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ग़ाज़ा: फ़लस्तीनी आबादी के लिए 'असहनीय पीड़ा, बर्बरता, सामूहिक दंड' की निन्दा

अग्रभूमि में खड़े दो बच्चे गाजा के एक शहर के क्षितिज पर उठते धुएं के विशाल गुबार को देख रहे हैं।
25-06-2025-UNICEF-Gaza-07.jpg/ ग़ाज़ा सिटी में दो बच्चे एक हवाई हमले के बाद उठते हुए धुँए को देख रहे हैं.

ग़ाज़ा: फ़लस्तीनी आबादी के लिए 'असहनीय पीड़ा, बर्बरता, सामूहिक दंड' की निन्दा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सुरक्षा परिषद को आगाह किया है कि ग़ाज़ावासी अब भी गहरे मानवीय संकट से जूझ रहे हैं, भोजन पाने की तलाश में लोग अपनी जान गँवा रहे हैं, और इसराइली सैन्य कार्रवाई से फ़लस्तीनी आबादी व बुनियादी ढाँचे को गहरी क्षति पहुँचना भी जारी है.

मध्य पूर्व के लिए सहायक महासचिव ख़ालेद ख़िएरी ने सोमवार को सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को कहा कि मध्य जून से अब तक, 1,000 से अधिक फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है. इनमें से अनेक लोगों की मौत सहायता पाने की कोशिश में हुई है.

उन्होंने ग़ाज़ा में स्वास्थ्य प्रशासन के हवाले से बताया कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक, 56,500 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.

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“ग़ाज़ा में पीड़ा और बर्बरता का स्तर असहनीय है. फ़लस्तीनी लोगों को सामूहिक तौर पर दंडित किया जाना जारी है, जिसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.”

सहायक महासचिव ने अनेक उदाहरणों का उल्लेख किया, जिनमें इसराइली सैन्य बलों ने खाद्य वितरण केन्द्रों के पास गोलियाँ चलाई.

17 जून को ख़ान युनिस में एक इसराइली टैंक ने विश्व खाद्य खाद्य कार्यक्रम (WFP) के सहायता ट्रकों की  प्रतीक्षा कर रहे लोगों पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 50 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए.

इसके एक सप्ताह बाद, ग़ाज़ा में मानवतावादी फ़ाउंडेशन के पास गोलीबारी की एक अन्य घटना में 49 फ़लस्तीनी मारे गए और 197 घायल हो गए.

ख़ालेद ख़िएरी ने इन घटनाओं की कठोर निन्दा करते हुए तत्काल, स्वतंत्र जाँच कराए जाने और दोषियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग की है.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ऐसी किसी भी सहायता व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनेगा, जोकि मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता और स्वतंत्रता के बुनियादी मानवतावादी सिद्धान्तों पर आधारित न हो.

आतंकी हमलों की निन्दा

यूएन सहायक महासचिव ने हमास और अन्य फ़लस्तीनी हथियारबन्द गुटों द्वारा इसराइल में किए गए हमलों की निन्दा की, जिनमें 1,200 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक को बन्धक बना लिया गया था. इनमें से क़रीब 50 बन्धकों को अब भी हिरासत में रखा गया है.

उन्होंने कहा कि इन आतंकी कृत्यों को किसी भी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता है. “हम क्षुब्ध हैं कि बन्धकों के साथ बुरा बर्ताव जारी रहने की आशंका है और बन्धकों के शवों को अब भी वापिस नहीं किया जा रहा है.”

सहायक महासचिव ने ग़ाज़ा में महिलाओं व बच्चों समेत बड़ी संख्या में आम लोगों के मारे जाने, और स्कूलों, घरों, अस्पतालों व मस्जिदों के क्षतिग्रस्त होने की भी निन्दा की है.

उधर, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में, इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा किए जाने वाले हमलों में वृद्धि हुई है.

युद्धविराम से जगी आशा

ख़ालेद ख़िएरी ने कहा कि क़ाबिज़ फ़लस्तीनी तट पर बढ़ती हिंसा चिन्ताजनक है. सैन्य कार्रवाई और बस्तियों के विस्तार से आम लोगों की जान जा रही है, वे विस्थापित व विध्वंस का शिकार हो रहे हैं.

सहायक महासचिव ने बताया कि इसराइल और ईरान के बीच भड़के हिंसक टकराव के बाद लागू हुए युद्धविराम को मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकेगा.

ख़ालेद ख़िएरी के अनुसार, मध्य पूर्व क्षेत्र हिंसक टकराव से तबाह हो चुका है और यह एक और टकराव नहीं झेल सकता है. फ़िलहाल युद्धविराम की सबसे अधिक आवश्यकता ग़ाज़ा में है.

ग़ौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच 24 मई को युद्धविराम की घोषणा की थी.