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यमन: हुदायदाह में यूएन मिशन (UNMHA) का कार्यकाल बढ़ा

यमन के हुदैदाह बंदरगाह पर रीना नामक एक विशाल मालवाहक जहाज खड़ा है, जिसके घाट पर बड़े-बड़े क्रेन और शिपिंग कंटेनरों के ढेर लगे हुए हैं।
@ UN OCHA/Giles Clarke हुदायदाह बन्दरगाह, यमन में आयात और मानवीय सहायता सामग्री के प्रवेश के लिए, बहुत अहम है.

यमन: हुदायदाह में यूएन मिशन (UNMHA) का कार्यकाल बढ़ा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने यमन के प्रमुख बन्दरगाह शहर हुदायदाह में यूएन मिशन (UNMHA) का कार्यकाल बढ़ा दिया है. उधर लाल सागर में हाल ही में हूथी लड़ाकों द्वारा जहाज़ों पर किए गए हमलों और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव पर अन्तरराष्ट्रीय चिन्ताएँ भी बढ़ी हैं.

हुदायदाह समझौते (UNMHA) का समर्थन करने के लिए प्रस्ताव संख्या 2786 (2025) सर्वसम्मति से पारित हुआ जिसके ज़रिए, संयुक्त राष्ट्र मिशन की अवधि 28 जनवरी 2026 तक बढ़ा दी गई है.

यह प्रस्ताव क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और बढ़ती मानवीय ज़रूरतों के बीच, नाज़ुक स्थिरता बनाए रखने में, यूएन मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है.

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यह प्रस्ताव हूथी लड़ाकों द्वारा नियंत्रित बन्दरगाह शहर - हुदायदाह में युद्धविराम और 2018 के स्टॉकहोम समझौते के लिए सुरक्षा परिषद के समर्थन की पुष्टि करता है. 

साथ ही, इस बन्दरगाह के तट का विसैन्यीकरण भी किए जाने का प्रावधान है, जहाँ से यमन के अधिकांश आयात और महत्वपूर्ण सहायता के लिए जहाज़ों का आवागमन होता है.

मिशन का भविष्य

इस प्रस्ताव से, यूएन मिशन के भविष्य पर बढ़ती बहस का भी संकेत मिलता है, जिसमें यूएन महासचिव से, नवम्बर (2025) तक एक समीक्षा प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया है ताकि संयुक्त राष्ट्र के कार्यों में समन्वय और सुसंगतता बढ़ाई जा सके.

इस समीक्षा में उन चुनौतियों पर भी ध्यान देने के लिए कहा गया है जिन्होंने UNMHA की कार्य क्षमता को सीधे तौर पर बाधित किया है.

UNMHA की स्थापना, वर्ष 2019 में यमन सरकार और अंसार अल्लाह (हूथी लड़ाकों का औपचारिक नाम) के बीच स्टॉकहोम समझौते के कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिए की गई थी, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में बड़े टकराव को रोकना है.

यह मिशन युद्धविराम की निगरानी करता है और पक्षों के बीच सम्पर्क तंत्र के माध्यम से, तनाव कम करने में सहायता करता है.

बढ़ रहा है तनाव

धरातल पर सैन्य स्थिति अब भी लगभग स्थिर बनी हुई है, लेकिन कई मोर्चों पर तनाव भी बढ़ रहा है.

यूएन महासचिव ने, जून (2025) में सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा था जिसमें बताया गया था कि युद्धविराम उल्लंघनों की बढ़ती संख्या, इस क्षेत्र की नाज़ुक स्थिति को उजागर करती है. 

युद्धविराम उल्लंघनों की ये संख्या, जून 2024 और मई 2025 के बीच औसतन प्रतिदिन 100 से अधिक दर्ज की गई थी.

यमन के सरकार-समर्थित बलों ने, हुदायदाह शहर पर सम्भावित हमले की आशंका में अपनी चौकियों को मज़बूत कर लिया है. 

जबकि हूथी लड़ाकों ने घुसपैठ के प्रयासों और जन-आन्दोलन को बढ़ा दिया है, जिसमें उनके नियंत्रण वाले इलाक़ों में सैन्य शैली के युवा शिविरों का आयोजन भी शामिल हैं.

लाल सागर में तनाव

लाल सागर में अन्तरराष्ट्रीय जहाज़ों पर हूथी लड़ाकों के हमलों ने इस स्थिति को और भी जटिल बना दिया है.

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने इन हमलों की निन्दा की है और इन्हें अन्तरराष्ट्रीय समुद्री क़ानून का उल्लंघन बताया. साथ ही चेतावनी भी दी कि इन हमलों के, गम्भीर पर्यावरणीय और भू-राजनैतिक परिणाम हो सकते हैं.

उन्होंने अंसार अल्लाह (हूथी) से ऐसे हमले बन्द करने का आहवान किया जिनसे यमन और उसके आसपास तनाव बढ़ने का ख़तरा है.

पोलियो से बचाने का अभियान

यमन के अदन में एक टीकाकरण अभियान के दौरान एक स्वास्थ्यकर्मी एक बच्चे को पोलियो का मौखिक टीका लगा रहा है।
© UNICEF/Mahmoud Alfilastini

इस बीच, पोलियो वायरस के लगातार फैलने को लेकर बढ़ती चिन्ताओं के बीच, यमन के दक्षिणी हिस्से में सरकार-नियंत्रित क्षेत्रों में पोलियो टीकाकरण का एक नया दौर चल रहा है.

12 से 14 जुलाई तक, 12 प्रान्तों में स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए गए. इस अभियान का उद्देश्य वैरिएंट टाइप 2 पोलियोवायरस के प्रकोप को रोकना है.

यूनीसेफ़ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से यह अभियान ऐसे समय में चलाया गया है जब देश में 2021 से अब तक, इसके संक्रमण के 282 मामले सामने आ चुके हैं. जबकि पर्यावरणीय निगरानी में, पोलियो संक्रमण के जारी रहने की पुष्टि हुई है.

यमन में WHO की कार्यवाहक प्रतिनिधि डॉक्टर फ़ेरिमा कूलिबली-ज़ेरबो का कहना है, "यह अभियान (पोलियो) संक्रमण को रोकने और हर बच्चे को पोलियो के घातक प्रभावों से बचाने के लिए आवश्यक है."