ग़ाज़ा: पानी लेने की क़तार में जुटे बच्चों की हमले में मौत, यूनीसेफ़ ने जताया क्षोभ
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने ग़ाज़ा में एक सहायता वितरण केन्द्र पर जल आपूर्ति की प्रतीक्षा कर रहे सात बच्चों के एक हमले में मारे जाने के बाद, इसराइल से अपने सैन्य तौर-तरीक़ों, कार्रवाई के नियमों की समीक्षा किए जाने का आग्रह किया है.
ख़बरों के अनुसार, यह घटना मध्य ग़ाज़ा में रविवार को हुई, जिसमें इसराइली हवाई कार्रवाई में सात बच्चों समेत कुल 11 लोगों की जान गई.
इसराइली सेना ने बताया कि उनका निशाना एक आतंकी था, लेकिन एक "तकनीकी त्रुटि" के कारण गोलाबारी अपने लक्ष्य से भटक गई.
UNICEF की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने ध्यान दिलाया कि इस घटना से कुछ ही दिन पहले भी पोषण सामग्री लेने के लिए क़तार में खड़ी कई महिलाएँ और बच्चे मारे गए थे.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, X, पर अपने सन्देश में कहा कि, “इसराइली अधिकारियों को अपने 'रूल्स ऑफ़ इंगेजमेंट' यानि सैन्य कार्रवाई के नियमों की तत्काल समीक्षा करनी होगी और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानूनों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करना होगा… ख़ासकर नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा के सन्दर्भ में.”
संयुक्त राष्ट्र ने खाद्य सहायता प्राप्त करने की कोशिश में अपनी जान गँवा रहे फ़लस्तीनियों की व्यथा पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है.
ग़ाज़ा में मानवीय हालात बेहद गम्भीर हैं, और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि पूरी आबादी, लगभग 21 लाख लोगों, को भरपेट खाना नहीं मिल पा रहा है. हज़ारों बच्चे कुपोषण का शिकार बताए गए हैं.
भोजन मौजूद, लेकिन पहुँच नहीं
इस बीच, फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी, (UNRWA) ने कहा है कि, “खाद्य सहायता और दवाओं से भरे ट्रक ग़ाज़ा के बाहर गोदामों में इन्तज़ार कर रहे हैं.”
UNRWA ने आम नागरिकों को भुखमरी से बचाने और ग़ाज़ा की नाकाबन्दी का अन्त किए जाने का आग्रह किया है.
यूएन एजेंसी ने ज़ोर देकर कहा है कि "संयुक्त राष्ट्र और UNRWA को अपना जीवनरक्षक कार्य करने दीजिए."
उधर, यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने सचेत किया है कि ग़ाज़ा में अब तक जिस स्तर पर मानवीय सहायता सामग्री को पहुँचाने की अनुमति मिली है, वो विशाल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पूर्ण रूप से अपर्याप्त है.
ग़ाज़ा की 86 फ़ीसदी आबादी या तो अपनी जगह छोड़कर चले जाने के आदेशों के दायरे में है या फिर इसराइली सैन्यीकृत ज़ोन के भीतर रहने के लिए मजबूर है.
पश्चिमी तट में चिन्ताजनक स्थिति
ग़ाज़ा में जारी युद्ध के बीच, UNRWA ने बताया है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में भी फ़लस्तीनी आबादी की स्थिति बेहद चिन्ताजनक है.
UNRWA प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी ने सोमवार को स्विट्ज़रलैंड में एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि भूमि का हरण करने की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है.
महाआयुक्त लज़ारिनी ने कहा, “यह केवल विध्वंस नहीं है, यह सुनियोजित जबरन विस्थापन का हिस्सा है, जोकि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन और सामूहिक दंड का ही एक रूप है.”
बताया गया है कि जनवरी में, इसराइली सेना ने पश्चिमी तट के तुलकर्म और जेनिन में अपनी कार्रवाई शुरू की, जिसे UNRWA ने पिछले दो दशकों में सबसे व्यापक ऑपरेशन क़रार दिया है. इसमें बड़े पैमाने पर बर्बादी हुई है, लोग विस्थापित हुए हैं और इसराइली बस्तियों के निवासियों के हमलों में तेज़ी आई है.
2025 के दौरान अब तक, ऐसे 700 से अधिक हमलों की जानकारी मिली है, जिससे 200 समुदाय प्रभावित हुए हैं, मुख्यत: रामल्लाह, नबलूस और हेब्रॉन गवर्नरेट में.