वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

बढ़ते तापमान से बेहाल एशिया, चरम मौसम घटनाओं से बर्बादी भी

वियत नाम में कुछ बच्चे गर्मी से निजात पाने के लिए एक नहर में कूद रहे हैं.
© ADB/Viet Tuan
वियत नाम में कुछ बच्चे गर्मी से निजात पाने के लिए एक नहर में कूद रहे हैं.

बढ़ते तापमान से बेहाल एशिया, चरम मौसम घटनाओं से बर्बादी भी

जलवायु और पर्यावरण

एशिया महाद्वीप में तापमान में बढ़ोत्तरी होने की रफ़्तार, वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी हो चुकी है, जिससे बाढ़, तूफ़ान, सूखे जैसी चरम मौसम घटनाओं को हवा मिल रही है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में आगाह किया है कि बदलती जलवायु से इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं, पारिस्थितिकी तंत्रों और समाजों को गहरी क्षति पहुँच रही है,

यूएन एजेंसी ने एशिया क्षेत्र में जलवायु स्थिति पर अपनी यह रिपोर्ट सोमवार को जारी की है, जिसके अनुसार, वर्ष 2024 ने अब तक का सर्वाधिक गर्म साल, या फिर दूसरा सबसे गर्म साल होने का रिकॉर्ड स्थापित किया है. यह डेटासेट के आकलन पर आधारित है.

Tweet URL

इस दौरान, स्थानीय आबादी ने बड़े पैमाने पर और लम्बे समय तक ताप लहरों का सामना किया. यूएन मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 1991-2024 की अवधि के दौरान तापमान वृद्धि का रुझान, 1961-1990 की अवधि की तुलना में लगभग दोगुना है.

पिछले साल, ताप लहरों (heatwaves) ने महासगारों के एक रिकॉर्ड क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया. समुद्री सतह पर आंके गए तापमान अब तक के सबसे अधिक थे.

एशियाई क्षेत्र में समुद्री जलस्तर में एक दशक के दौरान सतह का तापमान बढ़ने की दर, वैश्विक औसत की तुलना में क़रीब दोगुनी बताई गई है.

एशिया महाद्वीप पर प्रशान्त व हिन्द महासागर के क्षेत्रों में समुद्री जलस्तर में दर्ज की गई वृद्धि भी, वैश्विक औसत की तुलना से ज़्यादा है, जिससे निचले तटीय इलाक़ों पर जोखिम है.

सर्दी के मौसम के दौरान बर्फ़बारी में कमी आ रही है और गर्मी के दौरान अत्यधिक तापमान से हिमनद पिघल रहे हैं.

केन्द्रीय हिमालय और तियान शन (मध्य एशिया) क्षेत्र में स्थित, 24 में से 23 ग्लेशियर का आकार घटा है, जिससे ग्लेशियर झील के अचानक ढह जाने से बाढ़ आने, भूस्खलन होने और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए जोखिम भी बढ़ रहा है.

अत्यधिक बारिश होने से इस क्षेत्र के अनेक देशों में बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं. चक्रवाती तूफ़ान अपने पीछे बर्बादी की लकीरें छोड़ गए हैं, जबकि सूखे की वजह से आर्थिक व कृषि क्षेत्र में व्यापक हानि हुई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि एशिया में जलवायु परिवर्तन की स्थिति पर यह रिपोर्ट, ग्लेशियर द्रव्यमान, समुद्री जलस्तर, सतह के तापमान जैसे संकेतकों में आ रहे बदलाव पर आधारित है.

इसके एशियाई देशों में समाजों, अर्थव्यवस्थाओं और पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए गहरे नतीजे हो सकते हैं. उनके अनुसार चरम मौसम की घटनाओं की वजह से पहले से ही जान-माल की हानि की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं.

इसके मद्देनज़र, WMO अधिकारी ने राष्ट्रीय स्तर पर मौसम व जल विज्ञान सम्बन्धी सेवाओं के कामकाज की अहमियत को रेखांकित किया, ताकि आम लोगों के जीवन व आजीविकाओं की रक्षा की जा सके.

इस रिपोर्ट में नेपाल से एक उदाहरण लिया गया, जोकि दर्शाता है कि समय पूर्व चेतावनी प्रणाली और पूर्व आकलन के लिए ज़रिए किस तरह से समुदायों को चरम मौसम घटनाओं, जलवायु बदलावों से निपटने के लिए तैयार किया जा सकता है.