बांग्लादेश ने यूएन जल कन्वेंशन में शामिल होकर, दक्षिण एशिया में ली बढ़त
बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र पारसीमीय जल मार्गों और अन्तरराष्ट्रीय झीलों के संरक्षण एवं उपयोग पर कन्वेंशन (UN Water Convention) में औपचारिक रूप से शामिल हो गया है. इस ऐतिहासिक क़दम के साथ, बांग्लादेश इस सन्धि का हिस्सा बनने वाला दक्षिण एशिया का प्रथम, और दुनिया का 56वाँ देश बन गया है.
““Protection and Use of Transboundary Watercourses and International Lakes” नामक यह यूएन कन्वेंशन, साझा जल संसाधनों के सतत और न्यायसंगत प्रबन्धन के लिए एक क़ानूनी एवं अन्तर-सरकारी ढाँचा प्रदान करता है.
बांग्लादेश, नदियों से गहराई से जुड़ा और गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना (GBM) नदी प्रणाली से परिभाषित एक देश है जिसके लिए यह क़दम, क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
यह नदी प्रणाली, चीन, नेपाल, भूटान और भारत से होते हुए बांग्लादेश में मिलती है, जहाँ यह विश्व के सबसे जटिल डेल्टाओं में से एक का निर्माण करती है.
जल संकट
बांग्लादेश, कई गम्भीर जल-सम्बन्धी संकटों से जूझ रहा है. देश की लगभग 60% आबादी बाढ़ के उच्च जोखिम में है - जो वैश्विक स्तर पर नैदरलैंड्स के बाद दूसरे स्थान पर है.
साथ ही, 45% जनसंख्या नदीय बाढ़ के सबसे अधिक जोखिम में है. देश का 20–25% क्षेत्र, हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होता है, और अत्यधिक बाढ़ आने की स्थिति में यह आँकड़ा 60% तक पहुँच जाता है.
इसके अलावा साढ़े 6 करोड़ से अधिक लोग सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं से वंचित हैं.
जलवायु परिवर्तन इन समस्याओं को और भी जटिल बना रहा है - जिसमें अनियमित जल प्रवाह, लम्बे समय तक पड़ने वाला सूखा, अत्यधिक मानसूनी वर्षा, समुद्र-स्तर में वृद्धि और खारे पानी का मीठे जल में घुलना जैसी चुनौतियाँ शामिल हैं.
बांग्लादेश ने यह स्वीकार करते हुए कि सतत जल प्रबन्धन केवल राष्ट्रीय प्रयासों से सम्भव नहीं है, हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी है.
भारत के साथ संयुक्त नदी आयोग जैसी द्विपक्षीय व्यवस्थाएँ पहले से सक्रिय हैं, लेकिन यूएन कन्वेंशन की सदस्यता, अन्तरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का लाभ उठाने का अवसर प्रदान करती है.
बांग्लादेश में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मामलों की सलाहकार सैयदा रिज़वाना हसन का कहना है, “जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि और पानी की बढ़ती माँग - ये सब सहयोगात्मक जल प्रबन्धन की तात्कालिकता को दर्शाते हैं. हम इस कन्वेंशन से जुड़कर अन्तरराष्ट्रीय उदाहरणों से सीख सकते हैं, जिससे हमारा भविष्य सुरक्षित हो सकता है.”
क्षेत्रीय सहयोग
UNECE की कार्यकारी सचिव तातियाना मोल्सियान ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, “जलवायु संकट के बढ़ते दबावों के बीच यह क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है.”
बांग्लादेश 2012 से इस कन्वेंशन की गतिविधियों में भाग लेता रहा है. 2024 में बांग्लादेश ने, स्लोवीनिया में आयोजित 10वीं पक्षकार बैठक में भी भाग लिया था.
मार्च 2025 में ढाका में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद, इस सदस्यता का निर्णय लिया गया.
UNECE की कार्यकारी सचिव तातियाना मोल्सियान ने इस निर्णय को क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में “जलवायु संकट के दौर में एक महत्वपूर्ण पहल” बताया.
यूएन जल कन्वेंशन की सचिव सोन्या कोएप्पेल ने, दिसम्बर 2026 में संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन की तैयारियों के मद्देनज़र, अन्य दक्षिण एशियाई देशों से भी इस मंच से जुड़ने और सहयोग के इन अवसरों का लाभ उठाने का आहवान किया है.