टिकाऊ विकास लक्ष्यों की 2030 समय सीमा से पहले, यूएन की चेतावनी घंटी
2000 से 2019 के दौरान, वैश्विक जीवन प्रत्याशा (life expectancy) में पाँच वर्ष की वृद्धि हुई, मगर कोविड-19 महामारी के बाद ये बेहतरी लुढ़क कर दो साल तक पहुँच गई. 2015 के बाद से अब तक, 11 करोड़ बच्चों ने स्कूलों में प्रवेश किया, लेकिन 2023 तक, 27 करोड़ से अधिक बच्चों की कक्षा तक पहुँच नहीं थी.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को ‘टिकाऊ विकास लक्ष्यों’ (एसडीजी) पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें प्रगति और विफलताओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है.
इसके अनुसार, 17 लक्ष्यों तक पहुँचने की दिशा में प्रगति तो हुई है, लेकिन 2030 तक इन्हें साकार करने के मार्ग से दुनिया अभी दूर है.
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि यह रिपोर्ट, प्रगति मार्ग का एक दिशा सूचक है, जो दर्शाता है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल कर पाना अब भी सम्भव है, यदि हम तुरन्त, एकता व अटूट संकल्प के साथ प्रयास करें.
यह रिपोर्ट, एसडीजी पर उच्चस्तरीय राजनैतिक फ़ोरम के पहले दिन जारी की गई है, जोकि अगले 10 दिनों तक न्यूयॉर्क में आयोजित हो रहा है.
‘विकास आपात स्थिति’
वर्ष 2015 में, यूएन महासभा ने 2030 एजेंडा को पारित किया था, जिसमें टिकाऊ विकास के लिए 17 लक्ष्य निर्धारित किए गए: निर्धनता उन्मूलन, शून्य भुखमरी, लैंगिक समानता, गुणवत्तापरक शिक्षा, सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल, जलवायु कार्रवाई समेत अन्य लक्ष्य जिन्हें 2030 तक हासिल किया जाना था.
मगर, इस संकल्प के 10 वर्ष बाद, इस 2030 एजेंडा को नई चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है. विकासशील देशों में विकास के लिए चार हज़ार अरब डॉलर की कमी है और बढ़ते भूराजनैतिक तनाव के कारण बहुपक्षवाद पर आधारित व्यवस्था कमज़ोर हो रही है.
इस पृष्ठभूमि में, टिकाऊ विकास लक्ष्यों का केवल 18 फ़ीसदी ही 2030 की समय सीमा के अनुरूप पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. 17 प्रतिशत में औसत प्रगति हुई है, लेकिन 50 फ़ीसदी से अधिक लक्ष्यों पर प्रगति की रफ़्तार धीमी है, जबकि 18 प्रतिशत बेहतरी के बजाय ढलान पर हैं.
यूएन महासचिव ने आगाह किया कि हम वैश्विक विकास के विषय में एक आपात स्थिति का सामना कर रहे हैं. 80 करोड़ से अधिक लोग अत्यधिक निर्धनता में रह रहे हैं, जलवायु प्रभाव गहन हो रहे हैं और क़र्ज़ का बोझ बढ़ता जा रहा है.
जीवन में वास्तविक बदलाव
2015 से 2023 के दौरान, मातृत्व मौतों और पाँच वर्ष से कम आयु में बाल मौतों की दर में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
इसी अवधि में, 54 देशों में कम से कम एक उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में फैलने वाली बीमारी (tropical disease) का उन्मूलन करने में सफलता मिली. मलेरिया के करोड़ों मामलों की रोकथाम सम्भव हुई.
मगर, हर 10 में से एक व्यक्ति अब भी अत्यधिक निर्धनता में रहने के लिए मजबूर है और हर 11 में से एक व्यक्ति को खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है.
1.1 अरब लोग झुग्गी-झोपड़ियों में, बुनियादी सेवाओं के अभाव में जीवन गुज़ार रहे हैं और उनके पास स्वच्छ जल व साफ़-सफ़ाई की सुविधा नहीं है. 2024 में हर 12 मिनट में एक व्यक्ति, हिंसक टकराव में अपनी जान गँवा रहा था.
यानि पिछले 10 वर्षों में विशाल संख्या में लोगों के जीवन में बदलाव आया है लेकिन इसके बावजूद, बहुत से लोग पीछे छूट गए हैं, और कुछ के लिए तो हालात बद से बदतर हुए हैं.
विकास के केन्द्र में डेटा
महासचिव की रिपोर्ट में, टिकाऊ विकास के लिए भरोसेमन्द डेटा को अहम माना गया है, जिसके ज़रिए, संयुक्त राष्ट्र, देशों की सरकारों, और नागरिक समाज को प्रगति का आकलन करने और कमज़ोर क्षेत्रों में निवेश तय करने में मदद मिल सकती है.
2015 में जब 2030 एजेंडा को पारित किया गया, उस समय केवल एक-तिहाई लक्ष्यों पर पर्याप्त डेटा उपलब्ध था, जबकि एक-तिहाई के आकलन के लिए अन्तरराष्ट्रीय सहमति प्राप्त तौर-तरीक़े नही थे.
आज, 70 प्रतिशत से अधिक एसडीजी की अच्छे से निगरानी की जाती है और सभी सूचकांकों को अन्तरराष्ट्रीय मानदंड के अनुरूप स्थापित किया गया है.
यूएन महासचिव ने कहा कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पूरी तरह से हासिल करना करना तब तक सम्भव नहीं है, जब तक वर्तमान वित्तीय तंत्र में ठोस सुधार न किए जाएं. इसकी शुरुआत बहुपक्षवाद में निवेश के साथ की जानी होगी.