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ईरान में कठिन हालात के बीच, अफ़ग़ान शरणार्थियों की स्वदेश वापसी में तेज़ी

वर्ष 2025 के दौरान, पाकिस्तान और ईरान से लाखों अफ़ग़ान शरणार्थी स्वदेश वापिस लौटने को मजबूर हुए हैं.
© IOM
वर्ष 2025 के दौरान, पाकिस्तान और ईरान से लाखों अफ़ग़ान शरणार्थी स्वदेश वापिस लौटने को मजबूर हुए हैं.

ईरान में कठिन हालात के बीच, अफ़ग़ान शरणार्थियों की स्वदेश वापसी में तेज़ी

प्रवासी और शरणार्थी

मध्य पूर्व में इसराइल और ईरान के दरम्यान हाल ही में युद्धक हालात बनने के बाद, वहाँ पहले से रह रहे लाखों अफ़ग़ान शरणार्थियों की स्वदेश वापसी में तेज़ बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR ने शनिवार को आगाह किया है कि शरणार्थियों की इस वापसी से, अफ़ग़ानिस्तान में पहले से ही जारी नाज़ुक स्थिति और भी अस्थिर हो सकती है.

एजेंसी ने बताया है कि ईरान सरकार द्वारा, इस साल 20 मार्च को वापसी की अन्तिम समय सीमा लागू किए जाने के बाद से 6 लाख 40 हज़ार से अधिक अफ़ग़ान शरणार्थी स्वदेश वापिस लौटे हैं. 

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इनमें से 3 लाख 66 हज़ार से अधिक अफ़ग़ान लोगों को निर्वासित किया गया है, जिनमें शरणार्थी और शरणार्थी जैसी स्थिति वाले लोग शामिल हैं.

ईरान से वापिस लौटने वाले इन अफ़ग़ान शरणार्थियों की संख्या 26 जून से तेज़ी से बढ़ी है, जब लगभग 36 हज़ार 100 अफ़ग़ान लोग, केवल एक दिन में ही स्वदेश वापिस लौटे थे.

13 जून से अफ़ग़ान शरणार्थियों की दैनिक वापसी की संख्या में वृद्धि लगातार जारी रही है.

काबुल में UNHCR के प्रतिनिधि अराफ़ात जमाल ने कहा है, "मैं हाल ही में ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीमा पर मौजूद था, जहाँ हज़ारों अफ़ग़ान लोग, बहुत कठिन में वापिस लौट रहे हैं."

उन्होंने कहा, “अफ़ग़ान परिवार एक बार फिर से उजड़ रहे हैं, वे अपने साथ बहुत कम सामान लेकर आ रहे हैं, वे थके हुए हैं, भूखे हैं और इस बात से डरे हुए हैं कि उनके लिए एक ऐसे देश में क्या होगा, जहाँ उनमें से अनेक ने तो कभी क़दम भी नहीं रखा.”

“महिलाएँ और लड़कियाँ विशेष रूप से चिन्तित हैं, क्योंकि उन्हें आवागमन की स्वतंत्रता और शिक्षा व रोज़गार जैसे बुनियादी अधिकारों पर प्रतिबन्धों का डर है.”

आधी आबादी सहायता पर निर्भर

वर्ष  2025 में कुल मिलाकर 12 लाख से अधिक अफ़ग़ान लोग, ईरान और पाकिस्तान से वापस आ चुके हैं या उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया है, जिससे अफ़ग़ानिस्तान के भीतर, पहले से ही जारी निराशाजनक स्थिति और भी ख़राब हो गई है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अफ़ग़ानिस्तान की आधी से ज़्यादा आबादी मानवीय सहायता पर निर्भर है.

UNHCR ने आगाह किया है कि घटते अन्तरराष्ट्रीय समर्थन से अफ़ग़ानिस्तान में जटिल और विशाल दायरे वाला और भी गहरा हो रहा है.

अराफ़ात जमाल ने कहा, “हमें तेज़ी से काम करने की ज़रूरत है. हम अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मदद करने का आहवान करते हैं, जिसमें आपात सहायता के साथ, दीर्घकालिक सहायता की अपील भी शामिल है.”

उन्होंने कहा, “अस्थिरता और विस्थापन के चक्र को रोकने के लिए, स्थानीय समाज में लोगों के स्थाई रूप से घुलने-मिलने और समायोजित होने के लिए धन मुहैया कराना ज़रूरी है.”

यूएन शरणार्थी एजेंसी इस क्षेत्र की सरकारों के साथ यह पैरोकारी करती रही है कि अफ़ग़ानिस्तान में लोगों की वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक होनी चाहिए.

अफ़ग़ानों लोगों को वापिस लौटने के लिए मजबूर करना या उन पर दबाव डालना एक टिकाऊ विकल्प नहीं है और इससे क्षेत्र व उससे आगे भी, अस्थिरता पैदा हो सकती है.

यूएन एजेंसी, अफ़ग़ान लौटने वाले लोगों को देश में दाख़िल होते समय उनकी मदद करने के लिए सहयोगी यूएन एजेंसियों और भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रही है, औरलोगों व समुदायों की मदद के लिए तत्काल और दीर्घकालिक सहायता प्रदान की जा रही है.

यूएनएचसीआर अपने भागीदारों के साथ मिलकर, स्थानीय समाज व समुदायों में लोगों का स्थाई समायोजन सुनिश्चित करने और देश के अन्दर व इसकी सीमाओं से परे, बार-बार होने वाले विस्थापन को रोकने के लिए, तत्काल और पर्याप्त धन की मुहैया कराए जाने की मांग कर रहा है.

इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति के लिए धन जुटाने की, यूएनएचसीआर की सहायता अपील के जवाब में, कुल धनराशि का केवल 23 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ है.