वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

FFD4: लड़कियों की शिक्षा में निवेश से, वैश्विक अर्थव्यवस्था को तीन गुना लाभ

घाना के एक स्कूल में छात्राएँ.
© UNICEF/Roger Yebuah
घाना के एक स्कूल में छात्राएँ.

FFD4: लड़कियों की शिक्षा में निवेश से, वैश्विक अर्थव्यवस्था को तीन गुना लाभ

आर्थिक विकास

निर्बल और ज़रूरतमन्द लोगों की मदद करना दान नहीं, बल्कि एक एक बेहतर भविष्य के लिए साझा निवेश है. इसके बावजूद, आज वैश्विक विकास के लिए वित्तीय सहयोग में भारी कटौती देखने को मिल रही है. संयुक्त राष्ट्र इस स्थिति में बदलाव लाने की दिशा में प्रयास करते हुए, स्पेन के सेविया शहर में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित कर रहा है.

इस सम्मेलन का उद्देश्य एक न्यायपूर्ण और टिकाऊ दुनिया के लिए बड़े पैमाने पर निवेश को प्रोत्साहित करना है.

उदाहरण के तौर पर, लड़कियों की शिक्षा में लगने वाला हर एक डॉलर, औसतन 2.80 डॉलर की वापसी देता है, जिससे अरबों डॉलर की अतिरिक्त GDP (सकल घरेलू उत्पाद) उत्पन्न होती है. 

इसी तरह, पानी और स्वच्छता पर ख़र्च किया गया हर एक डॉलर, 4.30 डॉलर की स्वास्थ्य सेवाओं की बचत कराता है.

सरल गणित, कोई चमत्कार नहीं

यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि आँकड़ों से साबित होने वाले नतीजे हैं. गणित न तो लिंग देखता है और न ही आधारभूत ढाँचा, यह सिर्फ़ हक़ीक़त को संख्याओं में दिखाता है.

और, ये आँक़ड़े साफ़ संकेत देते हैं कि जिन देशों के पास सबसे कम संसाधन हैं, उनकी मदद करना सभी के लिए लाभकारी है, और इससे लाभान्वित होने वालों में, अमीर देश भी शामिल हैं.

सही जगह पर निवेश हुआ सिर्फ़ एक डॉलर भी बड़ा बदलाव ला सकता है. उदाहरण के तौर पर, हर व्यक्ति पर सालाना सिर्फ़ 1 डॉलर ख़र्च करके, ग़ैर-संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए संसाधन दिए जाएँ, तो 2030 तक क़रीब 70 लाख लोगों की मौतों को टाला जा सकता है.

इसी तरह, आपदा जोखिम कम करने के लिए हुआ हर 1 डॉलर का निवेश, बाद में पुनर्बहाली में 15 डॉलर तक की लागत बचा सकता है.

फिर भी, इतने पुख़्ता सबूतों के बावजूद विकास सहायता को लेकर अक्सर ग़लत धारणा भी है, जहाँ कुछ लोग इसे केवल दान समझते हैं, तो कुछ इसे मुनाफ़ा कमाने का साधन मानते हैं.

दान नहीं, अधिकार मिले

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की नवीनतम रिपोर्ट, अफ़ग़ान महिलाओं की उद्यमिता पर बनी आम धारणाओं को चुनौती देती है.

यह रिपोर्ट बताती है कि ये महिलाएँ दान नहीं मांग रहीं, वे सिर्फ़ एक न्यायपूर्ण अवसर चाहती हैं, जिससे वे अपनी मेहनत से आगे बढ़ सकें.

जब महिलाएँ ख़ुद आय अर्जित हैं, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, और यही आत्मनिर्भरता उनके समुदायों को भी मज़बूत बनाती है.

ये महिलाएँ तमाम मुश्किलों के बावजूद आय के साधन उत्पन्न कर रही हैं, रोज़गार दे रही हैं, और अपने लिए अधिक समृद्ध और सम्पूर्ण जीवन का निर्माण कर रही हैं.

अगर सार्वजनिक और निजी वित्तीय संसाधनों तक महिलाओं की पहुँच को बढ़ाया जाए, ऋण की गारंटी दी जाए, अन्तरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेहतर शर्तें उपलब्ध कराई जाएँ, और सहायता नैटवर्क को मज़बूत किया जाए, तो वे न केवल अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकती हैं बल्कि अफ़ग़ानिस्तान, इक्वाडोर या किसी भी देश में एक बेहतर भविष्य की राह बना सकती है.

15 साल की शरीफा अपनी 13 साल की बहन मदीना को पढ़ाते हुए.
© UNICEF/Amin Meerzad

सम्मेलन से पहले की चुनौतियाँ

शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता और आपदा प्रबन्धन जैसे क्षेत्रों से मिले ये उदाहरण एक साफ़ और डेटा-आधारित सन्देश देते हैं कि विकास में किया गया बेहतर निवेश सभी के लिए लाभदायक होता है.

यही सन्देश 30 जून से 3 जुलाई (2024) तक स्पेन के सेविया शहर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के चौथे विकास वित्त सम्मेलन (FFD4) के केन्द्र में होना चाहिए. 

