यूक्रेन: रूस के हमलों में वृद्धि, रिकॉर्ड संख्या में लोगों की मौतें
यूक्रेन में रूस की सेना के मिसाइल और ड्रोन हमलों में इस महीने तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है जिससे देश में में सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं. अग्रिम सीमा से काफ़ी दूर, देश के भीतर हुए इन हमलों से बड़ा विनाश भी हुआ है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय - OHCHR ने कहा है कि केवल जुलाई में ही, अब तक कम से कम 139 लोग मारे गए हैं और 791 लोग घायल हुए हैं.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की प्रवक्ता लिज़ थ्रोसेल ने मंगलवार को कहा, "इस और अन्य युद्धों में बार-बार होने वाले हमलों से लोगों पर पड़ने वाले विनाशकारी, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को, केवल संख्याओं से नहीं आँका जा सकता."
हमलों में वृद्धि
12 जुलाई की रात को, रूसी सेना ने कथित तौर पर शाहेड-प्रकार के लगभग 600 मानवरहित हथियारों से हमले किए, जिनमें ड्रोन और मिसाइलों के हमले शामिल थे. इन हमलों में दो लोग मारे गए और 41 लोग घायल हुए.
चेर्निवत्सी, ल्वीव, चेर्कासी, वोलयिन और किरोवोहराद सहित कई क्षेत्रों में, इन हमलों से नुक़सान की ख़बर मिली है, जबकि ये सभी इलाक़े, सक्रिय युद्ध क्षेत्रों से दूर हैं.
उसी सप्ताह के शुरू में, रूसी सेना ने कथित तौर पर 24 घंटे की अवधि में, लम्बी दूरी के 728 ड्रोन दागे, जोकि एक रिकॉर्ड संख्या है.
जून का महीना आम लोगों के लिए पिछले तीन वर्षों में सबसे घातक रहा.
OHCHR की प्रवक्ता लिज़ थ्रोसेल ने कहा, "लोगों को तहख़ाने, गलियारों और मैट्रो स्टेशनों जैसे आश्रयों में घंटों तक शरण लेनी पड़ रही है. कुछ मामलों में तो लोग, आश्रय तक पहुँच ही नहीं पा रहे हैं."
स्वास्थ्य सेवा पर बोझ
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने, 24 फ़रवरी 2022 को रूसी संघ के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद से, यूक्रेन में स्वास्थ्य सुविधाओं और कर्मियों पर 2 हज़ार 504 हमलों की पुष्टि की है.
इन हमलों ने अस्पतालों, एम्बुलेंस और प्रथम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को निशाना बनाया है, जिनमें तथाकथित ऐसे हमले भी शामिल हैं, जिनमें शुरुआती हमलों के प्रारम्भिक प्रभाव के बाद, उन्हीं स्थानों पर फिर से हमले किए किए गए.
यूक्रेन में WHO के प्रतिनिधि डॉक्टर जार्नो हैबिश्ट ने कहा है, "इसका मतलब है कि हर दिन, दो से ज़्यादा हमले... स्वास्थ्य सेवा, मरीज़ों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षित जगह नहीं है."
स्वास्थ्य सेवा की पहुँच विशेष रूप से युद्ध की अग्रिम पंक्ति के क्षेत्रों में सीमित है, जहाँ स्वास्थ्य सेवा कर्मियों और ज़रूरी सामान की कमी है.
मनोवैज्ञानिक दबाव भी लोगों को परेशान कर रहा है. एक हालिया आकलन में पाया गया कि 10 में से सात लोगों ने, पिछले 12 महीनों में चिन्ता, अवसाद या गम्भीर तनाव की सूचना दी, जबकि दो में से एक व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने पिछले दो महीनों में ही काफ़ी तनाव का अनुभव किया है.
इस समस्या से निपटने के लिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय सहयोगियों ने, सवा लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है, और 220 से अधिक सामुदायिक केन्द्रों के माध्यम से, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया है.
संयुक्त राष्ट्र और मानवीय सहयोगियों की तरफ़ से, सदमा उपचार किटें और चिकित्सा सामग्री की निरन्तर आपूर्ति के बावजूद, इस सहायता कार्रवाई के लिए धन की कमी गम्भीर रूप से बनी हुई है.
जुलाई के मध्य तक, 2025 के लिए आवश्यक 12 करोड़ 90 लाख डॉलर की अपील के जवाब में, इस राशि का केवल साढ़े 35 प्रतिशत ही प्राप्त हो पाया है, जिसके कारण, 20 लाख से ज़्यादा लोग पर्याप्त चिकित्सा सहायता के बिना रह गए हैं.
जवाबदेही निर्धारित हो
मानवाधिकार प्रवक्ता लिज़ थ्रोसेल ने, युद्ध को तत्काल समाप्त करने और न्यायसंगत एवं स्थाई शान्ति की दिशा में प्रयास करने के, मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क के आहवान की तरफ़ भी ध्यान आकर्षित किया.
वोल्कर टर्क हाल ही में कह चुके हैं, "यूक्रेन पर रूसी संघ के बड़े पैमाने पर सशस्त्र हमले को तत्काल रोका जाना चाहिए और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप, स्थाई शान्ति के लिए काम तेज़ किया जाना चाहिए."
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी स्थाई समाधान में, मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघनों के लिए जवाबदेही, निर्वासित बच्चों की वापसी, क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा, युद्धबन्दियों के साथ मानवीय व्यवहार और मानवीय गलियारों की बहाली शामिल होनी चाहिए.