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हर एक व्यक्ति तक बिजली व स्वच्छ ईंधन पहुँचाने में धीमी प्रगति, और अधिक निवेश ज़रूरी

बुरुंडी में एक स्वास्थ्य केन्द्र पर एक सौर पैनल को स्थापित किया जा रहा है.
© UNICEF Burundi
बुरुंडी में एक स्वास्थ्य केन्द्र पर एक सौर पैनल को स्थापित किया जा रहा है.

हर एक व्यक्ति तक बिजली व स्वच्छ ईंधन पहुँचाने में धीमी प्रगति, और अधिक निवेश ज़रूरी

एसडीजी

विश्व भर में 67 करोड़ लोग अब भी बिजली आपूर्ति के दायरे से बाहर हैं, जबकि 1.5 अरब से अधिक लोग खाना पकाने के लिए आग जलाने की लकड़ी या चारकोल जैसे प्रदूषण फैलाने वाले, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ईंधन का इस्तेमाल करते हैं. वर्ष 2025 में करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन की इसी वास्तविकता को एक नई रिपोर्ट में साझा करते हुए आग्रह किया गया है कि सर्वजन तक स्वच्छ ऊर्जा पहुँचाने के लिए और अधिक निवेश किया जाना होगा.

बुधवार को प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, विश्व की क़रीब 92 फ़ीसदी आबादी तक बिजली पहुँचाने में सफलता तो मिली है, लेकिन 66.6 करोड़ लोग की अब भी इस तक पहुँच नहीं है.

स्वच्छ ईंधन मुहैया कराने के प्रयासों को भी झटका लगा है और फ़िलहाल इसकी रफ़्तार 2010 के दशक के आँकड़े से कम है, जिसकी एक बड़ी वजह कोविड-19 महामारी से आया व्यवधान है. वहीं, ऊर्जा क़ीमतों में उतार-चढ़ाव आया है और कर्ज़ संकट भी बढ़ा है.

अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फ़तीह बिरोल ने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में प्रगति के बावजूद, बिजली व स्वच्छ ईंधन की सुलभता निराशाजनक साबित हुई है, विशेष रूप से अफ़्रीका में. इस वजह से हर लाखों लोगों की धुँए के कारण मौतें होती हैं और उनके विकास व शिक्षा अवसर भी सीमित हो रहे हैं.

'Tracking SDG 7: The Energy Progress' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि प्रगति की मौजूदा दर से, वर्ष 2030 तक टिकाऊ विकास एजेंडा के 7वें लक्ष्य को हासिल कर पाना सम्भव नहीं होगी. यह लक्ष्य सभी की पहुँच के भीतर, भरोसेमन्द, सतत, आधुनिक ऊर्जा सुलभ बनाने पर केन्द्रित है.

बिजली आपूर्ति से दूर अधिकाँश आबादी दूर-दराज़ के, नाज़ुक हालात वाले इलाक़ों में बसी है, और उनकी आय भी कम है. इसलिए इस रिपोर्ट में, एक लघु ग्रिड (mini grid) और ग्रिड से स्वतंत्र सौर ऊर्जा (off-grid) बिजली वितरण प्रणालियों के ज़रिए नवीकरणीय ऊर्जा को छोटे इलाक़े या गाँवों में उपलब्ध कराने पर बल दिया गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इन ग्रामीण इलाक़ों में किफ़ायती, विकेन्द्रीकृत (decentralized) तेज़ी से बढ़ाए जा सकने वाले समाधानों की आवश्यकता है.

ग्रामीण इलाक़ों में बसी 1.5 अरब की आबादी के पास खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन नहीं है और इसके लिए भी विकेन्द्रीकृत समाधान अहम हैं, जैसेकि बायोगैस प्लांट या फिर बिजली से खाना पकाना. इनकी मदद से, खाना बनाते समय घर में होने वाले वायु प्रदूषण और उसके स्वास्थ दुष्प्रभावों की रोकथाम भी सम्भव है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने आगाह किया कि जो प्रदूषक तत्व हमारे ग्रह में ज़हर घोल रहे हैं, वही लोगों को ज़हर दे रहे हैं. इस वजह से, हर साल लाखों लोगों की हृदय रोग, श्वसन तंत्र की बीमारियों के कारण मौत हो जाती है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने कार्रवाई का दायरा बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन समाधानों में निवेश की अपील की है, ताकि आमजन व पृथ्वी के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके.

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा

रिपोर्ट बताती है कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के इरादे से विकासशील देशों के लिए वित्तीय समर्थन में लगातार तीसरे साल वृद्धि हुई है, और 2023 में यह 21.6 अरब डॉलर पहुँच गया है. 

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को भी मज़बूती दी गई है, और यह अब प्रति व्यक्ति 341 वॉट है, जबकि 2015 में यह आँकड़ा प्रति व्यक्ति 155 वॉट था.

मगर, क्षेत्रीय स्तर पर विसंगतियाँ बरक़रार हैं और सब-सहारा अफ़्रीका समेत कुछ अन्य विकासशील क्षेत्रों को और अधिक समर्थन की दरकार होगी. यहाँ अक्षय ऊर्जा साधनों को मुहैया कराने में विस्तार हुआ है, लेकिन अभी इसका दायरा और बढ़ाने की ज़रूरत है.

बिजली आपूर्ति तक पहुँच के बिना रहने वाली कुल आबादी का 85 प्रतिशत इसी क्षेत्र में बसा है. यहाँ हर पाँच में से चार परिवारों के पास खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का अभाव है.

रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय स्तर पर असमानताओं की एक बड़ी वजह पर्याप्त स्तर पर वित्त पोषण की कमी है. अभी तक दर्ज की गई प्रगति को बरक़रार रखने के लिए यह ज़रूरी है कि निजी व सार्वजनिक सैक्टर में अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की मज़बूती दी जाए और विकासशील देशों के लिए वित्तीय समर्थन को बढ़ाया जाए.

इसलिए रियायती दरों पर वित्तीय समर्थन मुहैया कराना, अनुदान देना, जोखिम में कमी लाने समेत राष्ट्रीय स्तर पर उपयुक्त ऊर्जा योजना और नियामन व्यवस्था को लागू किया जाना अहम है.