सुरक्षा परिषद: यमन को क्षेत्रीय अस्थिरता के गर्त में धँसने से बचाने का आग्रह
संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने आगाह किया है कि भूख, आर्थिक बदहाली और अस्थिरता से जूझ रहा यमन, अब भी एक गम्भीर मानवीय संकट की चपेट में है. यमन के लिए विशेष दूत हैंस ग्रैंडबुर्ग ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि देश में हालात और बिगड़ने से बचाने के लिए यह ज़रूरी है कि उसे क्षेत्रीय संकटों में उलझने से बचाया जाए.
विशेष दूत ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यमन ने पिछले एक दशक से हूथी लड़ाकों और सरकारी सुरक्षा बलों के बीच हिंसक टकराव को झेला है.
हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि लाखों ज़िन्दगियों और आजीविकाओं पर जोखिम है, मगर इसके बावजूद इस टकराव में कमी आने के कोई संकेत नहीं हैं.
उन्होंने सचेत किया कि हिंसा अब भी एक तात्कालिक ख़तरा है, और अर्थव्यवस्था भी इस टकराव के दंश को भुगत रही है. राष्ट्रीय मुद्रा में गिरावट दर्ज की गई है, क्रय शक्ति में तेज़ी से कमी आ रही है और निर्धनता फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है
“लोगों की जेब में जितना थोड़ा बहुत धन है, उसका मूल्य या तो घट रहा है या फिर ख़त्म होता जा रहा है.”
यमन में फ़िलहाल 1.7 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार है. मानवीय सहायता के अभाव में यह आँकड़ा इस वर्ष सितम्बर महीने तक 1.8 करोड़ तक पहुँच सकता है.
पाँच वर्ष से कम आयु के 10 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं, और उनके जीवन पर जोखिम मंडरा रहा है.
आपात राहत मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने बताया कि 2022 की शुरुआत में, यूएन की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम के बाद से अब तक इतने गम्भीर हालात नहीं देखे गए हैं.
क्षेत्रीय अस्थिरता का संकट
विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने सचेत किया कि मध्य पूर्व क्षेत्र में व्याप्त अस्थिरता की वजह से यमन पर गहरा असर हुआ है.
हाल के दिनों में अंसार अल्लाह गुट (हूथी लड़ाकों) ने लाल सागर में जहाज़ों पर हमले किए हैं, जिसके जवाब में इसराइल ने यमन में बन्दरगाहों और बिजली स्टेशन समेत अन्य बुनियादी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है.
“यमन को क्षेत्रीय संकट में और अधिक गहराई तक नहीं धँसने देना होगा, जिससे देश में पहले से ही नाज़ुक परिस्थितियाँ और कमज़ोर होती हों. यमन के लिए बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है.”
विशेष दूत के अनुसार, ईरान और इसराइल के बीच युद्धविराम होने से यह उम्मीद जगी है कि यमन के लिए वार्ता प्रयास भी फिर शुरू हो सकते हैं. इसके लिए, उन्होंने व्यावहारिक क़दम उठाने पर बल दिया है ताकि उथलपुथल से बचकर स्थाई समाधान की ज़मीन तैयार की जा सके.
शान्ति वार्ता पर बल
हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि शान्ति स्थापना के लिए यदि बातचीत को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो देश में मानवीय संकट और अधिक गहरा होगा. “एक सैन्य समाधान, एक ख़तरनाक समाधान है, जिससे यमन की पीड़ा गहरी होने का जोखिम है.”
उन्होंने ताइज़ गवर्नरेट का उल्लेख किया, जहाँ दोनों पक्षों ने साझा रूप से जल आपूर्ति व्यवस्था की देखरेख का ज़िम्मा लेने पर सहमति व्यक्त की है. इसके ज़रिए, छह लाख से अधिक लोगों तक सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति की जा सकेगी.
विशेष दूत ने कहा कि वार्ता प्रक्रिया आसान नहीं है, लेकिन इस हिंसक टकराव की जटिलताओं को दूर करने की यही सर्वोत्तम आशा है.
अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की अपील
हैंस ग्रैंडबुर्ग ने सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों से आग्रह किया कि यमन को प्राथमिकता दी जानी अहम है.
उन्होंने बन्धक बना कर रखे गए यूएन कर्मचारियों समेत सभी मानवीय सहायताकर्मियों की रिहाई की अपील दोहराई और कहा कि सहायता संगठनों को ज़मीनी प्रयास जारी रखे जाने के लिए मदद मुहैया कराई जानी होगी.
विशेष दूत ने कहा कि यमन का भविष्य, इसे पीड़ा से बचाने के लिए हमारे सामूहिक संकल्प पर निर्भर है, ताकि स्थानीय लोगों को आशा व गरिमा दी जा सके, जिसके वे हक़दार हैं.