ग़ाज़ा के लोगों के लिए आतंक और अराजकता, अब ‘मौत के दौर’ में पहुँचे
ग़ाज़ा में एक और भयावह सप्ताहान्त बीता, जहाँ भोजन की तलाश में निकले कम से कम 67 फ़लस्तीनी लोग मारे गए. संयुक्त राष्ट्र की राहत टीमों ने ग़ाज़ा की स्थिति को 'अराजकता' और 'भुखमरी' बताया उधर इसराइली सेना पहली बार डेयर अल-बलाह क्षेत्र में दाख़िल हुई है.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूए सहायता एजेंसी UNRWA ने सोमवार को एक चेतावनी में कहा है कि उसके अपने कर्मचारी भी युद्धग्रस्त ग़ाज़ा में ज़िन्दगी बचाने के लिए जूझ कर रहे हैं.
एजेंसी ने अपने सहयोगियों की ओर से आए हताशा भरे सन्देश साझा किए, जो वहाँ के बदतर हालात की तस्वीर पेश करते हैं.
UNRWA के एक कर्मचारी ने कहा, "हम अब मौत के दौर में जी रहे हैं. इस समय लोगों के चारों ओर केवल मौत है… कहीं बम गिर रहे हैं, कहीं हवाई हमले हो रहे हैं. बच्चे उनके सामने ही भूख और प्यास से धीरे-धीरे कमज़ोर होते जा रहे हैं… और फिर मौत के मुँह में चले जाते हैं."
कर्मचारी ने कहा, "जो डॉक्टर और नर्सें अब भी एजेंसी के क्लीनिकों और चिकित्सा केन्द्रों में काम कर रही हैं, वे अपनी आँखों के सामने बच्चों को तड़पते, ग़ायब होते और मरते देख रही हैं…और वे कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं."
जारी गोलीबारी...
संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, सप्ताहान्त के दौरान, भोजन हासिल करने की आस में निकले अनेक ग़ाज़ा वासियों पर, इसराइली टैंकों, माहिर निशानचियों और अन्य बन्दूकों से गोलियाँ चलाई गईं.
एजेंसी ने एक वक्तव्य में बताया है कि 20 जुलाई को 25 ट्रकों का राहत क़ाफ़िला ज़िकिम सीमा चौकी को पार करके, उत्तरी ग़ाज़ा में भूखे समुदायों की तरफ़ जा रहा था.
अन्तिम सुरक्षा चौकी पार करते ही ट्रकों का यह क़ाफ़िला, ऐसे हज़ारों लोगों की भीड़ में फँस गया जो भोजन पाने की आस में इन्तज़ार कर रहे थे, और तभी इसराइली बलों की गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें अनेक लोगों की मौत हो गई.
WFP ने इस घटना की निन्दा करते हुए कहा कि पीड़ित अपने और अपने परिवार के लिए केवल भोजन लेने आए थे, क्योंकि वे भुखमरी के कगार पर हैं.
यह हमला इसराइली आश्वासनों के बावजूद हुआ, जिनमें कहा गया था कि मानवीय राहत मार्गों पर कोई सैन्य मौजूदगी नहीं होगी.
WFP ने आगाह किया कि अगर ऐसी घटनाएँ और सैन्य कार्यवाईयाँ जारी रही, तो ग़ाज़ा में जीवन रक्षक सहायता जारी रखना मुश्किल हो जाएगा.
एजेंसी की यह प्रतिक्रिया उस घटना के एक दिन बाद आई है, जिसमें ग़ाज़ा के दक्षिण में एक सहायता केन्द्र के पास 36 लोगों को मार दिया गया था.
हज़ारों के लिए बेदख़ली आदेश
इसराइली सेना ने मध्य ग़ाज़ा के डेयर अल-बलाह में जो हाल के विस्थापन आदेश जारी किए हैं उनसे 50 हज़ार से 80 हज़ार के बीच लोग प्रभावित हुए हैं. इतने बड़े पैमाने पर यह आदेश 7 अक्टूबर 2023 के युद्ध के बाद पहली बार जारी किया गया है.
OCHA ने बताया कि इस नए आदेश से, डेयर अल-बलाह से लेकर भूमध्यसागर तक फैले हुए इलाक़े प्रभावित हैं, जिससे यूएन समेत मानवीय संगठनों के लिए सुरक्षित और प्रभावी सहायता पहुँचाना मुश्किल हो जाएगा.
यूएन के कर्मचारी डेयर अल-बलाह में कई जगह काम कर रहे हैं और उन जगहों की जानकारी दोनों पक्षों को दी गई है. OCHA ने कहा कि ये स्थान और सभी नागरिक इलाके़ विस्थापन आदेशों के बावजूद सुरक्षित रखे जाने चाहिए.
ख़बरों के मुताबिक़, 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों में अपहृत कुछ बन्धक इसी इलाके़ में हो सकते हैं.
ग़ाज़ा दो हिस्सों में विभाजित
ग़ाज़ा में, इसराइल के हालिया विस्थापन आदेश के बाद लगभग 88 प्रतिशत क्षेत्र या तो विस्थापन आदेशों के तहत है या इसराइली सैन्य क्षेत्र में शामिल हो गया है.
लगभग 21 लाख लोग, अब बचे हुए सीमित स्थान में सिमटे हैं, जहाँ बुनियादी सेवाएँ पूरी तरह ठप हो गई हैं. इनमें से बहुत से लोग कई बार विस्थापित हो चुके हैं.
UNRWA की वरिष्ठ आपातकाल अधिकारी लुइस वॉटरिज़ ने कहा, “ग़ाज़ावासी कहीं नहीं जा सकते, वे फँसे हुए हैं. वे बच्चों और ख़ुद की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि वहाँ भोजन उपलब्ध नहीं है और पानी भी बहुत कम है, इसलिए बहुत से लोग जीवन जोखिम में डालकर, थोड़ी राहत सामग्री लेने के लिए वितरण केन्द्रों तक जाते हैं, जोकि बहुत सीमित हैं.
उन्होंने कहा, “बच्चे कुपोषण और पानी की कमी से तड़प रहे हैं, और उनके माता-पिता के सामने ही मौत के शिकार हो रहे हैं. बमबारी और हमले जारी हैं, न तो बचकर कहीं जाने की कोई जगह है और न ही छुपने की.”