ग़ाज़ा: भोजन व ईंधन की भारी क़िल्लत, ज़रूरतों के अथाह समन्दर में मदद 'बून्द' के बराबर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि इस सप्ताह के शुरू में ग़ाज़ा में पहुँची ज़रूरी चिकित्सा सामग्री की पहली खेप बेहद सीमित राहत ही दे पाएगी, जबकि ग़ाज़ा के हालात अब भी बेहद गम्भीर हैं, जहाँ लोग भोजन हासिल करने की आस में, गोलीबारी में मारे जा रहे हैं.
ग़ाज़ा में मौजूद WHO की आपातकालीन चिकित्सा दल के समन्वयक डॉक्टर लूका पिगोज़ी ने कहा है, “वहाँ, लोगों को वाक़ई गोली मारी जाती है. वे विस्फोटों की चपेट में आने से चोटों और शारीरिक ज़ख्मों के भी शिकार हो रहे हैं.”
डॉक्टर पिगोज़ी का यह बयान, गुरुवार को हुई एक गम्भीर घटना में, बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की ख़बरों के बाद आया. इस बार यह घटना, ग़ाज़ा के मध्य इलाक़े में स्थित डेयर अल-बलाह शहर के एक बाज़ार पर हमले की थी.
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी OCHA ने बताया कि इस हमले में 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और लगभग 70 लोग घायल हुए.
घायलों को अल-अक़्सा अस्पताल, नास्सेर चिकित्सा परिसर और दो अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों में भर्ती कराया गया.
भोजन की तलाश में सैकड़ों की मौत
इस जानलेवा घटना के अलावा, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने मंगलवार को बताया था कि अब तक भोजन हासिल करने की कोशिश करते समय क़तारों में लगे लोगों पर गोलियाँ चलाए जाने के मामलों में, कम से कम 410 फ़लस्तीनियों की मौत हुई है.
ये मौतें इसराइली सेना द्वारा की गई गोलीबारी में, उन इसराइल-अमेरिका समर्थित सहायता केन्द्रों (GHF) के आसपास हुईं, जो संयुक्त राष्ट्र के सहयोग के बिना चलाए जा रहे हैं.
डॉक्टर पिगोज़ी ने कहा कि युद्धग्रस्त और इसराइल के क़ब्ज़े वाले ग़ाज़ा क्षेत्र में इस समय उच्च गुणवत्ता चिकित्सा सेवा देना बेहद मुश्किल हो गया है, “ख़ासतौर पर इसलिए क्योंकि हर बार मरीज़ों की संख्या बहुत ज़्यादा होती है.”
स्वास्थ्य से जुड़ी ज़रूरतें व्यापक और बेहद गम्भीर हैं, और चिकित्सा सामान की लगभग 50 प्रतिशत सामग्री पूरी तरह ख़त्म हो चुकी हैं.
WHO की ओर से बुधवार को, ग़ाज़ा में भेजी गई चिकित्सा सामग्री की खेप 2 मार्च के बाद पहली आपूर्ति थी, जब इसराइल ने पूरे ग़ाज़ा पट्टी पर पूरी तरह से नाकाबन्दी लगा दी थी.
ग़ाज़ा में, कुल नौ ट्रकों के ज़रिए ज़रूरी चिकित्सा आपूर्ति पहुँचाई गई है, जिनमें 2 हज़ार यूनिट रक्त और 1500 यूनिट प्लाज़्मा शामिल थे. ये सभी सामग्री केरेम शलॉम सीमा चौकी के रास्ते भेजी गई.
डॉक्टर पिगोज़ी ने कहा, यह ज़रूरत के विशाल दायरे की तुलना में "समन्दर में एक बून्द" के बराबर है.
उन्होंने बताया कि मार्च से अब तक सहायता समूहों को, 44 प्रतिशत बार प्रवेश से रोका गया है, जिससे मदद पहुँचना मुश्किल हो रहा है.
WHO के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने बताया कि चिकित्सा मदद प्राप्त करने या भोजन सामग्री हासिल करने के लिए बाहर जाते हुए लोग मारे जा रहे हैं, जबकि सीमा के पार भोजन सामग्री और दवाइयाँ भारी मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन रास्ता बन्द रखा गया है.