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दक्षिण सूडान: विनाशकारी भूख से पीड़ित परिवारों तक, हवाई मार्ग से पहुँचाई गई मदद

दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में अनाज के पैकेट गिराए जा रहे हैं.
© WFP/Samantha Reinders
दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में अनाज के पैकेट गिराए जा रहे हैं.

दक्षिण सूडान: विनाशकारी भूख से पीड़ित परिवारों तक, हवाई मार्ग से पहुँचाई गई मदद

मानवीय सहायता

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने दक्षिण सूडान में हिंसक टकराव के बीच गम्भीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हज़ारों परिवारों के लिए हवाई मार्ग से आपात भोजन पैकेट पहुँचाए है. 

दक्षिण सूडान के ‘अपर नाईल’ प्रान्त में इस वर्ष मार्च से ही हिंसक टकराव धधक रहा है, जिससे हज़ारों परिवार अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं और अनेक समुदाय अकाल का सामना कर रहे हैं.

दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है.वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध भड़क उठा था.

कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद, 2018 में नाज़ुक हाला​त में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई.

मगर कुछ महीने पहले, मुख्य विपक्षी नेता और प्रथम उप राष्ट्रपति रिएक मचार समेत अन्य नेताओं को नज़रबन्द किए जाने की ख़बरें थी. सूडान में हिंसा के कारण देश में वापसी करने वाले लोगों के लिए हालात ख़राब हुए हैं.

दक्षिण सूडान के सैन्य बलों ने मार्च 2025 के बाद से विरोधी हथियारबन्द गुटों पर अपनी कार्रवाई तेज़ की है, रिहायशी इलाक़ों पर हवाई हमलों की रिपोर्टें हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर आम लोग हताहत हुए हैं और सामूहिक विस्थापन हुआ है.

दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में ज़रूरतमन्द परिवार विमान से गिराए गए अनाज के पैकेट जुटा रहे हैं.
© WFP/Samantha Reinders

यह पहली बार है जब यूएन एजेंसी ने पिछले चार महीनों में विनाशकारी भूख से पीड़ित 40 हज़ार लोगों तक खाद्य पैकेट पहुँचाए हैं. बताया गया है कि इस इलाक़े में केवल हवाई मार्ग से ही पहुँचा जा सकता है.

दक्षिण सूडान में WFP की देशीय निदेशक मैरी-ऐलेन मैकग्रोअर्टी ने कहा कि दक्षिण सूडान में हिंसक टकराव और भूख के बीच सम्बन्ध, त्रासदीपूर्ण ढंग से स्पष्ट हो रहा है. अपर नाईल प्रान्त में पिछले कुछ महीनों में यह देखा गया है.

उन्होंने कहा कि यदि प्रभावित इलाक़ों में सहायता का स्तर नहीं बढ़ाया गया तो फिर पूरी तरह से अकाल के पाँव पसारने का जोखिम है. इसकी रोकथाम के लिए यह ज़रूरी है कि इन परिवारों तक भोजन पहुँचाया जाए, और इसलिए ज़रूरतमन्दों तक राहत पहुँचाने के लिए हरसम्भव प्रयास किए जा रहे हैं.

सहायता का स्तर बढ़ाने की अपील

एक अनुमान के अनुसार, अपर नाईल प्रान्त में 10 लाख से अधिक लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिनमें से क़रीब 32 हज़ार लोग विनाशकारी स्तर पर (अकाल) भूख से जूझ रहे हैं.

मार्च में हिंसक टकराव भड़कने के बाद प्रभावित लोगों की संख्या में तीन गुना वृद्धि हो चुकी है, जिससे सामूहिक विस्थापन भी हुआ है.

बड़ी संख्या में लोगों ने सीमा पार करके इथियोपिया में शरण ली है, जहाँ भोजन व शरण की तलाश में पहुँचे 50 हज़ार लोगों को जीवनरक्षक खाद्य सहायता प्रदान की गई है.

यूएन खाद्य एजेंसी का लक्ष्य अपर नाईल और उत्तरी जोंगलेई प्रान्तों में 4.70 लाख लोगों तक एक ऐसे मौसम में सहायता पहुँचाना है, जोकि खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से सम्वेदनशील समझा जाता है. 

अगस्त महीने तक जारी रहने वाले इस मौसम में लड़ाई और सहायता मार्ग में चुनौतियों के कारण राहत पहुँचाना मुश्किल हुआ है. इस वजह से, इन प्रान्तों में नदी मार्गों को फिर से खोले जाने की अपील की गई है ताकि भूखे परिवारों तक सतत ढंग से मानवीय राहत पहुँचाई जा सके.