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अफ़ग़ानिस्तान के बामियान में स्थित महिला नशा मुक्ति उपचार केन्द्र.

अफ़ग़ानिस्तान: महिलाओं को मिल रही है, नशे की बेड़ियों से आज़ादी

© WHO Afghanistan
अफ़ग़ानिस्तान के बामियान में स्थित महिला नशा मुक्ति उपचार केन्द्र.

अफ़ग़ानिस्तान: महिलाओं को मिल रही है, नशे की बेड़ियों से आज़ादी

महिलाएँ

अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं को नशे से छुटकारा दिलाने के लिए, महिला नशा मुक्ति उपचार केन्द्र, आशास्वास्थ्य और एक नई ज़िन्दगी की आस बनकर उभरे हैं. ये सम्भव हो रहा है, संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों - यूएन ड्रग्स व अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और योरोपीय संघ के मिले-जुले प्रयासों की बदौलत.

बामियान के एक शान्त से गाँव की रहने वाली नसरीन, महज़ 20 साल की उम्र में, नशे की अन्धेरी गलियों से होकर गुजर चुकी थीं. शुरुआत एक मासूम-सी लगने वाली गोली से हुई, जो किसी ने मज़ाक-मज़ाक में उन्हें दी थी. 

लेकिन वही एक गोली धीरे-धीरे उन्हें अफ़ीम, ट्रामाडोल, प्रेगाबालिन और स्थानीय रूप से 'टैबलेट K' कहे जाने वाले जानलेवा नशों की गिरफ़्त में खींच ले गई.

नसरीन बताती हैं, "मैंने पूरी तरह ख़ुद पर से अपना सन्तुलन खो दिया था. मैं हर वक़्त दर्द में रहती थी, और अपने ही परिवार से चोरी करने लगी थी. अपने-आप से इतनी नफ़रत हो गई थी कि ज़िन्दगी बेकार लगने लगी थी – समझ में नहीं आता था कि इस सब से बाहर कैसे निकलूँ."

लेकिन सब कुछ तब बदल गया जब उनकी माँ को बामियान के WHO-समर्थित महिला नशा उपचार केन्द्र की एक पत्रिका मिली. उसमें पहली बार उन्हें वह उम्मीद नज़र आई जिसकी उन्हें लम्बे समय से तलाश थी.

नसरीन कहती हैं, “पहले मुझे डर था कि लोग मुझे तिरस्कार की नज़र से देखेंगे, लेकिन केन्द्र में मुझे अपनापन और संवेदना मिली."

उन्हें, 45 दिनों के इलाज के दौरान, दवाइयों के साथ-साथ परामर्श, मनोवैज्ञानिक समर्थन व रोज़मर्रा की देखभाल मिली. वहाँ उनकी मुलाक़ात, उनके जैसी ही कई महिलाओं से हुई, जो उन्हीं की तरह संघर्ष कर रही थीं. 

इस सफ़र में वह धीरे-धीरे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से ठीक होने लगीं. इलाज के बाद केन्द्र ने उन्हें एक सिलाई कार्यशाला से जोड़ा, जिससे वह फिर से काम कर सकें, आय अर्जित कर सकें और अपनी ज़िन्दगी को दोबारा संवार सकें.

बामियान के महिला नशा उपचार केन्द्र में नसरीन, अपने सम्पूर्ण उपचार और सशक्तिकरण के हिस्से के रूप में व्यावसायिक कौशल सीख रही हैं.
© WHO Afghanistan
बामियान के महिला नशा उपचार केन्द्र में नसरीन, अपने सम्पूर्ण उपचार और सशक्तिकरण के हिस्से के रूप में व्यावसायिक कौशल सीख रही हैं.

नसरीन मुस्कुराकर कहती हैं, "अब मुझे नशे से दूर हुए तीन महीने हो चुके हैं. मैंने अपने परिवार से फिर से जुड़ गई हूँ, नए दोस्त बनाए हैं, और सबसे अहम -मैं दोबारा सपने देखने लगी हूँ. मैं हर उस इनसान से यह कहना चाहती हूँ जो किसी भी तरह के नशे से जूझ रहे हैं: हार मत मानो. इससे उबरना पूरी तरह मुमकिन है."

WHO के अफ़ग़ानिस्तान में प्रतिनिधि डॉक्टर एडविन सेनीज़ा साल्वाडोर का कहना है, "नसरीन जैसी युवा महिलाओं को अपना खोया हुआ भविष्य दोबारा हासिल करते देखना ही हमारे कार्य की सबसे बड़ी प्रेरणा है."

उन्होंने कहा, "हर महिला को ये मौक़ा मिलना चाहिए कि वह नशे की लत से पूरी तरह मुक्त होकर गरिमा, स्वास्थ्य व उम्मीदभरा, सम्मानजनक जीवन जी सके. हम, उपचार और सामाजिक पुनर्स्थापन तक पहुँच बढ़ाकर, न केवल ज़िन्दगियाँ बचाते हैं, बल्कि उन्हें दोबारा आकार भी देते हैं."

बामियान स्थित महिला नशा उपचार केन्द्र इस बात की जीवन्त मिसाल है कि सहयोग और साझेदारी के ज़रिए कितना कुछ बदला जा सकता है. 

नसरीन जैसी अनेक महिलाएँ, WHO, संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स व अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC), और अफ़ग़ानिस्तान में योरोपीय संघ प्रतिनिधिमंडल (EU) के संयुक्त प्रयासों से, अब गरिमा, आत्मविश्वास और आशा के साथ जीवन की नई शुरुआत कर रही हैं - धीरे-धीरे, लेकिन मज़बूती से, एक-एक क़दम आगे बढ़ते हुए.