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दक्षिण एशिया में बच्चों को रोगों से बचाने के लिए रिकॉर्ड टीकाकरण

काठमांडू के शिवपुरी हायर सेकेंडरी स्कूल में एचपीवी टीकाकरण अभियान के बाद नेपाली स्कूली छात्राएं अपने टीकाकरण प्रमाण पत्र पकड़े हुए हैं।
© UNICEF/Laxmi-Prasad-Ngakhusi नेपाल ने विश्व कैंसर दिवस पर काठमांडू के शिवपुरी स्कूल से HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य 16 लाख से अधिक किशोरियों को टीका लगाना है.

दक्षिण एशिया में बच्चों को रोगों से बचाने के लिए रिकॉर्ड टीकाकरण

स्वास्थ्य

दक्षिण एशिया ने वर्ष 2024 में बच्चों को रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण में अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की है. दक्षिण एशियाई देश, मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति, स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत और मज़बूत वैश्विक साझेदारियों के बल पर, न केवल महामारी से आई गिरावट से उबर सकेबल्कि कोविड-पूर्व स्तरों को भी पीछे छोड़ते हुए, लाखों बच्चों को घातक बीमारियों से बचाने में सफल रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी नवीन आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दक्षिण एशिया ने बाल टीकाकरण में अब तक की सबसे ऊँची कवरेज दर्ज की है. 

पूरे क्षेत्र में 92% शिशुओं को डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (DTP) वैक्सीन की तीनों ख़ुराकें दी जा चुकी हैं. यह कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों से मज़बूत वापसी का संकेत है और इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र बच्चों के स्वास्थ्य अधिकारों के प्रति कितना गम्भीर एवं प्रतिबद्ध है.

यूनीसेफ़ के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय निदेशक संजय विजसेकेरा ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा, "आज पहले से कहीं अधिक बच्चे सुरक्षित हैं, और इसका श्रेय जाता है हमारे अग्रिम पंक्ति के निःस्वार्थ स्वास्थ्यकर्मियों को, मज़बूत सरकारी नेतृत्व को तथा दाताओं व साझेदारों के सहयोग व परिवारों के अटूट विश्वास को."

एक छोटा दक्षिण एशियाई बच्चा नीले रंग के वैक्सीन कूलर बॉक्स के बगल में कंक्रीट के चबूतरे पर बैठा है।
© UNICEF/US CDC/Anita Khemka

हालाँकि उन्होंने कहा कि हम यह नहीं भूल सकते कि अब भी लाखों बच्चे ऐसे हैं जिन्हें आंशिक रूप से या बिल्कुल भी टीके नहीं लगे हैं. हमे अपने प्रयास और तेज़ करने होंगे - विशेषकर ग्रामीण और दूर-दराज़ इलाक़ों के बच्चों के लिए.

2024 में नए कीर्तिमान, नई उम्मीदें

2024 में दक्षिण एशिया ने बच्चों के टीकाकरण में ऐतिहासिक प्रगति की. 92% शिशुओं को DTP वैक्सीन की तीनों ख़ुराकें मिलीं जोकि 2023 की तुलना में 2% अधिक थीं. 

पहली ख़ुराक पाने वाले बच्चों की संख्या भी बढ़कर 95% हो गई.

सबसे बड़ी उपलब्धि रही "ज़ीरो-डोज़" यानि एक भी टीका नहीं पाने वाले बच्चों की संख्या में 27% की गिरावट, जोकि 25 लाख से घटकर 18 लाख पर आई. 

बांग्लादेश के एक स्कूल में मुस्कुराती हुई दक्षिण एशियाई लड़कियों का एक समूह टीकाकरण के लिए कतार में इंतजार करते हुए शांति का संकेत दे रहा है।
© UNICEF/Farhana Satu

भारत में इस संख्या में 43% और नेपाल में 52% की गिरावट दर्ज की गई. 

