ग़ाज़ा की व्यथा को 'बयाँ करने के लिए शब्द नहीं', सहायता पहुँचाने का आग्रह
संयुक्त राष्ट्र के आपात राहत मामलों के लिए अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने, ग़ाज़ा पट्टी में व्याप्त गहरे मानवीय संकट पर बुधवार को सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि भोजन ख़त्म होता जा रहा है, खाद्य सहायता पाने और आम फ़लस्तीनी लोग, अपने परिवार का पेट भरने की कोशिश में जान गँवा रहे हैं.
अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को बताया कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान खाद्य सामग्री, स्वास्थ्य व अन्य सहायता आपूर्ति की क़िल्लत, हवाई हमलों और बमबारी के बीच हज़ारों लोग विस्थापन का शिकार हुए हैं, सैकड़ों हताहत हुए हैं और उनकी व्यथा को बयाँ नहीं किया जा सकता है.
यूएन अवर महासचिव ने आगाह किया कि फ़ील्ड अस्पताल में लगातार शव लाए जा रहे हैं, चिकित्साकर्मी वहाँ भर्ती होने वाले घायलों से उनकी पीड़ा सुनते हैं. हर दिन की यही स्थिति है.
जून महीने में बच्चों में भुखमरी की दर अपने सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई, और 5,800 से अधिक लड़कियाँ व लड़के अचानक कुपोषण का शिकार हुए हैं.
मौजूदा “भूख संकट के बीच, पिछले सप्ताह, स्वयं को जीवित रखने के लिए खाद्य सामग्री की प्रतीक्षा कर रहे बच्चे व महिलाएँ एक हमले में मारे गए थे.”
उन्होंने कहा कि हमास ने अब भी बन्धकों को अपने क़ब्ज़े में रखा हुआ है, और उनके द्वारा सहायताकर्मियों पर हमला किए जाने की भी जानकारी मिली है.
ग़ाज़ा में स्वास्थ्य व्यवस्धा दरक चुकी है. 36 में से केवल 17 अस्पतालों और 170 में से 63 प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में ही आंशिक रूप से काम हो पा रहा है.
टॉम फ़्लैचर ने कहा कि इन परिस्थितियों में मानवीय सहायता को सबसे अधिक आवश्यकताओं वाले इलाक़ों में पहुँचाया जाना होगा, बिना किसी भेदभाव के. और इसका अर्थ है कि ज़रूरतमन्द आम नागरिकों का ख़याल रखा जाए, न कि युद्धरत पक्षों का.
आपात राहत प्रमुख के अनुसार, कुछ अस्पतालों में पाँच नवजात शिशु एक इन्क्यूबेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. 70 प्रतिशत से अधिक अति-आवश्यक दवाओं की कमी है.
पिछले सप्ताह, इसराइली प्रशासन ने ग़ाज़ा में एक सप्ताह में पाँच बार, प्रति दिन दो ट्रकों में ईंधन आपूर्ति की अनुमति दी थी, मगर उन्होंने सचेत किया कि यह जीवनरक्षक सेवाओं को जारी रखने के लिए आवश्यक मात्रा का केवल अंश भर है.
'बच्चों को बचाने में विफल रही दुनिया'
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख कैथरीन रसैल ने भी सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए बच्चों के लिए हालात पर गहरा क्षोभ प्रकट किया.
उन्होंने कहा कि पिछले 21 महीनों से जारी लड़ाई के दौरान 17 हज़ार से अधिक मारे गए हैं और 33 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं.
“हर दिन औसतन 28 बच्चों की जान जा रही है, जोकि एक पूरी कक्षा के बराबर है.”
आप इस पर एक क्षण के लिए विचार कीजिए. “पिछले लगभग दो वर्षों से हर दिन बच्चों से भरी एक पूरी कक्षा की मौत हुई है.”
“हम ग़ाज़ा में युद्धविराम, बच्चों की सुरक्षा और सभी बन्धकों की रिहाई की अपील करते हैं”
उन्होंने कहा कि जीवनरक्षक सेवाओं, भोजन व दवाओं को पाने के लिए क़तार में खड़े होने के दौरान बच्चे मारे गए हैं या वे अपंग हुए हैं.
पिछले सप्ताह, डेयर अल बलाह में नौ बच्चे और चार महिलाएँ मारे गए.
यूनीसेफ़ प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि 27 मई से 7 जुलाई के दौरान, यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने बच्चों समेत 798 फ़लस्तीनियों के मारे जाने की घटनाओं पर जानकारी जुटाई है.
वे हताशा में भोजन की तलाश कर रहे थे, सहायता वितरण केन्द्रों या मानवीय सहायता क़ाफिलों के पास हिंसा में उनकी जान गई.
कैथरीन रसैल ने कहा कि ग़ाज़ा में जल्द से जल्द यूएन के नेतृत्व में फिर से सुरक्षित मानवीय सहायता व्यवस्था की ओर लौटना होगा, और सभी उपलब्ध सीमा चौकियों के ज़रिए राहत आपूर्ति पहुँचाई जानी होगी.