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ईरान: अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद सुरक्षा परिषद की बैठक, कूटनैतिक समाधान पर बल

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों से कूटनैतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने पर बल दिया है.
UN Photo/ Evan Schneider यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों से कूटनैतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने पर बल दिया है.

ईरान: अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद सुरक्षा परिषद की बैठक, कूटनैतिक समाधान पर बल

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी जारी की है कि बीती रात ईरान के परमाणु केन्द्रों पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों से व्यापक स्तर पर युद्ध छिड़ने और अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था को गम्भीर क्षति पहुँचने का जोखिम बढ़ गया है. उन्होंने मध्य पूर्व क्षेत्र में उपजे चरम तनाव की स्थिति पर रविवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.

यूएन प्रमुख ने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि न तो शान्ति प्रयासों को छोड़ा जा सकता है और न ही ऐसा करना होगा. उन्होंने इस टकराव को रोकने के लिए तुरन्त, निर्णायक क़दम उठाए जाने की अपील करते हुए वार्ता की मेज़ पर फिर लौटने की अपील की है.

इसराइल ने 13 जून को ईरान में परमाणु केन्द्रों व सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले शुरू किए, जिसके बाद ईरान ने सिलसिलेवार मिसाइलों व ड्रोन के ज़रिए जवाबी कार्रवाई की है. हिंसक टकराव में दोनों पक्षों को जान-माल की हानि हुई है.

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 430 लोगों के मारे जाने की ख़बर है जबकि साढ़े तीन हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं. वहीं, ईरान के जवाबी हमलों में 24 इसराइली नागरिकों की जान गई है और 1,300 घायल हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने शनिवार को इसराइली सैन्य कार्रवाई के समर्थन में ईरान के फ़ॉरडो, नतान्ज़ और इसफ़हान में परमाणु केन्द्रों को निशाना बनाकर किए गए हमलों पर जानकारी दी, जहाँ यूरेनियम को संवर्धित किया जा रहा था. 

ईरान में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम पर रविवार को अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के एजेंडे पर सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक बुलाई गई.

'अनसुनी' कर दी गई अपील

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को बताया कि दो दिन पहले ही, उन्होंने इस कक्ष में शान्ति को एक अवसर दिए जाने की अपील की थी, लेकिन उस पुकार को अनसुना कर दिया गया.

इसके बजाय, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों पर की गई बमबारी से हालात एक ख़तरनाक मोड़ पर पहुँच गए हैं, जबकि वो पहले से ही झुलस रहा है.

उन्होंने चेतावनी जारी की है कि मध्य पूर्व क्षेत्र, विध्वंस के एक और चक्र को सहन नहीं कर सकता है. “मगर, फिर भी, हम पर अब बदले के बाद एक और बदले के रसातल में धँसने का जोखिम है.”

“इससे बचने के लिए, कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी होगी. आम नागरिकों की रक्षा की जानी होगी. समुद्री मार्ग पर सुरक्षित आवाजाही की गारंटी भी ज़रूरी है.”

यूएन प्रमुख ने एक विश्वसनीय और सत्यापन योग्य समाधान की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे भरोसे को बहाल किया जा सके. इसके तहत, अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को जाँच के लिए पूर्ण अनुमति दी जानी अहम है.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि परमाणु अप्रसार सन्धि, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा की आधारशिला है, और ईरान को इसका पूरी तरह से सम्मान करना होगा.

ईरान ने परमाणु हथियार हासिल करने के मुद्दे पर इसराइल व अन्य देशों के आरोपों को निरन्तर ख़ारिज किया है और कहा है कि उसका कार्यक्रम शान्तिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

यूएन प्रमुख ने कहा कि इसराइल, अमेरिका और ईरान को निर्णय करना है. एक रास्ता, व्यापक युद्ध, गहरी मानव पीड़ा और अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था को क्षति की ओर जाता है. दूसरा रास्ता, तनाव में कमी लाने, कूटनीति व सम्वाद का है.

महासचिव गुटेरेश ने मौजूदा तनाव को ध्यान में रखते हुए, तुरन्त युद्धविराम लागू किए जाने और गम्भीरतापूर्वक फिर से वार्ता शुरू किए जाने की अपील की है. साथ ही, सभी सदस्य देशों से यूएन चार्टर व अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपने तयशुदा दायित्वों को निभाने का अनुरोध किया है.

विकिरण रिसाव का जोखिम

अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने बताया कि इसराइल और फिर अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु केन्द्रों पर किए गए हमलों से परमाणु सुरक्षा को आघात पहुँचा है और यदि हालात बिगड़े तो स्थिति गम्भीर रूप धारण कर सकती है. फ़िलहाल आम लोगों पर विकिरण रिसाव की चपेट में आने का जोखिम नहीं है.

ज़मीन को भेद देने वाली आयुध सामग्री से किए गए हमले के बाद फ़ॉरडो परमाणु संयंत्र पर बड़े गढ़्ढे देखे जा सकते हैं. इसी परमाणु केन्द्र पर यूरेनियम को 60 फ़ीसदी के स्तर पर संवर्धित किया जा रहा था.

यूएन समर्थित एजेंसी प्रमुख ने कहा कि फ़िलहाल, IAEA फ़ॉरडो में ज़मीन की सतह के नीचे हुई क्षति का आकलन कर पाने की स्थिति में नहीं है.

उन्होंने कहा कि नतान्ज़ में ईरान के मुख्य संवर्धन केन्द्र को भारी नुक़सान हुआ है और वहाँ बिजली आपूर्ति ढाँचा व यूरेनियम सामग्री के भूमिगत भंडारण केन्द्रों को क्षति पहुँची है. महानिदेशक रफ़ाएल ग्रॉस्सी के अनुसार, उनकी एक बड़ी चिन्ता रासायनिक दूषण को टालना है, जिसे निगलना ख़तरनाक साबित हो सकता है.

उन्होंने दोहराया कि परमाणु केन्द्रों को कभी भी सशस्त्र हमलों में निशाना नहीं बनाया जाना होगा. इसके परिणामस्वरूप, विकिरण का रिसाव हो सकता है, जिसके गम्भीर दुष्परिणाम प्रभावित देश और उसकी सीमाओं के परे अन्य देशों को अपनी चपेट में ले सकते हैं.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने कूटनैतिक वार्ता की दिशा में लौटने और अधिकतम संयम बरते जाने की अपनी अपील को दोहराया है.

महानिदेशक रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने कहा कि कूटनैतिक प्रयासों के लिए अवसरों को बन्द होने और अप्रसार व्यवस्था को विफल होने से बचाना होगा, भले ही व्यक्तिगत राय कुछ भी हो. यदि विश्व भर में और अधिक संख्या में देशों के हाथों में परमाणु हथियार पहुँचते हैं, तो हम सुरक्षित नहीं रह पाएंगे.