FFD4: "ठोस, व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य" रोडमैप की आशा
स्पेन के सम्राट फ़ेलिपे ने कहा है कि सेविया में आयोजित हो रहा, विकास के लिए वित्त पर चौथा अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन, “सफल होना ही चाहिए,” क्योंकि सहयोग, बहुपक्षीय व्यवस्था की नींव है - और आज, जब विश्व अनिश्चितताओं से घिरा है, तो यह सम्मेलन उन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है जो हमें जोड़कर रखते हैं. सम्राट ने इस सम्मेलन (FFD4) से एक "ठोस, व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य" रोडमैप सामने आने की आशा भी व्यक्त की है.
‘यही समय है’
स्पेन के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति पैड्रो सांचेज़ ने प्रतिनिधियों से कहा, “समय यही है और स्थान भी यही.” सेविया में लिए गए फ़ैसले, लाखों ज़िन्दगियों का भविष्य तय करेंगे. हमें “निष्क्रियता नहीं, महत्वाकांक्षा; उदासीनता नहीं, एकजुटता; और सुविधा नहीं, साहस” को चुनना होगा.
उन्होंने याद दिलाया कि सेविया कभी "16वीं सदी का न्यूयॉर्क" था - वैश्विक सम्पर्क व कूटनीति की धुरी - और आज, हम सभी की ज़िम्मेदारी है कि हम इस ऐतिहासिक विरासत के साथ न्याय करें.
‘सेविया कोई अन्त नहीं, एक नई शुरुआत है’
FFD4 सम्मेलन के महासचिव और संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (DESA) के प्रमुख ली जुनहुआ ने कहा कि सेविया में यह सप्ताह एक निर्णायक क्षण है - जहाँ से हम एक न्यायसंगत, समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक संसाधनों को जुटाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
उन्होंने कहा कि विकास के लिए वित्तपोषण की संयुक्त राष्ट्र की पहलें हमेशा बहुपक्षवाद और वैश्विक एकजुटता पर आधारित रही हैं, लेकिन आज यह सम्पूर्ण तंत्र, गम्भीर दबाव और अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है.
उन्होंने कहा, "सतत विकास कभी इतनी कठिन परीक्षा से नहीं गुज़रा,"लेकिन, सेविया में किया गया यह समझौता मानव केन्द्रित दृष्टिकोण को दोबारा प्राथमिकता में लाने में मदद करेगा.
“सेविया कोई अन्तिम पड़ाव नहीं, बल्कि यह क्रियान्वयन, जवाबदेही और साझा ज़िम्मेदारी के एक नए युग की शुरुआत है.”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UNDESA सभी देशों के साथ मिलकर इस प्रतिबद्धता को ठोस अन्तरराष्ट्रीय कार्रवाई में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है.
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग ने प्रतिनिधियों से कहा कि आज सबसे अधिक आवश्यकता ऐसे नेतृत्व की है जो दुनिया को सभी के लिए एक उज्जवल और समृद्ध भविष्य की ओर ले जा सके. सेविया रूपरेखा (Sevilla Framework) आगामी दशक के लिए वैश्विक साझेदारी को नया जीवन देगी और विकासशील देशों पर भारी पड़ रहे ऋण संकट पर ध्यान केन्द्रित करेगी.
देशों के बीच विश्वास बहाली की ज़रूरत
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के अध्यक्ष बॉब रे ने ज़ोर देते हुए कहा कि देशों के बीच विश्वास बहाल करना अनिवार्य है, क्योंकि इसकी अनुपस्थिति में ही “अराजकता जन्म लेती है.”
उन्होंने कहा, "मैं उन देशों को बधाई देता हूँ जो इस सम्मेलन में महत्वाकांक्षा के साथ आगे आए और वित्तीय संस्थानों के साथ संवाद को मज़बूत किया." यह सप्ताह वास्तविक कार्रवाई के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बांगा ने कहा कि निर्धनता उन्मूलन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या के साथ विकासशील देशों को अभूतपूर्व पैमाने और गति से संसाधनों की आवश्यकता होगी.