पाकिस्तान ने अब तक की सबसे ऊँची DTP3 कवरेज हासिल की है जोकि 87% रही है. 

वहीं अफ़ग़ानिस्तान अब भी दक्षिण एशिया क्षेत्र में सबसे पीछे है, जहाँ कवरेज में 1% की गिरावट देखी गई.

ये आँकड़े दर्शाते हैं कि दक्षिण एशिया ने बच्चों के स्वास्थ्य की दिशा में अभूतपूर्व बढ़त हासिल की है.

ख़सरा के ख़िलाफ़ बड़ी कामयाबी

पाकिस्तान के पेशावर में एक स्वास्थ्यकर्मी द्वारा 25 दिन के शिशु को मौखिक पोलियो का टीका (ओपीवी) लगाया जा रहा है।
© UNICEF/Saiyna Bashir

दक्षिण एशिया ने ख़सरा को ख़त्म करने की दिशा में भी अहम प्रगति की है. 2024 में ख़सरा की पहली ख़ुराक पाने वाले शिशुओं की संख्या बढ़कर 93% हो गई, जबकि दूसरी ख़ुराक की कवरेज 88% तक पहुँची.

इसका सीधा असर नज़र आया और ख़सरा के मामलों में 39% की गिरावट आई. 2023 में ख़सरा के 90 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए थे वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर लगभग 55 पर आ गई.

हालाँकि यह बड़ी सफलता है, लेकिन ख़सरा के प्रकोप को पूरी तरह रोकने के लिए अब भी 95% कवरेज की ज़रूरत है. इसलिए अभियान जारी रखना ज़रूरी है.

बांग्लादेश के एक स्कूल में लड़कियां एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए कतार में इंतजार कर रही हैं।
© UNICEF/Farhana Satu

चुनौतियाँ बाक़ी

हाल की प्रगति के बावजूद दक्षिण एशिया में अब भी 29 लाख से अधिक बच्चे ऐसे हैं जो टीकाकरण से या तो पूरी तरह वंचित हैं या उन्हें टीकों की अधूरी ख़ुराक ही मिल पाई है. 

इन बच्चों तक पहुँचने के लिए यूनीसेफ़ और WHO ने, दक्षिण एशिया क्षेत्र के सभी सरकारों से अपने प्रयास तेज़ करने की अपील की है.

इसके लिए आवश्यक है, राजनैतिक प्रतिबद्धता बनाए रखना और देशों के भीतर ही धन की उपलब्धता बढ़ाना, हर किशोरी तक HPV टीका पहुँचाना, ज़ीरो-डोज़ बच्चों को शामिल करना, सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों में निवेश बढ़ाना, ख़सरा के कवरेज का अन्तराल भरना, और बीमारियों की निगरानी प्रणाली को मज़बूत करना.

अब भी हर बच्चे तक पहुँचना बाक़ी है - और यही अगला लक्ष्य है.

टीकाकरण अभियान के दौरान एक परावर्तक सतह पर हरे रंग के ढक्कन वाली सर्वाइरिक्स एचपीवी वैक्सीन की शीशियों की कतारें प्रदर्शित की जाती हैं।
© UNICEF/Farhana Satu

आगे का रास्ता

WHO दक्षिण-पूर्व एशिया के डॉक्टर थकसाफन थमरंगसी ने सरकारों से अपील की है कि वे "इस रफ़्तार को बनाए रखें और हर बच्चे तक जीवनरक्षक टीकों को पहुँचाने के लिए अपने प्रयास और तेज़ करें."

2024 में दक्षिण एशिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि समन्वय, निरन्तर प्रयास और समुदाय का विश्वास साथ हो, तो असाधारण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.

अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत में एक टीकाकरण केंद्र पर एक स्वास्थ्यकर्मी द्वारा एक छोटे लड़के को पोलियो का मौखिक टीका लगाया जा रहा है।
© UNICEF/Azizullah Karimi