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उत्तर प्रदेश के झांसी में सक्षम प्रेरणा महिला लघु उद्योग की टेक-होम राशन इकाई के सदस्य उत्पादन कार्य से कुछ देर के लिए विराम ले रहे हैं। यह सूक्ष्म उद्यम एक पौष्टिक मिश्रण का उत्पादन और पैकेजिंग करता है, जिसे एकीकृत बाल विकास योजना के तहत माताओं और शिशुओं को प्रदान किया जाता है।

उत्तर प्रदेश: पोषण, आय व सम्मान दिलाने वाली 'टेक होम राशन' पहल

©️WFP India/Parvinder Singh उत्तर प्रदेश के झाँसी स्थित सक्षम प्रेरणा महिला लघु उद्योग की टेक-होम राशन इकाई की महिलाएँ. यह इकाई, एकीकृत बाल विकास योजना के तहत माताओं व शिशुओं के लिए पोषण मिश्रण तैयार करती है.

उत्तर प्रदेश: पोषण, आय व सम्मान दिलाने वाली 'टेक होम राशन' पहल

एसडीजी

भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक, उत्तर प्रदेश में कुपोषण दूर करने के लिए एक सशक्त सामुदायिक मॉडल तैयार किया गया है जो अब वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल कर रहा है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की तकनीकी साझेदारी के साथ शुरू हुई 'टेक होम राशन' (THR) पहल, न केवल महिलाओं को आजीविका दे रही है, बल्कि लाखों परिवारों के स्वास्थ्य को पोषण भी मुहैया करा रही है.

हाल ही में रोम में आयोजित WFP की कार्यकारी बोर्ड बैठक में इस मॉडल को अन्तरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया - जहाँ एक स्थानीय नवाचार से प्रेरित, विस्तार योग्य, असरदार समाधान के रूप में इसकी सराहना की गई.

साल 2020 में केवल दो पायलट इकाइयों के साथ शुरू हुई यह योजना, इस समय 43 ज़िलों में फैले 200 से अधिक महिला-प्रमुख लघु उद्यमों तक पहुँच चुकी है. 

इसने अब तक साढ़े 7 करोड़ से अधिक पौष्टिक भोजन पैकेट वितरित किए हैं और 70 लाख से अधिक माताओं व बच्चों तक पहुँच बनाई है. यह पूरी योजना भारत सरकार की एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) के तहत संचालित की जाती है.

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने हाल ही में विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) मुख्यालय, रोम में इस मॉडल को प्रस्तुत करते हुए कहा, “यह केवल भोजन के बारे में नहीं है. यह सम्मान, आय और समुदाय को सशक्त करने के बारे में है. हर इकाई सिर्फ़ भोजन नहीं बना रही, बल्कि अपना भविष्य गढ़ रही है.”

भारत में WFP के लाभार्थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, टेक होम राशन योजना के लिए एक सामुदायिक केंद्र में एकत्रित हुए हैं।
©️WFP India/Parvinder Singh

महिलाओं के नेतृत्व में पोषण क्रान्ति

हर इकाई को 20 स्थानीय महिलाएँ चलाती हैं जिन्हें मशीनें, कच्चा माल और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है. ये महिलाएँ अब स्थाई मासिक आय अर्जित कर रही हैं, और बच्चों की शिक्षा व सम्पत्ति निर्माण में निवेश करने में सक्षम हो रही हैं.

इन इकाइयों में बनाए जाने वाले पोषक तत्वों से भरपूर भोजन में बेसन हलवा, मूंग दाल खिचड़ी, और ऊर्जा बढ़ाने वाले लड्डू शामिल हैं - जिन्हें FSSAI के दिशा-निर्देशों के अनुसार बनाया जाता है. 

क्यूआर कोड वाले पैकेट, सोलर ऊर्जा पर आधारित उत्पादन, और स्वच्छता व गुणवत्ता परीक्षण से यह मॉडल पूर्ण रूप से सुरक्षित और पारदर्शी बन चुका है.

वैश्विक सराहना

2021 में उन्नाव और फ़तेहपुर में मिली शुरुआती सफलता के बाद, इस योजना ने अब तक 2.11 लाख टन से अधिक भोजन का उत्पादन किया है जिसका मूल्य लगभग 17 करोड़ डॉलर है. 

प्रदेश सरकार की योजना इसे 2027 तक सभी ज़िलों में विस्तारित करने की है.

विश्व खाद्य एवं परिवार WFP) की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैककेन ने कार्यालय में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह से मुलाकात की।
© WFP/Rein Skullerud

WFP की भारत प्रमुख, एलिज़ाबेथ फॉरे ने कहा, “यह मॉडल स्थानीय खाद्य प्रणाली, महिला सशक्तिकरण, और आर्थिक समावेशन का आदर्श संयोजन है. यह दुनिया के लिए एक प्रभावी और दोहराने योग्य समाधान प्रस्तुत करता है.”

समुदाय की साझी सफलता

यह योजना केवल पोषण नहीं बल्कि स्थाई विकास और स्वावलम्बन की दिशा में एक जीवन्त उदाहरण बन चुकी है. 

इसमें, ऐप-आधारित निगरानी और व्यवहार परिवर्तन अभियानों के ज़रिए, अभूतपूर्व तरीक़े से प्रभावशीलता और जवाबदेही को जोड़ा गया है.

यह परियोजना, वैश्विक आपूर्ति श्रृँखलाओं के अस्थिर समय में दिखाती है कि स्थानीय संसाधनों, समुदाय की भागेदारी, और महिला नेतृत्व से कैसे भोजन व भविष्य दोनों सुरक्षित किए जा सकते हैं.