उन्होंने स्वीकार किया कि सरकारें, परोपकारी संस्थाएँ और अन्तरराष्ट्रीय संस्थान, सभी लक्ष्यों को केवल अपने दम पर हासिल नहीं कर सकते - इसीलिए सेविया समझौते में निजी क्षेत्र की भागेदारी अत्यन्त आवश्यक है, ताकि पूंजी प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके.
उन्होंने बताया कि विश्व बैंक में हाल के वर्षों में किए गए सुधारों का उद्देश्य है - सरकारों और निजी क्षेत्र दोनों के लिए एक बेहतर, उत्तरदाई और समर्थ साझीदार बनना.
त्वरित निर्णय, पूँजी वृद्धि और टिकाऊ विकास प्रणालियों को मज़बूती देना ज़रूरी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगली पीढ़ी की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए इससे कहीं अधिक ठोस प्रयासों की आवश्यकता है.
अल्पतम विकसित देशों को दंडात्मक टैरिफ़ से छूट मिले, WTO
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की महानिदेशक न्गोज़ी ओकोंजो-इवीला ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है, जब दुनिया गम्भीर और अभूतपूर्व आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है.
दशकों तक वैश्विक व्यापार प्रणाली ने, विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन आज वह गम्भीर अवरोधों और अस्थिरताओं का सामना कर रही है.
एकतरफ़ा टैरिफ़ उपायों और नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे WTO को वैश्विक व्यापार वृद्धि के अपने पूर्वानुमानों में भारी कटौती करनी पड़ी है.
उन्होंने आगाह किया कि 9 जुलाई, अमेरिका द्वारा निर्धारित नई टैरिफ़ सीमा की अन्तिम तिथि है - यदि उस दिन नए शुल्क लगाए गए, तो उससे वैश्विक व्यापार में और अधिक गिरावट आ सकती है.
ओकोंजो-इवेला ने दोहराया कि WTO का स्पष्ट मत रहा है कि अल्पतम विकसित देशों और अफ़्रीकी देशों को दंडात्मक टैरिफ़ से छूट दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें वैश्विक व्यापार प्रणाली में बेहतर ढंग से एकीकृत किया जा सके, न कि और ज़्यादा हाशिए पर डाला जाए.
उन्होंने कहा कि सेविया समझौता इस दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी क़दम है, क्योंकि यह अन्तरराष्ट्रीय व्यापार को विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में मान्यता देता है.
अन्त में उन्होंने प्रतिनिधियों से अपील की कि “वैश्विक व्यापार में स्थिरता और पूर्वानुमान क्षमता को मज़बूत करना अनिवार्य है,” ताकि निर्यात के माध्यम से राष्ट्रीय संसाधनों को सुदृढ़ किया जा सके.
IMF द्वारा कर आधार बढ़ाने की अपील
अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के उप प्रबन्ध निदेशक, नाइजेल क्लार्क ने देशों से आहवान किया कि वे कर आधार (tax base) को व्यापक बनाएँ, मज़बूत वित्तीय प्रबन्धन प्रणालियाँ विकसित करें, समन्वित वैश्विक सहयोग सुनिश्चित करें, और ऋण संकट के लिए दीर्घकालिक व टिकाऊ समाधान खोजें.
उन्होंने कहा, “कई देश अब भी ऊँची ब्याज दरों की भारी लागत से जूझ रहे हैं,” और इस स्थिति से उबरने के लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को ऋण पुनर्गठन प्रक्रियाओं में सुधार लाना होगा.
नाइजेल क्लार्क ने बताया कि IMF अपने क्षमता विकास कार्यक्रमों के ज़रिए सदस्य देशों को आत्मनिर्भर आर्थिक रणनीतियाँ तैयार करने में मदद कर रहा है, और संकट के समय उन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रहा है.