वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

यूएन चार्टर के 80 वर्ष: युद्ध की राख से, एक बेहतर भविष्य की आशा का अंकुर

संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को शहर में सम्मेलन 25 अप्रैल से 26 जून 1945 तक आयोजित किया गया, जिसमें यूएन चार्टर पर सहमति हुई.
UN Photo/McLain
संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को शहर में सम्मेलन 25 अप्रैल से 26 जून 1945 तक आयोजित किया गया, जिसमें यूएन चार्टर पर सहमति हुई.

यूएन चार्टर के 80 वर्ष: युद्ध की राख से, एक बेहतर भविष्य की आशा का अंकुर

यूएन मामले

न्यूयॉर्क सिटी के मैनहैटन इलाक़े में गुरूवार का दिन कुछ ख़ास था. इस मायने में कि कई दिन की चिलचिलाती गर्मी के बाद कुछ बादलों की छाँव में चल रही ठंडी हवा के बीच, अनेक यूएन राजनयिकों ने उसी मार्ग पर दौड़ लगाई जहाँ से 80 वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र के आरम्भिक वजूद के चिन्ह नज़र आए थे. यह दौड़ प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वैयर से शुरू हो कर, पूर्वी नदी के पास उसी बिन्दु पर ख़त्म हुई जहाँ इस समय यूएन मुख्यालय स्थित है. यह अवसर था यूएन चार्टर की 80वीं वर्षगाँठ मनाने का, जिसके लिए यूएन महासभा में भी गुरूवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया.

आठ दशक पहले, 26 जून 1945 को, 50 देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को शहर में, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, एक ऐसे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए जिससे इतिहास की दिशा बदल गई. 

दूसरे विश्व युद्ध से हुए विध्वंस की पृष्ठभूमि में, इस चार्टर की प्रस्तावना में, भविष्य में युद्धों की रोकथाम करने, मानवाधिकारों में फिर से भरोसा बहाल करने और शान्ति व सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने की भावना को परिलक्षित किया गया.

यह वैश्विक दस्तावेज़, हस्ताक्षर करने वाले देशों के विधाई निकायों (legislative bodies) द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद, 24 अक्टूबर 1945 को प्रभावी हुआ.

इस संस्थापक दस्तावेज़ की 80वीं वर्षगाँठ पर गुरूवार को जनरल असेम्बली में आयोजित एक कार्यक्रम में आहवान किया गया कि हिंसक टकरावों, दरारों और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति बेपरवाही के इस दौर में संगठन के बुनियादी मूल्यों व सिद्धान्तों की रक्षा की जानी होगी.
Tweet URL
 
संयुक्त राष्ट्र चार्टर में यूएन के मिशन व कामकाज को दिशा दिखाने वाले उद्देश्यों व सिद्धान्तों को प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें आज भी उतना ही प्रासंगिक माना गया है, जितना वे आठ दशक पहले थे. 
 
आधुनिक अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था को नया आकार देने वाला यह चार्टर, न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में प्रदर्शनी के लिए रखा गया है.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरूवार को यूएन महासभा की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि दूसरे विश्व युद्ध की राख से, इस चार्टर ने दुनिया ने आशा का बीजारोपण किया था.

“एक चार्टर, एक दृष्टि, एक वादा कि जब मानवता एक साथ खड़ी हो, तो शान्ति सम्भव है.”

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि यूएन चार्टर एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ से कहीं बढ़कर है. “यह आशा का एक जीता-जागता घोषणापत्र, वैश्विक सहयोग के लिए नींव, और प्रगति का इंजन है.”

उन्होंने कहा कि विध्वंस का दंश झेलने वाली इस दुनिया में, संयुक्त राष्ट्र ने स्थापना के बाद से ही अपनी निर्माण शक्ति का परिचय दिया है.

यूएन महासभा अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग ने इस क्षण को इसकी वर्तमान प्रासंगिकता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक क़रार दिया. ग़ाज़ा, यूक्रेन और सूडान समेत अन्य देशों में हिंसक टकरावों से लेकर बहुपक्षवाद के लिए बढ़ती चुनौतियों तक.

उन्होंने देशों से कूटनीति का विकल्प चुनने का आग्रह किया और यूएन चार्टर में शान्ति व मानव गरिमा के मुद्दों को सर्वोपरि रखने का भी. “हमें इस क्षण का लाभ उठाना होगा और विध्वंसक युद्धों के बजाय सम्वाद व कूटनीति को चुनना होगा.”

