FFD4: भविष्य में निवेश करने व दिशा बदलने का यही समय, यूएन प्रमुख की पुकार
"हम सेविया में एक नई दिशा तय करने के लिए एकत्र हुए हैं." संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को विश्व नेताओं को सम्बोधित करते हुए यह पुकार लगाई है. उन्होंने इसे “दस वर्षों में एक बार मिलने वाला ऐतिहासिक अवसर” क़रार दिया, जो विकासशील देशों के सामने दरपेश 4 ट्रिलियन डॉलर की विशालकाय वित्तीय चुनौती को दूर करके, उन्हें सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) प्राप्ति की ओर अग्रसर करने तथा सर्वजन के लिए एक समावेशी, न्यायसंगत और टिकाऊ भविष्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है.
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित सतत विकास इस समय “भीषण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों’ का सामना कर रहा है.
यूएन महासचिव ने, स्पेन के सेविया शहर में चिलचिलाती गर्मी के बीच हो रहे 'विकास के लिए वित्तपोषण' पर चौथे सम्मेलन (FFD4) के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि बहुपक्षवाद गहरे संकट में है, और देशों व संस्थानों के बीच विश्वास की डोर दिन-ब-दिन कमज़ोर होती जा रही है.
सम्मेलन में 50 से अधिक विश्व नेता, 150 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधि और लगभग 15 हज़ार अन्य प्रतिभागी शामिल हुए हैं.
महासचिव ने कहा, “दुनिया आग का सामना कर रही है - असमानताओं, जलवायु संकट और भीषण संघर्षों से थर्राई हुई है. वित्तपोषण ही विकास का इंजन है, और फ़िलहाल यह इंजन बुरी तरह लड़खड़ा रहा है.”
“हम यह बैठक ऐसे समय में कर रहे हैं, जब एक बेहतर और अधिक न्यायसंगत भविष्य के निर्माण की हमारी वैश्विक प्रतिज्ञा - 2030 का सतत विकास एजेंडा - गहरे संकट में है.”
2015 में जिन महत्वाकांक्षी सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर सहमति हुई थी, उनमें से लगभग दो-तिहाई लक्ष्य, गम्भीर रूप से पिछड़ चुके हैं - और उन्हें फिर से पटरी पर लाने के लिए अभूतपूर्व 4 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता पड़ेगी.
महासचिव ने कहा, “हम सेविया में एक नई दिशा तय करने के लिए एकत्र हुए हैं - ताकि विकास के ठप पड़े इंजन को फिर से गति दी जा सके, और निवेश उस पैमाने व गति से हो, जिसकी आज के दौर में सख़्त ज़रूरत है.”
उन्होंने सोमवार को अपनाई गई ‘सेविया प्रतिबद्धता’ को एक “वैश्विक वादा” क़रार दिया, जिसका उद्देश्य निम्न-आय वाले देशों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है. हालाँकि, संयुक्त राज्य अमेरिका इस प्रक्रिया से इसी महीने की शुरुआत में अलग हो गया था और इस प्रतिबद्धता का हिस्सा नहीं था.
तीन प्रमुख कार्य क्षेत्रों पर बल:
- पहला, घरेलू स्तर पर संसाधनों के प्रवाह को तेज़ करना, ताकि सतत विकास को वास्तविक गति मिल सके; साथ ही, समृद्ध देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने वादे के अनुसार विकासशील देशों को दी जाने वाली सहायता को दोगुना करें. इसमें बहुपक्षीय विकास बैंकों की ऋण क्षमता को तीन गुना बढ़ाना और निजी पूंजी को सक्रिय करने के लिए नवाचारी समाधान शामिल हैं.
- दूसरा, वर्तमान की "अस्थिर, अन्यायपूर्ण और असहनीय" वैश्विक ऋण प्रणाली में सुधार करना. फ़िलहाल, ग़रीब देश हर वर्ष लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर की रक़म, केवल ब्याज़ चुकाने में ख़र्च कर रहे हैं, जिससे उनका विकास ठप पड़ जाता है. इस दिशा में, एक नया 'क़र्ज़दार मंच' (Borrowers’ Forum) स्थापित किया जाएगा, जो ऋण पुनर्गठन की प्रक्रियाओं को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा.
- तीसरा, वैश्विक वित्तीय संरचना में व्यापक सुधार करना, जिसमें प्रमुख शेयरधारकों की सक्रिय भागेदारी आवश्यक होगी, ताकि यह व्यवस्था हर देश को सशक्त और समावेशी रूप से लाभान्वित कर सके. महासचिव ने ज़ोर देते हुए कहा, “हमें एक ऐसी वैश्विक कर प्रणाली की आवश्यकता है जो अधिक न्यायसंगत हो - जिसे कुछ चुनिन्दा देशों द्वारा नहीं, बल्कि सभी देशों की समान भागेदारी से तैयार किया जाए.”
उन्होंने कहा कि वर्तमान में वहन क्षमता (affordability) और रुके हुए विकास का संकट वास्तव में एक "मानवता का संकट" है, जो न केवल आँकड़ों में, बल्कि हर भूखे परिवार, वैक्सीन से वंचित बच्चे, और शिक्षा से बाहर होती लड़कियों की ज़िन्दगियों में झलकता है.
महासचिव ने कहा, “यह सम्मेलन किसी दान या कृपा का मंच नहीं है - यह न्याय की पुनर्स्थापना का प्रयास है, ताकि हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार और अवसर मिल सके.”
यह सम्मेलन केवल धन के बारे में नहीं है - यह उस साझा भविष्य में निवेश का अवसर है, जिसका निर्माण हम सब मिलकर करना चाहते हैं.”