न ईंधन, न सहायता, न बचने का रास्ता: ग़ाज़ा में दरकते हालात पर चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों ने अपने एक साझा वक्तव्य में चेतावनी जारी की है कि ग़ाज़ा एक गम्भीर ईंधन संकट से जूझ रहा है और इसकी आपूर्ति के अभाव में वहाँ मानवतावादी अभियान ठप होने और मानवीय सहायता पर निर्भर समुदायों के जीवन पर जोखिम है.
यूएन एजेंसियों ने शनिवार को जारी अपने वक्तव्य में कहा कि ग़ाज़ा में गुज़र-बसर के लिए ईंधन बहुत अहम है, और इसके अभाव में 21 लाख लोगों के लिए विकट हालात हैं.
ईंधन से अस्पताल, जल शोधन संयंत्र, बेकरी, ऐम्बुलेंस समेत अन्य कई आवश्यक सेवाएँ सुनिश्चित की जाती हैं.
मगर, स्थाई रूप से ईंधन आपूर्ति के अभाव में मातृत्व स्वास्थ्य, नवजात शिशुओं की देखभाल, गहन चिकित्सा व्यवस्था दरक रही है और ऐम्बुलेंस सेवा भी ठप है.
हिंसक टकराव के बीच पहले से ही गहरी खाद्य असुरक्षा से जूझ रही फ़लस्तीनी आबादी के लिए ईंधन की क़िल्लत विनाशकारी हालात की वजह बन रही है.
यूएन मानवतावादी एजेंसियों के अनुसार, पर्याप्त ईंधन के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ जल आपूर्ति, मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयास पूरी तरह से रुक जाएंगे.
ईंधन की अपर्याप्त आपूर्ति
यूएन एजेंसियों के अनुसार, पिछले 130 दिनों में पहली बार, पिछले सप्ताह थोड़ी मात्रा में ईंधन को ग़ाज़ा में पहुँचाने की अनुमति दी गई. यह स्वागतयोग्य है, लेकिन 75 हज़ार लीटर केवल दो दिन की आपूर्ति है और स्थानीय आबादी की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
इससे पहले, यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने शनिवार को पत्रकारों के साथ बातचीत में ग़ाज़ा में बिगड़ी स्थिति पर चिन्ता व्यक्त की थी.
“युद्धविराम के बिना गुज़रा हर दिन, ऐसी मौतों की वजह है जिन्हें रोका जा सकता है. कष्ट में जान गँवा रहे बच्चे, और स्वीकृति प्राप्त थोड़ी बहुत मदद पाने की कोशिश में गोलियाँ खा रहे भूख लोग.”
स्तेफ़ान दुजैरिक ने इसराइल द्वारा सहायता आपूर्ति पर थोपी गई पाबन्दियों के जारी रहने पर क्षोभ व्यक्त किया.
जान पर जोखिम
उन्होंने बताया कि गुरूवार को पहुँचे ईंधन को कुछ अस्पतालों में वितरित किया गया है, लेकिन केवल दक्षिणी ग़ाज़ा में. यह इसलिए, चूँकि इसराइली प्रशासन ने उत्तरी ग़ाज़ा में ईंधन पहुँचाने के प्रयास को नकार दिया है.
इस तरह से प्रयास ख़ारिज किए जाने से ज़िन्दगियों पर जोखिम है.
यूएन प्रवक्ता ने कहा कि ईंधन की क़िल्लत से जल शोधन प्रक्रिया,ऐम्बुलेंस सेवा और कचरा प्रबन्धन पर असर हुआ है, और ये सभी सेवाएँ दरकने के कगार पर हैं.
गुरूवार को, 15 मानवतावादी मिशन के लिए इसराइली प्रशासन के साथ समन्वय की आवश्यकता थी लेकिन केवल छह को ही अनुमति मिल पाई. पाँच को सिरे से नकार दिया गया, जबकि चार मिशन के मार्ग में अवरोध या फिर देरी का सामना करना पड़ा.
ग़ाज़ा में पिछले चार महीनों से टैंट, आश्रय व्यवस्था के लिए सामग्री समेत अन्य आपूर्ति को पहुँचने से रोका गया है, जिससे हज़ारों लोग के लिए चुनौतीपूर्ण हालात हैं.