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भारत-यूएन कोष: संगीत के ज़रिए सामाजिक बदलाव लाने की पहल को समर्थन

‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ पर आधारित इस परियोजना में वेनेज़्वेला और उससे परे अन्य देशों में भी बच्चों और युवाओं को नई आशाएँ व अवसर प्रदान करने की तैयारी है.
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‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ पर आधारित इस परियोजना में वेनेज़्वेला और उससे परे अन्य देशों में भी बच्चों और युवाओं को नई आशाएँ व अवसर प्रदान करने की तैयारी है.

भारत-यूएन कोष: संगीत के ज़रिए सामाजिक बदलाव लाने की पहल को समर्थन

एसडीजी

वेनेज़ुएला में पिछले कई दशकों से, निर्बल, निर्धन समुदायों के बच्चों व किशोरों के जीवन को संगीत की धुनों व वाद्य यंत्रों से संवारने पर आधारित एक कार्यक्रम ने अहम भूमिका निभाई है. अब एक नई परियोजना के तहत ‘ऐल सिस्टेमा’ नामक इस पहल को नए आयाम दिए जा रहे हैं ताकि संगीत के सहारे 11 लाख से अधिक युवाओं को सीखने-सिखाने, आगे बढ़ने और फलने-फूलने के अवसर मुहैया कराए जा सकें.

वेनेज़ुएला में शुरू हुई ‘ऐल सिस्टेमा’ पहल, वाद्ययंत्र मंडलियों (ऑरकैस्ट्रा) और समूह गान (choirs) के ज़रिए स्थानीय समुदायों के जीवन में बदलाव लाने पर केन्द्रित है.

अत्यधिक निर्धनता या कठिन परिस्थितियों में गुज़र-बसर कर रहे बच्चों व किशोरों को संगीत कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है, जिससे उन्हें गरिमा, अनुशासन की अहमियत का भान होता है और उनके सपनों को नई उड़ान मिलती है.

अब भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष के समर्थन, और यूएन विकास कार्यक्रम (UNDP) और ‘Fundación Musical Simón Bolívar’ (ऐल सिस्टेमा) संस्था की भागेदारी से, एक नए प्रोजेक्ट के तहत वेनेज़ुएला की इस नवाचारी पहल में विस्तार किया जा रहा है.

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दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ पर आधारित इस परियोजना में वेनेज़ुएला और उससे परे अन्य देशों में भी बच्चों और युवाओं को नई आशाएँ व अवसर प्रदान करने की तैयारी है.

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को, चाहे वह कहीं भी रहता हो या फिर उसकी आय का स्तर कुछ भी हो, उच्च गुणवत्ता वाली संगीत शिक्षा प्राप्त हो सके. एक सुरक्षित व समावेशी माहौल में.

इसके अलावा, संगीत शिक्षा को साकार करने वाले लोगों में भी निवेश किया जाएगा: सैकड़ों शिक्षकों को प्रशिक्षण दिए जाने, और लड़कियों व महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा दिए जाने की योजना है.

साथ ही, वेनेज़ुएला में स्थानीय स्तर पर वाद्य यंत्र बनाने या उनकी मरम्मत करने वाले कारीगरों के लिए भी समर्थन सुनिश्चित किया गया है, ताकि उनकी एक नई पीढ़ी को तैयार किया जा सके.

संस्कृति व सामाजिकता का मेल

नई सुविधाओं के साथ तैयार हुई एक कक्षा में गूँजने वाली संगीत की हर एक धुन, मरम्मत होने के बाद उपयोग में लाया जा रहा एक वाद्य यंत्र, सामाजिक जुड़ाव के साथ-साथ सांस्कृतिक सशक्तिकरण को परिलक्षित करता है.

इस परियोजना में अन्य देशों में ‘ऐल सिस्टेमा’ मॉडल को लागू करने के लिए ज्ञान का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिससे समावेशी ढंग से सीखने-सिखाने, सांस्कृतिक रोज़गार सृजित करने और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मज़बूती मिलने की आशा है.

संगीतकारों, शिक्षाविद, सांस्कृतिक नेताओं की तकनीकी समझ को प्रोत्साहन देने, ट्रेनिंग कार्यक्रमों में भागेदारी बढ़ाने के अलावा, किसी देश की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सर्वोत्तम तौर-तरीक़े विकसित जाने पर भी बल दिया गया है.

वर्ष 2027 तक, इस परियोजना का लक्ष्य ‘ऐल सिस्टेमा’ की पहुँच में विस्तार के ज़रिए 20 लाख लोगों तक इसका लाभ पहुँचाना है.

भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष

वर्ष 2017 में 15 करोड़ डॉलर के संकल्प के साथ, भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष की स्थापना की गई थी, जिसके तहत, वैश्विक दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) में टिकाऊ विकास परियोजनाओं के लिए समर्थन प्रदान किया जाता है.

भारत सरकार की अगुवाई में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के सहयोग से लागू की जाने वाली इन परियोजनाओं में, सबसे कम विकसित देशों और लघु द्वीपीय विकासशील देशों की आवश्यकताओं पर प्रमुखता से ध्यान केन्द्रित किया जाता है.