विकासशील देशों में, एसडीजी प्राप्ति के लिए $4 ट्रिलियन तक की कमी
संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) की एक नई रिपोर्ट में, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए धन की बढ़ती कमी को लेकर गम्भीर चेतावनी दी गई है. रिपोर्ट में 40 से रणनीतियाँ प्रस्तुत की गई हैं, जिनसे क्षेत्रीय देश, अपने वित्तीय संसाधनों को सशक्त बना सकते हैं व घरेलू वित्तीय प्रणालियों में आवश्यक सुधार कर सकते हैं.
ESCAP की विकास के लिए वित्त पर रिपोर्ट का छठा संस्करण, 30 जून को स्पेन के सेविया में आयोजित विकास के लिए वित्तपोषण पर चौथे अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन (FFD4) के दौरान जारी किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, विकासशील देशों को टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, वर्ष 2.5 से 4 ट्रिलियन डॉलर की भारी वित्तीय कमी का सामना करना पड़ रहा है.
एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में यह संकट विशेष रूप से गहरा हो गया है, जहाँ वैश्विक भू-राजनैतिक अस्थिरता और आर्थिक दबावों के कारण, देशों के भीतर चुनौतियाँ और भी जटिल होती जा रही हैं.
आशंका है कि इससे निर्धनता उन्मूलन, जलवायु कार्रवाई और आर्थिक पुनर्बहाली की दिशा में हुई प्रगति बाधित हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव और ESCAP की कार्यकारी सचिव आर्मिडा सलसियाह अलिसजाहबना ने कहा है, “इस चुनौती, और इसमें मौजूद अवसर की तत्कालिकता, एशिया और प्रशान्त से अधिक किसी अन्य स्थान पर नही है. यह हमारे पास एक ऐसा अवसर है जिसमें हम एक अधिक सहनसक्षम, न्यायसंगत व टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव रख सकते हैं.”
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- घरेलू राजस्व की कमी: अनेक सरकारें पर्याप्त संसाधन जुटाने में असमर्थ हैं. कर प्रणाली अकुशल बनी हुई है और सम्पत्ति व उच्च सम्पन्नता पर कर लगाने की सम्भावनाओं का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है.
- निजी क्षेत्र की सीमित भागेदारी: पूँजी बाज़ार अब भी अविकसित हैं और निजी क्षेत्रों से मिलने वाला धन, स्वच्छ ऊर्जा, सार्वजनिक स्वास्थ्य या किफ़ायती आवास जैसे उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों तक कम ही पहुँचता है.
- बढ़ता सार्वजनिक ऋण संकट: अनेक देश ऋण संकट से जूझ रहे हैं. रिपोर्ट में ज़िम्मेदार उधारी, सार्वजनिक वित्त की पारदर्शिता और ऋण समाधान में बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया है.
- सतत वित्त का विकास लक्ष्यों से मेल: जब देश ऐसे निवेशों की योजना बनाते हैं जो आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ देते हैं, तो वे दीर्घकालिक और समावेशी विकास के बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं.
एक सहनसक्षम अर्थव्यवस्था के लिए रोडमैप
रिपोर्ट में क्षेत्रीय वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे समाधान सुझाए गए हैं जो प्रौद्योगिकीय रूप से सटीक, वित्तीय दृष्टि से व्यवहार्य और नीतिगत रूप से लागू करने योग्य हों.
रिपोर्ट में विनियामक ढाँचे को मज़बूत करने, मानकों में सुधार और नवाचारी वित्तीय उपकरणों को बढ़ावा देने की सिफ़ारिश की गई है, ताकि अधिक देशों को सतत पूँजी तक प्रभावी पहुँच मिल सके.
ऐतिहासिक साझेदारी और क्षेत्रीय नेतृत्व
ESCAP ने पहली बार एशियाई विकास बैंक (ADB), जलवायु बाँड पहल, अन्तरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) और UNFCCC के क्षेत्रीय सहयोग केन्द्र जैसे संगठनों के साथ मिलकर यह रिपोर्ट प्रकाशित की है.
इसका उद्देश्य सतत पूँजी बाज़ारों को मज़बूत करना, ऊर्जा बदलाव के लिए वित्त प्रदान करना और एसडीजी के लिए परियोजना पाइपलाइन विकसित करना है.
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट रूप से आगाह किया गया है कि यदि समय रहते उचित क़दम नहीं उठाए गए, तो एशिया-प्रशान्त क्षेत्र, वैश्विक विकास की दौड़ में पिछड़ सकता है.
लेकिन यदि यह क्षेत्र साहसिक नेतृत्व दिखाता है, तो पूरे विश्व के लिए सतत विकास का मार्गदर्शक भी बन सकता है.