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अफ़ग़ानिस्तान लौटने वाली महिलाओं व बच्चों को सीमा पर ही मदद की पुकार

अफ़ग़ानिस्तान को वापिस लौटने वाले लोगों में, बहुत से लोग विकलांग, महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग भी हैं.
Mehrab Afridi
अफ़ग़ानिस्तान को वापिस लौटने वाले लोगों में, बहुत से लोग विकलांग, महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग भी हैं.

अफ़ग़ानिस्तान लौटने वाली महिलाओं व बच्चों को सीमा पर ही मदद की पुकार

प्रवासी और शरणार्थी

विश्व स्वास्थ्य संगठन – WHO ने ईरान और पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौटने वाले लोगों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य ज़रूरतों के बारे में गहरी चिन्ता व्यक्त की है और उन्हें सीमा पर ही मदद मुहैया कराए जाने का आहवान किया है.

ग़ौरतलब है कि हाल के सप्ताहों में भारी संख्या में अफ़ग़ान लोग पाकिस्तान और ईरान से स्वदेश वापिस लौट रहे हैं और इस स्थिति के कारण देश की बुनियादी सेवाओं पर बहुत तेज़ी से अतिरिक्त बोझ पड़ गया है, जिसके लिए देश तैयार नहीं है.

अप्रैल (2025) से, क़रीब 8 लाख 36 हज़ार लोग आधिकारिक सीमा चौकियों के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौटे हैं, जो इस्लाम क़ला, तोरख़म, मिलक और अन्य स्थानों पर बनाई गई हैं. इतनी बड़ी संख्या में और बहुत तेज़ी से लोगों की वापसी, अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक गम्भीर मानवीय चुनौती बन गई है.

वापिस लौटने वालों में गर्भवती महिलाएँ, शिशुओं के साथ माताएँ और अपने परिवार व माता-पिता से बिछड़े बच्चे भी हैं, जो बहुत कम सामान के साथ सीमा पर पहुँच रहे हैं. इन सभी को चिकित्सा देखभाल, भोजन और आश्रय की सख़्त ज़रूरत है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी (WHO) ने कहा है कि उसके चिकित्सा दल, लोगों में घावों, संक्रमणों, शरीर में तरल पदार्थों की कमी और बढ़ते कुपोषण के हालात देख रहे हैं, विशेष रूप से बच्चों और बुज़ुर्गों में.

संगठन की मदद से, सीमा चौकियों व पंजीकरण केन्द्रों पर 84 हज़ार से अधिक लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराई गई हैं.

WHO ने बताया है कि उसने अपने साझीदारों के साथ मिलकर, जीवनरक्षक वैक्सीन की लगभग एक लाख 98 हज़ार ख़ुराकें पुलाई हैं व टीके लगाए हैं, जिनमें पोलियो और चेचक से बचाने वाली वैक्सीन शामिल हैं.

कठिनाइयों व ज़रूरतों का विशाल दायरा

अफ़ग़ानिस्तान में WHO के प्रतिनिधि डॉक्टर ऐडविन सेनिज़ा सलवाडोर ने कहा कि चिकित्सा टीमों को, भारी संख्या में माताओं, बच्चों और उम्रदराज़ लोगों की, अनिश्चित हालात में वापसी पर अनेक तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें से अधिकतर अस्वस्थ होते हैं.

उन्होंने कहा, “हम यथासम्भव अधिक से अधिक चिकित्सा मदद करने के प्रयास कर रहे हैं, मगर ज़रूरतों का स्तर व दायरा बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है. अगर तत्काल सहायता नहीं मिली तो हम, ज़रूरतमन्द लोगों की मदद करने की क्षमता खो बैठेंगे.”

डॉक्टर ऐडविन सेनिज़ा सलवाडोर ने कहा कि WHO ने अभी तक, वापिस लौटने वाले लोगों की अधिक संख्या वाले स्थानों पर, 17 सचल स्वास्थ्य टीमें तैनात की हैं. अभी तक 3 लाख 94 हज़ार से अधिक लोगों की, बीमारियों के लक्षणों के लिए जाँच-पड़ताल की जा चुकी है.

उन्होंने बताया कि इन लोगों को बुनियादी देखभाल, सुरक्षित सामान, जच्चा-बच्चा को सहायता, मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक समर्थन सेवाओं, स्वच्छ पानी तक पहुँच व ज़रूरी दवाओं की ज़रूरत है.

WHO ने वापिस लौट रहे लोगों की मदद के लिए 20 लाख डॉलर की रक़म की एक योजना तैयार की है जिसे 3 महीने के दौरान लागू किया जाएगा, मगर डॉक्टर ऐडविन का कहना है कि अगर इस योजना के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं हुआ तो, टीकाकरण, आपात देखभाल और जच्चा-बच्चा देखभाल जैसी सेवाओं में कटौती करनी ज़रूरी हो जाएगी.

गिरफ़्तारी वारंट

उधर एक अन्य घटनाक्रम में, अतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने, अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति के सन्दर्भ में, तालेबान के सर्वोच्च नेता हईबतुल्लाह अख़ुन्दज़ादा, और तालेबान के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हकीम हक़्क़ानी के गिरफ़्तारी वारंट जारी किए हैं.

न्यायालय के चैम्बर-2 ने ये गिरफ़्तारी वारंट जारी करते हुए कहा है कि ऐसा माने जाने के पर्याप्त आधार हैं कि हईबतुल्लाह अख़ुन्दज़ादा और अब्दुल हकीम हक़्क़ानी ने, रोम संविदा के अनुच्छेद 7(1)(h) के तहत, मानवता के विरुद्ध अपराधों को अंजाम दिया है.

न्यायालय के अनुसार, इन अपराधों को, लड़कियों महिलाओं और तालेबान की नीतियों से सहमति नहीं रखने वाले लोगों के विरुद्ध, 15 अगस्त 2021 से 20 जनवरी 2025 के दरम्यान अंजाम दिया गया है.

ग़ौरतलब है कि तालेबान ने 15 अगस्त 2021 को, तत्कालीन अफ़ग़ान सरकार को हटाकर, देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया था.