लेकिन यह सम्मेलन कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है.

न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में हाल ही में देशों ने एक व्यापक दस्तावेज़ पर सहमति जताई है, जिसे सम्मेलन के अन्त में अपनाया जाना है, और जो वैश्विक विकास सहायता की दिशा तय करेगा.

लेकिन इसी बीच, कुछ देश इस दस्तावेज़ से पीछे हटने लगे हैं. विशेष रूप से, संयुक्त राज्य अमेरिका ने घोषणा की है कि वह सवील सम्मेलन के लिए कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजेगा.

हालाँकि सबकुछ निराशाजनक भी नहीं है, जैसे स्पेन ने अपने विकास वित्त बजट में 12 प्रतिशत की वृद्धि की है, लेकिन भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि वैश्विक सहयोग पर लगातार सवाल उठाए जा रहे है.

यह अविश्वास, स्पष्ट रूप से विकास वित्त में हर साल 4 ट्रिलियन डॉलर की कमी के रूप में झलकता है. 

इसके साथ ही पहले किए गए वादों से पीछे हटना और सहायता की आपूर्ति में भारी गिरावट देखी जा रही है, जिसे महासचिव ने “ऐतिहासिक गति और पैमाने पर संकट” बताया है.

इसके अलावा, जिन सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को दुनिया भर के नेताओं ने सिर्फ 10 साल पहले संयुक्त रूप से अपनाया था, वे आज अपनी तय राह से काफ़ी भटक चुके हैं.

सेविया सम्मेलन में दाँव पर क्या है?

ऐमहर्स्ट में स्थित मैसेचुसेट्स विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर जयती घोष का मानना है कि सवील सम्मेलन में सफलता तभी सम्भव है, जब दुनिया के अन्य देश वैश्विक नेतृत्व के ख़ालीपन को भरें और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाएँ, क्योंकि ऐसा करना हमारे अस्तित्व के लिए अनिवार्य है. 

इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सबसे ज़रूरी है कि अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में गहरे और ठोस सुधार किए जाएँ. मौजूदा ढाँचा विकसित देशों के हितों की रक्षा करता है, लेकिन विकासशील देशों की ज़रूरतों को पूरा करने में बुरी तरह विफल है.

ज़रा सोचिए, विकासशील देशों को अपने लिए गए ऋण पर विकसित देशों की तुलना में कम से कम दोगुना अधिक ब्याज़ चुकाना पड़ता है. 

आज के समय में, निजी क़र्ज़दाताओं द्वारा इन देशों से ली जाने वाले क़र्ज़ पर औसत ब्याज़ दरें, पिछले 15 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी हैं.

क़र्ज़ सब छीन लेता है…

विकासशील देशों ने 2023 में बाहरी क़र्ज़ के ब्याज़ और मूलधन को चुकाने पर, रिकॉर्ड 1.4 ट्रिलियन डॉलर की रक़म ख़र्च की है, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे अधिक है.

2024 में, दुनिया के 1.1 अरब से अधिक लोग, ऐसे देशों में रह रहे हैं, जहाँ क़र्ज़ चुकाने पर सरकारी राजस्व का 20 प्रतिशत से अधिक धन ख़र्च हो रहा है. 

वहीं, 2.2 अरब लोग उन देशों में रहते हैं जहाँ यह अनुपात 10 प्रतिशत से ज़्यादा है.

अगर दो उदाहरण दिए जाएँ तो इस क़र्ज़ पर चुकाया जाने वाला ब्याज़, स्वास्थ्य ढाँचे और शिक्षा सेवाओं में निवेश में बाधाएँ खड़ी करता है.

इसलिए, क़र्ज़ पुनर्गठन (debt restructuring) बेहद ज़रूरी है क्योंकि विकास की अधिकतर उम्मीदें, सहायता हासिल करने और फिर क़र्ज़ की अदायगी में गुम हो जाती हैं.

टिकाऊ विकास का 2030 एजेण्डा, सर्वजन के लिये एक बेहतर व टिकाऊ भविष्य प्राप्ति का ब्लूप्रिंट है.
© UNDP

विकास में निवेश

भूख को ख़त्म करना, लैंगिक समानता बढ़ाना, पर्यावरण की रक्षा करना, जलवायु परिवर्तन से लड़ना और महासागरों को बचाना, ये कोई कट्टरपंथी विचार नहीं हैं.

भले ही कुछ अतिवादी विचारधाराएँ सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को चरमपंथी एजेंडा कहती हों, लेकिन असल में ये लक्ष्य पूरी मानवता की साझा ज़रूरतों की बुनियाद हैं, जिन्हें 2015 में 193 देशों के नेताओं ने मिलकर अपनाया था.

स्पेन की अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के लिए मंत्री ऐना ग्रानादोस गालिन्दो का मानना है कि सविल सम्मेलन, वैश्विक एकजुटता का प्रतीक है.

उनका कहना है कि विकास सहायता और बहुपक्षीय सहयोग का विरोध करने वाली आवाज़ें ज़्यादा नहीं हैं, वे अल्पमत में हैं.