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ग़ाज़ा: भूख मिटाने या गोलीबारी की चपेट में आने का विकल्प 'अस्वीकार्य'

ग़ाज़ा के डेयर अल बलाह में एक लड़की अपने टैंट के पास है, जो इसराइली हमले में बर्बाद हो गया था.
© UNICEF/Eyad El Baba
ग़ाज़ा के डेयर अल बलाह में एक लड़की अपने टैंट के पास है, जो इसराइली हमले में बर्बाद हो गया था.

ग़ाज़ा: भूख मिटाने या गोलीबारी की चपेट में आने का विकल्प 'अस्वीकार्य'

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायताकर्मियों ने ग़ाज़ा पट्टी में एक इसराइली हमले में, बच्चों सहित उन लोगों के मारे जाने पर क्षोभ व्यक्त किया है जो पोषक आहार पाने की प्रतीक्षा कर रहे थे. उन्होंने ग़ाज़ा में खाद्य वितरण केन्द्रों पर फ़लस्तीनियों के मारे जाने की सिलसिलेवार घटनाओं की एक बार फिर कठोर निन्दा की है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि अत्याचार अपराधों को अंजाम दिए जाने की घटनाओं पर चिन्ता जताई गई है और यह जोखिम निरन्तर बना हुआ है.

लोग भोजन व दवा जैसी अति-आवश्यक सामग्री की आस में क़तार में खड़े होते हैं और तब उन पर बार-बार हमले हो रहे हैं. उनके पास पेट भरने या फिर गोलियों की चपेट में आने का ही विकल्प है.

“यह अस्वीकार्य है और यह जारी है.”

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OHCHR कार्यालय, ग़ाज़ा के डेयर अल बलाह इलाक़े में गुरूवार को महिलाओं व बच्चों समेत 15 फ़लस्तीनियों के मारे जाने की घटना पर जानकारी जुटा रहा है.

ये घटना, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के साझीदार संगठन, ‘प्रोजेक्ट होप’ के सामने स्थित एक क्लीनिक में हुई. 

उस समय क़तार में खड़े लोग अपने लिए पोषक खाद्य सामग्री हासिल करने की प्रतीक्षा कर रहे थे.

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने अपने एक वक्तव्य में जीवनरक्षक मदद पाने की कोशिश कर रहे लोगों के मारे जाने की घटना को अक्षम्य बताया है.

इसराइली सैन्य बलों का कहना है कि यह घटना तब हुई जब हमास गुट के एक सदस्य को निशाना बनाया जा रहा था, जोकि 7 अक्टूबर 2023 को आतंकी हमलों में संलिप्त था.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय प्रवक्ता से सवाल किया गया कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाते समय, बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान को जोखिम में डालना कितना तर्कसंगत है.

उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा युद्ध के दौरान, यूएन कार्यालय ने अनेक बार चिन्ता जताई है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के सिद्धान्तों का सम्मान नहीं किया जा रहा है.

“हमने ग़ाज़ा में कुल मृतक संख्या देखी है, जिमें एक बड़ा हिस्सा महिलाओं व बच्चों का है. और यह घटनाक्रम एक बार फिर गम्भीर प्रश्न उठाता है कि क्या इन सिद्धान्तों का सम्मान हो भी रहा है.”

भोजन की क़तार में मौत

ग़ाज़ा में खाद्य वितरण केन्द्रों और मानवीय सहायता क़ाफ़िलों के पास आम फ़लस्तीनियों के मारे जाने की घटनाएँ नियमित रूप से हो रही हैं.

ग़ाज़ा में भोजन, ईंधन और अन्य प्रकार के राहत सामान की आपूर्ति पर पाबन्दी है. ,

संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल ने इस वर्ष मई महीने से, यूएन एजेंसियों व अन्य मानवतावादी संगठनों को दरकिनार करते हुए, ‘ग़ाज़ा मानवतावादी फ़ाउंडेशन’ (GHF) के तहत खाद्य वितरण केन्द्र स्थापित किए हैं.

मानवाधिकार कार्यालय प्रवक्ता ने ध्यान दिलाया कि 27 मई को, इस फ़ाउंडेशन द्वारा काम शुरू किए जाने के बाद से 7 जुलाई तक, 798 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से 615 की जान GHF स्थलों के पास गई है.

183 लोगों की मौत उन मार्गों पर हुई हैं, जहाँ से होकर मानवीय सहायता क़ाफ़िलें गुज़रते हैं. खाद्य सहायता पाने की कोशिशों में जुटे क़रीब अधिकाँश लोगों की मौत, बन्दूक की गोलियों के घावों से हुई है.

ग़ाज़ा में हाल के कुछ महीनों के दौरान, खाद्य सहायता वितरण के लिए इन्तेज़ार करने के दौरान, गोलीबारी व हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं.
© UNICEF/Eyad El Baba
ग़ाज़ा में हाल के कुछ महीनों के दौरान, खाद्य सहायता वितरण के लिए इन्तेज़ार करने के दौरान, गोलीबारी व हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

बयाँ न की जा सकने वाली पीड़ा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रवक्ता क्रिस्टियान लिन्डमायर ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पास इस व्यथा को बयाँ करने के लिए शब्द नहीं हैं.

“वितरण केन्द्रों पर लोगों को गोलियाँ लग रही हैं...बड़ी संख्या में महिलाएँ, बच्चे, पुरुष, लड़के-लड़कियाँ मारे जा रहे हैं जब वे या तो भोजन जुटा रहे हैं या फिर तथाकथित सुरक्षित आश्रय में हैं, या फिर स्वास्थ्य केन्द्र की ओर जाने वाली सड़क या फिर क्लीनिक के भीतर हैं. यह अस्वीकार्य होने से भी कहीं परे है.”

ग़ाज़ा में पिछले 130 दिनों से अधिक समय में बुधवार को पहली बार 75 हज़ार लीटर की ईंधन आपूर्ति की गई. WHO प्रवक्ता ने कहा कि यह अच्छा है कि इस मात्रा में ईंधन अन्तत: यहाँ पहुँचा है, लेकिन ईंधन, भोजन या अन्य राहत सामग्री का यहाँ पहुँचना कोई विशेष ख़बर नहीं होनी चाहिए.

उनके अनुसार, सहायता आपूर्ति को पहुँचाने के लिए मार्ग खुले रखे जाने होंगें, ताकि ऐम्बुलेंस, अस्पताल, जल शोधन संयंत्र, बेकरी में कामकाज जारी रह सके.

क्रिस्टियान लिन्डमायर ने बताया कि ग़ाज़ा में 94 प्रतिशत अस्पताल या तो ध्वस्त हो चुके हैं या फिर क्षतिग्रस्त हैं, जबकि लोगों का विस्थापित होना जारी है और आम फ़लस्तीनियों के रहने के लिए स्थान सिकुड़ते जा रहे हैं.