अनूठा संगठन

यूएन प्रमुख ने संयुक्त राष्ट्र को एक ऐसा अनूठा बैठक स्थल बताया जहाँ चिर-प्रतिद्वंद्वी भी वैश्विक चुनौतियों के समाधान की तलाश करते हैं, सबसे शक्तिशाली के साथ-साथ सर्वाधिक निर्बलों को भी प्रतिनिधित्व हासिल है और जहाँ दुनिया में हर जगह से लोगों की आवाज़ शामिल है.

महासचिव गुटेरेश के अनुसार, यूएन चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की बुनियाद पर संयुक्त राष्ट्र ने ज़िन्दगियों की रक्षा की है, तक़दीरों को बदला है, विश्व के हताश इलाक़ों में आशा का संचार किया है और तीसरे विश्व युद्ध को होने से रोका है.

उन्होंने आगाह किया कि इसके बावजूद, यूएन चार्टर में किए गए वादे की निरन्तर परीक्षा हो रही है.

हमने कुछ युद्धों का अन्त होते देखा है, तो नए टकरावों को शुरू होते हुए भी. ज़रूरतमन्दों तक मानवीय सहायता पहुँचाई गई है, लेकिन इसके अभाव में आपदाएँ भी घटित हुई हैं. परमाणु ख़तरे को दूर करने में प्रगति हुई है, लेकिन पुन: शस्त्रीकरण की कोशिशें भी तेज़ हुई हैं.

लोकतंत्र, मानवाधिकार, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के पालन, इन सभी विषयों में बेहतरी आई है, लेकिन चिन्ताजनक रुझान भी नज़र आ रहे हैं. टिकाऊ विकास के लिए संकल्प, असमानताओं के कारण कमज़ोर हो रहे हैं, जबकि जलवायु कार्रवाई के प्रयासों के बावजूद, पर्यावरण को नुक़सान पहुँच रहा है.

यूएन मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल प्रति को एक प्रदर्शनी में रखा गया है.
UN Photo/Loey Felipe
यूएन मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल प्रति को एक प्रदर्शनी में रखा गया है.

मूल्यों व सिद्धान्तों पर प्रहार

यूएन महासचिव ने इन विरोधाभासों की पृष्ठभूमि में चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यूएन चार्टर के उद्देश्यों व सिद्धान्तों पर जिस तरह से प्रहार हो रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया.

उनके अनुसार, सम्प्रभु राष्ट्रों के विरुद्ध बल प्रयोग, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी और मानवाधिकार क़ानून का उल्लंघन, आम नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना, और भोजन व जल जैसी बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं को हथियार के तौर पर इस्तेमाल, ये भी गम्भीर चिन्ताएँ हैं.

एंतोनियो गुटेरेश ने क्षोभ जताया कि हम बार-बार वही रुझान देखते हैं. जब अपने फ़ायदे में हो, तो यूएन चार्टर का पालन किया जाता है, नहीं तो इसकी उपेक्षा कर दी जाती है.

यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर के 80 वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रदर्शनी.
UN Photo/Mark Garten
यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर के 80 वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रदर्शनी.

नई प्रतिबद्धता की पुकार

महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र का चार्टर वैकल्पिक नहीं है. यह अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों की आधारशिला है.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि यूएन चार्टर के उल्लंघन को सामान्य बनाने से रोका जाना होगा और कथनी व करनी में अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति संकल्प व्यक्त करना होगा.

एक डिजिटल, बहुध्रुवीय जगत की वास्तविकताओं से तारतम्यता बैठाने और वैश्विक चुनौतियों व उठापठक का एकता व संकल्प के साथ सामना करने के लिए यह ज़रूरी है.

महासचिव ने नागरिक समाज, युवजन, निजी सैक्टर के लिए अपने दरवाज़े खोलने की पुकार लगाते हुए कहा कि बहुपक्षवाद को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप आकार दिया जाना होगा. चार्टर की मूल भावना और उसमें निहित दायित्वों के अनुरूप बर्ताव करना होगा.

“शान्ति के लिए. न्याय के लिए. प्रगति के लिए. हम लोगों के लिए.”