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म्याँमार: भूकम्प की तबाही, युद्ध का साया और गहराता मानवीय संकट

मैंडाले में एक शिक्षक खंडहरों के बीच ...वहीं, जहाँ कभी वह अंग्रेज़ी और विज्ञान पढ़ाया करते थे. अब वह कक्षा मार्च में आए भूकम्प की तबाही में पूरी तरह तबाह हो चुकी है.
© UNICEF/Minzayar Oo
मैंडाले में एक शिक्षक खंडहरों के बीच ...वहीं, जहाँ कभी वह अंग्रेज़ी और विज्ञान पढ़ाया करते थे. अब वह कक्षा मार्च में आए भूकम्प की तबाही में पूरी तरह तबाह हो चुकी है.

म्याँमार: भूकम्प की तबाही, युद्ध का साया और गहराता मानवीय संकट

शान्ति और सुरक्षा

म्याँमार में लगभग एक सदी का सबसे बड़ा भूकम्प आए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब भी 60 लाख से ज़्यादा लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है. इस आपदा ने वर्षों से चले आ रहे युद्ध, राजनैतिक उथल-पुथल और बड़े पैमाने पर विस्थापन के कारण, पहले से मौजूद मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है.

28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के इस भूकम्प ने, संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, मध्य म्याँमार में भारी तबाही मचाई, जिसमें लगभग 3 हज़ार 800 लोगों की जान चली गई और 5 हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए. 

म्याँमार के मैंडाले, सागाइंग और मैगवे इलाक़ों में, भूकम्प ने बुनियादी ढाँचे और हज़ारों घरों को तबाह कर दिया. 

पहले से ही गम्भीर संकट से जूझ रहे म्याँमार में इस आपदा ने हालात और बदतर कर दिए हैं. भूकम्प के कारण हज़ारों अन्य लोग बेघर हो गए, जबकि 2021 में हुए सैन्य तख़्तापलट के बाद से अब तक देश के भीतर ही 32 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (UNOPS) के कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरीरा दा सिल्वा ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों को, म्याँमार में अपने तीन दिवसीय दौरे की जानकारी देते हुए कहा कि, “लोग इस भीषण भूकम्प से अब भी उबर नहीं पाए हैं, जो कि देश में पिछले सौ वर्षों का सबसे शक्तिशाली भूकम्प था.”

उन्होंने कहा, “भूकम्प से हुई तबाही ने संघर्ष, विस्थापन और गम्भीर मानवीय ज़रूरतों जैसी, पहले से मौजूद चुनौतियों को और भी गहरा कर दिया है.”

ज़रूरतें अधिक, संसाधन कम

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी मौजूदगी रखने वाले संगठन UNOPS ने, आपदा के कुछ ही सप्ताहों में ढाई करोड़ डॉलर जुटाए और अब तक पाँच लाख लोगों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाई है. मालूम हो, UNOPS में लगभग 500 कर्मचारी कार्यरत हैं.

कार्यकारी निदेशक दा सिल्वा ने कहा, “मेरे सहयोगियों ने भागीदार संगठनों के साथ मिलकर तुरन्त काम शुरू किया, आपातकालीन आश्रय मुहैया कराए गए, साफ़ पानी पहुँचाया गया और तेज़ आकलन के लिए निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों को तैनात किया गया.”

मोरीरा दा सिल्वा ने आगाह किया कि इस सबके बावजूद, इस भीषण संकट से निपटने के लिए कहीं अधिक अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत है.

विश्व बैंक का अनुमान है कि कुल नुक़सान क़रीब 11 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है, जबकि पुनर्निर्माण में इससे दो से तीन गुना ज़्यादा लागत लग सकती है. साथ ही, पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 25 लाख टन से अधिक मलबा हटाना भी आवश्यक है.

उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया जनकेन्द्रित, समावेशी और शान्ति-स्थापना से जुड़ी हुई होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र के अन्य संगठनों की उस अपील को दोहराते हैं जिसमें हिंसा समाप्त करने की मांग की गई है…पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया म्याँमार को शान्ति और सुलह की ओर ले जाने में सहायक होनी चाहिए. आम लोगों की सुरक्षा को सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.”

UNOPS के कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा एक स्वास्थ्य केन्द्र में एक महिला और उसके नवजात शिशु से मुलाक़ात करते हुए.
© UNOPS/KMT

महिलाएँ सबसे अधिक प्रभावित

इस मानवीय संकट का सबसे अधिक असर महिलाओं और लड़कियों पर पड़ा है, जिनमें अनेक मृत और कई घायल हैं, और अब उनकी सुरक्षा के लिए गम्भीर ख़तरे बने हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र की प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी UNFPA के अनुसार, प्रजनन आयु की 46 लाख से अधिक महिलाएँ अब ख़ासतौर पर जोखिम में हैं. इस संख्या में 2.2 लाख से अधिक गर्भवती महिलाएँ शामिल हैं.

इसके अलावा, स्वास्थ्य सुविधाओं को नुक़सान, मानसून की बाढ़ और असुरक्षा से और अधिक बढ़ गया है और इस नुक़सान ने आपातकालीन प्रसूति देखभाल व मासिक धर्म की साफ़-सफ़ाई तक पहुँच को बाधित कर दिया है. 

वहीं, भीड़भाड़ वाले और कम रौशनी वाले आश्रयों में लिंग-आधारित हिंसा तेज़ी से बढ़ रही है.

स्वास्थ्य प्रणाली पर बढ़ता दबाव

लोगों में दूषित पानी से होने वाली हैज़ा जैसी बीमारियाँ और डेंगी, मलेरिया जैसे कीट जनित बीमारियों का ख़तरा भी तेज़ी से बढ़ रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 31 मई तक कोई बड़ी बीमारी फैलने की जानकारी तो नहीं मिली है, लेकिन दस्त सम्बन्धी समस्याओं और त्वचा संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं.

मानसून की बारिशों ने अस्थाई आश्रयों में हालात और ख़राब कर दिए हैं, जहाँ भीड़भाड़ व गन्दगी से गम्भीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं. 

इसके अलावा, हाल के एक सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत लोगों ने भूकम्प और जारी युद्ध से जुड़ी भावनात्मक परेशानी की बात बताई है.

WHO और इसके साझीदारों ने टिटनस और रेबीज़ जैसी बीमारियों से बचाने वाली वैक्सीन की 3 लाख से अधिक ख़ुराकें दी हैं, लेकिन पहुँच सीमित है और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए धन की भी कमी है.

दीर्घकालिक संकट

यूएन शरणार्थी एजेंसी UNHCR ने बताया है कि म्याँमार में फ़रवरी 2021 के सैन्य तख़्तापलट के बाद से अब तक साढे 32 लाख से अधिक लोग देश के भीतर विस्थापित हैं, जबकि कम से कम एक लाख 76 हज़ार और लोग पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं. 

इसमें म्याँमार में निकट अतीत में हो चुकी हिंसा की लहरों से बचकर आए लाखों रोहिंग्या शरणार्थी शामिल नहीं हैं.

म्याँमार अब भी दुनिया के सबसे ख़तरनाक देशों में से एक है, जहाँ ज़मीन में लगे विस्फोटक और युद्ध के अवशेषों से, मौत और चोट का ख़तरा बना हुआ है.

वर्ष 2024 के सिर्फ़ पहले नौ महीनों में ही 889 लोगों के हताहत होने के मामले दर्ज हुए है. इस सम्बन्ध में आशंका व्यक्त की गई है कि यह संख्या, वर्ष 2023 में हताहत हुए 1052 लोगों की संख्या से भी ज़्यादा हो सकती है.