FFD4: वैश्विक विकास को ख़तरे में डालने वाले ऋण संकट से बाहर निकलने का रास्ता
सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को अपनाने के एक दशक बाद, विकास क्षेत्र को गम्भीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिसमें कम आय वाले देशों में क़र्ज़ व उस पर ब्याज़ के भुगतान का "मूक संकट" भी शामिल है. इस रिपोर्ट को, स्पेन के सेविया में सोमवार से शुरू हो रहे, विकास के लिए वित्त पर, चौथे अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन (FFD4) के सन्दर्भ में अहम माना जा रहा है.
यूएन उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने हाल ही में रिपोर्ट जारी की है, जिसका नाम है ‘ऋण संकट से निपटना: सतत वित्तपोषण को सक्रिय बनाने 11 कार्रवाइयाँ’.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के ऋण पर विशेषज्ञ समूह द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट, विकास के लिए वित्तपोषण पर स्पेन के सेविया में 30 जून से 3 जुलाई तक हो रहे विकास के लिए वित्त पर चौथे अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन (FFD4) के परिणाम दस्तावेज़, में पेश की गईं प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करती है.
अपना दायरा बढ़ाता एक संकट
आमिना मोहम्मद ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, "उधार लेना विकास के लिए महत्वपूर्ण है", मगर आज, "अनेक विकासशील देशों के लिए उधार लेना फ़ायदे का सौदा साबित नहीं हो रहा है. कम आय वाले दो-तिहाई से अधिक देश या तो ऋण संकट में हैं या इसके उच्च जोखिम में दबे हुए हैं."
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (UNCTAD) की अध्यक्ष रिबेका ग्रीनस्पैन ने चेतावनी दी कि यह संकट तेज़ी से अपना दायरा बढ़ा रहा है.
दुनिया भर में अब 3 अरब 40 करोड़ से अधिक लोग ऐसे देशों में रहते हैं जो स्वास्थ्य या शिक्षा क्षेत्रों में ख़र्च की जाने की वाली रक़म की तुलना में क़र्ज़ पर लगने वाले ब्याज़ भुगतान पर ज़्यादा धन ख़र्च करते हैं. यह रक़म पिछले वर्ष की तुलना में 10 करोड़ अधिक है.
विकासशील देशों द्वारा ऋण व ब्याज़ के भुगतान की राशि में, एक साल में 74 अरब डॉलर की बढ़ोत्तरी हुई है, जोकि 847 अरब डॉलर से बढ़कर 921 अरब डॉलर हो गई है.
भविष्य की राह
रिपोर्ट में 11 ऐसी कार्रवाइयों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है जो तकनीकी रूप से व्यवहार्य और राजनैतिक रूप से सम्भव दोनों हैं.
ये सिफ़ारिशें दो प्रमुख लक्ष्यों के अन्तर्गत आती हैं: सार्थक ऋण राहत प्रदान करना और भविष्य के संकटों को रोकना.
इसमें कार्रवाई के तीन स्तरों की पहचान की गई है:
बहुपक्षीय स्तर पर: कम आय वाले देशों के लिए लक्षित समर्थन के साथ, व्यवस्था में धन के प्रवाह को बढ़ाना.
अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर: क़र्ज़दारों और क़र्ज़ देने वालों के लिए सीधे जुड़ने के लिए एक मंच स्थापित करना.
राष्ट्रीय स्तर पर: संस्थागत क्षमता को मज़बूत करना, नीति समन्वय में सुधार करना, ब्याज़ दरों का प्रबन्धन करना और जोखिम प्रबन्धन को मजबूत करना.
रिबेका ग्रिनस्पैन ने कहा, "ये ग्यारह प्रस्ताव हैं जिन पर कार्रवाई सम्भव हैं और उन्हें वास्तविक बनाने में सक्षम होने के लिए सभी पक्षकारों की राजनैतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है."