐसी बाढ़ की घटनाओं का ख़तरा तीन गुना तक बढ़ सकता है.

नेपाल के एक ऊँचाई पर बसे गाँव में आई बाढ़ के बाद का मंज़र.
© UNICEF

चेतावनी प्रणाली की ख़ामियाँ पाटना ज़रूरी

WMO (विश्व मौसम संगठन) अब बाढ़ पूर्वानुमान को बेहतर बनाने के लिए अपने वैश्विक प्रयास तेज़ कर रहा है. इसका वास्तविक समय मार्गदर्शन मंच अब 70 से अधिक देशों में उपयोग किया जा रहा है.

यह प्रणाली सैटेलाइट डेटा और रेडार वाले मौसम मॉडल को एकीकृत करती है ताकि सम्भावित ख़तरे का कई घंटे पहले ही पता लगाया जा सके. अब देशों की अगुवाई में वैश्विक रूप से समन्वित एक और तंत्र के रूप में इसका विस्तार किया जा रहा है.

2022 में विश्व बैंक के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि 1.81 अरब लोग - यानि दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी -100 में एक बार आने वाली गम्भीर बाढ़ जैसी घटनाओं के सीधे ख़तरे में हैं.

इस आबादी में से 89 प्रतिशत लोग, निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की "Early Warnings for All" (सर्वजन के लिए पूर्व चेतावनी) पहल का उद्देश्य है कि 2027 तक दुनिया के हर व्यक्ति को, प्रभावी प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली की सुरक्षा उपलब्ध हो सके.