पाकिस्तान में मानसून की बाढ़ का क़हर, सैकड़ों लोग हताहत
पाकिस्तान में जून के अन्तिम सप्ताह में शुरू हुए मानसून की आपदा स्थिति के कारण अभी तक कम से कम 63 लोगों के मारे जाने और 290 लोगों के घायल होने की ख़बरे हैं. इनमें अनेक लोगों की मौतें, घातक बादल फटने और अचानक आई बाढ़ में एक ही दिन में हुई हैं. सरकार ने पूर्वी प्रान्त पंजाब के कुछ हिस्सों को गुरूवार को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया है.
पाकिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के अनुसार, देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रान्त पंजाब में, 26 जून को शुरू हुई मौसमी बारिश के बाद से देश भर में मारे गए लोगों की संख्या 120 से ज़्यादा हो गई है.
नदियों के बढ़ते जल स्तर, आगे और भी मूसलाधार बारिश होने के अनुमान, ग्रामीण इलाक़ों में ढहते घर और परिवहन सम्पर्क में बाधाओं जैसी आपदाओं ने, वर्ष 2022 में आई उस विनाशकारी बाढ़ की यादें ताज़ा कर दी हैं, जिसने देश के एक तिहाई हिस्से को जलमग्न कर दिया था. उस बाढ़ में 3 करोड़ 30 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए थे.
अगले 72 घंटों में पाकिस्तान के मध्यवर्ती और उत्तरी इलाक़ों में और भी तेज़ बारिश होने का अनुमान है.
मौसम के बारे में पूर्वानुमान बताने वालों ने झेलम नदी के किनारे कुछ स्थानों पर, 4 लाख 50 हज़ार क्यूसेक तक के "असाधारण उच्च" बाढ़ स्तर की चेतावनी दी है.
ख़ैबर पख़्तूनख़्वा और गिलगित-बाल्तिस्तान क्षेत्रों में, ग्लेशियर झील के फटने से बाढ़ आने की भी आशंका है.
संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत सामान की भारी कमी
संयुक्त राष्ट्र के, मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) की देखरेख में, पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने, इस महीने के शुरू में एक अन्तर-एजेंसी मानसून आपदा योजना जारी की थी, जिसे पाकिस्तान सरकार के नेतृत्व में लागू किया जाता है.
वैसे तो,पूर्व-निर्धारित सहायता आपूर्ति अनुमानित आवश्यकता से बहुत कम है, मगर सुरक्षा, पोषण, आश्रय और ग़ैर-खाद्य वस्तुओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
सहनक्षमता निर्माण
संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और पाकिस्तान सरकार ने, इस आपात स्थिति के बीच, इस सप्ताह ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के बुनेर और शांगला ज़िलों में एक जलवायु-जोखिम परियोजना शुरू की है.
इस पहल के तह,त पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ स्थापित की जाएँगी, समुदायों को सुरक्षित निकासी के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा और आपदा प्रतिक्रिया के लिए स्थानीय क्षमता को मज़बूत किया जाएगा.
WFP की पाकिस्तान निदेशक कोको उशियामा ने कहा, "बार-बार आने वाले जलवायु झटके, भूख, और कुपोषण का कारण बनते हैं, जिससे जीवन, आजीविका और सम्पूर्ण खाद्य प्रणालियाँ ख़तरे में पड़ जाती हैं."
"यह परियोजना पूर्व चेतावनी प्रणालियों और कार्रवाई में एक बहुस्तरीय निवेश का प्रतिनिधित्व करती है."
2022 में हुई तबाही की यादें
यह बढ़ती आपदा, जलवायु झटकों के प्रति पाकिस्तान की संवेदनशीलता को, एक बार फिर उजागर करती है.
2022 में, अभूतपूर्व मानसूनी बाढ़ ने 1 हज़ार 700 से ज़्यादा लोगों की जान ले ली थी, लाखों लोग विस्थापित हुए और जल प्रणालियाँ तबाह हो गई थीं, जिससे लाखों लोगों को पानी की सख्त कमी हो गई थी.
उस आपदा ने लगभग 40 अरब डॉलर का भारी आर्थिक नुक़सान भी पहुँचाया था और वर्षों के विकास प्रयासों को उलट दिया था
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित मानसून रुझान, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों को हर साल और भी ज़्यादा प्रभावित कर रहा है.