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म्याँमार में फिर भड़की हिंसा के बीच, अन्य डेढ़ लाख रोहिंग्या लोग बांग्लादेश पहुँचे

बांग्लादेश से उत्तर अचेह, इंडोनेशिया के उली माडन में आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी एक नाव से अपना सामान उतार रहे हैं।
© UNHCR/Amanda Jufrian म्याँमार में जानलेवा हालात से बचने के लिए, रोहिंज्या लोग अन्य देशों को जाने की ख़ातिर, घातक समुद्री यात्राएँ करने को विवश हैं.

म्याँमार में फिर भड़की हिंसा के बीच, अन्य डेढ़ लाख रोहिंग्या लोग बांग्लादेश पहुँचे

प्रवासी और शरणार्थी

म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में बढ़ते टकराव और चुनिन्दा लोगों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा ने, पिछले 18 महीनों में अन्य लगभग एक लाख 50 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थियों को बांग्लादेश भागने पर मजबूर कर दिया है. यह पड़ोसी देश में हाल के वर्षों में सबसे बड़ा पलायन है.

म्याँमार के भीतर सशस्त्र टकराव और हिंसा के तेज़ होने और हालात बिगड़ने के साथ, हज़ारों लोग, सुरक्षा की तलाश में, बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार के भीड़भाड़ वाले शिविरों में पहुँच रहे हैं. 

वहाँ लगभग दस लाख रोहिंग्या शरणार्थी पहले से ही घनी आबादी वाले शिविरों में रह रहे हैं.

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संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - UNHCR के प्रवक्ता बाबर बलोच ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया, "2017 के बाद से बांग्लादेश में पहुँचने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों का यह सबसे बड़ा पलायन है."

उन्होंने स्पष्ट किया कि 2017 में राख़ीन प्रान्त में हुई घातक हिंसा के बाद लगभग साढ़े 7 लाख रोहिंग्या भागे थे, उसके उलट हाल के समय में, म्याँमार से बांग्लादेश में पहुँचने वाले शरणार्थियों की संख्या में यह वृद्धि धीरे-धीरे हुई है.

शरण दिए जाने की हिमायत

UNHCR इन शरणार्थियों की तत्काल मानवीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, बांग्लादेश के स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है.

बाबर बलोच ने कहा, "म्याँमार में हिंसा व टकराव बेरोकटोक जारी है, इसलिए हमने, बांग्लादेशी अधिकारियों से, हिंसा से बचकर भाग रहे इन लोगों को, सुरक्षा व शरण तक व्यवस्थित पहुँच प्रदान करने की हिमायत की है."

बांग्लादेश लम्बे समय से रोहिंग्या लोगों को शरण देता रहा है, जो म्याँमार का एक अल्पसंख्यक समुदाय है और मुख्यतः बौद्ध है.

देश में इस समय लगभग दस लाख लोग शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं और हाल ही में आए शरणार्थियों की बढ़ती संख्या से, संसाधनों पर और दबाव पड़ रहा है. इनमें बहुत सी महिलाएँ और बच्चे हैं.

बहुत से लोग स्थानीय समर्थन पर बहुत अधिक निर्भर हैं और शिविरों में पहले से रह रहे लोगों के साथ सीमित संसाधनों के साथ जीवन गुज़ार रहे हैं.

सहायता राशि की सख़्त ज़रूरत

UNHCR के प्रवक्ता बाबर बलोच ने बताया कि जून के अन्त तक, लगभग 1 लाख 21 हज़ार नए शरणार्थियों का बायोमैट्रिक पंजीकरण किया जा चुका था. अलबत्ता माना जाता है कि बहुत से अन्य लोग शिविरों में अनौपचारिक रूप से रह रहे हैं.

पर्याप्त आश्रय की उपलब्धता का मुद्दा एक बड़ी चिन्ता का विषय बना हुआ है क्योंकि सुविधाओं पर, नई आबादी को समायोजित करने के लिए बोझ बढ़ रहा है.

बाबर बलोच ने कहा, "ये नए शरणार्थी, पहले से रह रहे लगभग दस लाख रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ जुड़ गए हैं जो सिर्फ़ 24 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में अत्यधिक भीड़ भरे स्थानों में रहने को विवश हैं. अधिक मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है."

सहायता साझीदार एजेंसियाँ, भोजन, चिकित्सा देखभाल, शिक्षा और आवश्यक राहत सामग्री सहित बुनियादी सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम रही हैं. हालाँकि, धन की कमी के कारण अब यह सहायता गम्भीर खतरे में है.

यूएनएचसीआर ने चेतावनी दी है कि 2024 के लिए साढ़े 25 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता अपील के जवाब में, केवल 35 प्रतिशत ही राशि प्राप्त हुई है. अगर तत्काल वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं हुई तो, पूरा अभियान ध्वस्त हो सकता है.