ईरान और इसराइल से युद्धविराम का पूर्ण रूप से सम्मान किए जाने का आग्रह
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को ईरान और इसराइल के बीच युद्धविराम की घोषणा का स्वागत करते हुए, दोनों देशों से इसका पूर्णता से पालन करने का आग्रह किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने बीती रात सोशल मीडिया पर इस आशय की जानकारी दी थी.
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम मंगलवार को नाज़ुक परिस्थितियों में लागू हो जाने की जानकारी है, मगर इसराइल और ईरान ने युद्धविराम पर सहमति की पुष्टि करने से पहले एक दूसरे पर हमले किए. ईरान की राजधानी तेहरान के निवासियों ने वहाँ बड़े पैमाने पर हवाई हमले होने की बात कही है.
इसराइल द्वारा 13 जून को ईरान में परमाणु केन्द्रों व सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए जाने के साथ ही हिंसक टकराव की शुरुआत हो गई थी, जिसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के तीन परमाणु केन्द्रों को निशाना बनाया.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने योरोप में उत्तर अटलांटिक सन्धि संगठन (NATO) की वार्ता में हिस्सा लेने के लिए जाने से पहले, नाज़ुक युद्धविराम समझौते के उल्लंघन पर अपनी हताशा व्यक्त की, और ज़ोर देकर कहा कि इसका पालन किया जाना होगा.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने सोशल मीडिया पर अपने सन्देश में दोनों देशों से युद्धविराम का पूर्ण रूप से सम्मान करने का आग्रह किया है.
“लड़ाई को रोका जाना होगा. दोनों देशों के लोग पहले ही बहुत पीड़ा भुगत चुके हैं.” उन्होंने आशा जताई कि युद्धविराम को मध्य पूर्व क्षेत्र के अन्य हिस्सों में जारी हिंसक टकराव तक भी पहुँचाया जा सकेगा.
ईरान प्रशासन के अनुसार, 13 जून के बाद से अब तक इसराइली सैन्य बलों के हमलों में 49 महिलाओं व 13 बच्चों समेत 610 लोग मारे गए हैं, जबकि साढ़े चार हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं.
सात अस्पतालों, चार स्वास्थ्य इकाइयों, छह आपात स्वास्थ्य शिविरों और 9 ऐम्बुलेंस को भी हमलों के दौरान क्षति पहुँची है. वहीं, ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों में 30 इसराइली नागरिकों के मारे जाने की ख़बर है.
नए परमाणु समझौते पर बल
अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान से अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग फिर शुरू करने का अनुरोध किया है, ताकि उसके परमाणु कार्यक्रम के इर्दगिर्द किसी भी प्रकार के विरोध को शान्त किया जा सके.
यूएन समर्थित परमाणु एजेंसी के महानिदेशक रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने कहा कि IAEA के साथ सहयोग फिर शुरू करना, एक सफल समझौते के लिए अहम है.
IAEA प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, X, पर बताया कि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची के साथ मिलने का प्रस्ताव दिया है. इस क़दम के ज़रिए लम्बे समय से जारी इस इस विवाद के कूटनैतिक समाधान की दिशा में बढ़ा जा सकता है.
तेहरान जेल हमले पर चिन्ता
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने ज़ोर देकर कहा है कि तेहरान में एक कुख्यात जेल को निशाना बनाया जाने से बचा जाना होगा, जहाँ सरकार विरोधी असंतुष्टों को हिरासत में रखा गया है.
इसराइल द्वारा एक दिन पहले ऐविन जेल परिसर पर हमला किया गया था. यूएन मानवाधिकार कार्यालय प्रवक्ता थमीन अल-ख़ीतान ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि युद्ध के नियमों के अनुरूप यह जेल कोई सैन्य प्रतिष्ठान नहीं है.
“इसे निशाना बनाया जाना, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन है.” OHCHR को फ़िलहाल इस हमले की संक्षिप्त जानकारी ही मिल पाई है, जिसके अनुसार जेल में आग लगने से अनेक लोग घायल हुए हैं.
बताया गया है कि ऐविन कारागार में पत्रकारों समेत राजनैतिक बन्दियों को हिरासत में रखा जाता है. यूएन कार्यालय प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें मनमाने ढंग से गिरफ़्तार किया गया है या फिर उनके द्वारा अंजाम दिए अपराधों के सिलसिले में, बन्दियों की सदैव रक्षा की जानी होगी.
OHCHR के अनुसार, ईरान पर इसराइली हमले से जुड़ी सामग्री प्रकाशित करने, साइबर गतिविधियों के लिए लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की ख़बरें हैं. 13 जून के बाद से अब तक 9 लोगों को मौत की सज़ा दी चुकी है.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने ईरान प्रशासन से अभिव्यक्ति की आज़ादी का पूर्ण रूप से सम्मान करने की अपील की है और कहा है कि पत्रकारों को बेरोकटोक उनका काम करने दिया जाना होगा.