ईरान-इसराइल: नया विस्थापन संकट उपजने की चेतावनी, संयम बरतने का आग्रह
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने ईरान और इसराइल के बीच गहराते हिंसक टकराव से एक नए विस्थापन संकट के उभरने के ख़तरे के प्रति आशंका जताई है और दोनों देशों से हमले रोकने की अपील है. उधर, ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी आबादी के लिए बदतरीन मानवीय परिस्थितियों और दैनिक कठिनाइयों का सिलसिला जारी है.
यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने बताया है कि ईरान और इसराइल द्वारा एक दूसरे पर हवाई व मिसाइल हमले किए जाने से आम नागरिक, सुरक्षा की तलाश में अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने चेतावनी दी है कि एक ऐसे क्षेत्र में नया विस्थापन संकट उभरने का जोखिम है, जोकि पहले से ही दशकों की अस्थिरता और युद्ध से पीड़ित है.
राजधानी तेहरान और ईरान के अन्य हिस्सों में गतिविधि देखी गई है और कुछ लोग सीमा पार करके पड़ोसी देशों में प्रवेश करने का विकल्प चुन रहे हैं. इस बीच, इसराइल में बमबारी के कारण बहुत से लोगों ने देश के अन्य हिस्सों और कुछ मामलों में अन्य देशों का रुख़ किया है.
UNHCR उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने ध्यान दिलाया कि यह क्षेत्र पहले ही युद्ध, हानि व विस्थापन के दंश को भुगत चुका है, और अब यहाँ एक और शरणार्थी संकट को नहीं होने दिया जा सकता है.
“टकराव में कमी लाने का समय यही है. एक बार लोग भागने के लिए मजबूर हो जाएं, तो फिर जल्द वापसी का कोई रास्ता नहीं है, और अक्सर इसके नतीजे, कई पीढ़ियों तक महसूस किए जाते हैं.”
यूएन शरणार्थी एजेंसी ने मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थित देशों से आग्रह किया है कि शरण मांगने के अधिकार का सम्मान किया जाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी प्रभावितों को मानवीय सहायता सुलभ हो.
परमाणु जोखिम
क़रीब एक सप्ताह पहले, इसराइल ने ईरान में सैन्य ठिकानों व परमाणु कार्यक्रम से जुड़े केन्द्रों को निशाना बनाते हुए अनेक हवाई हमले किए थे. अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, इनमें इसफ़हान में स्थित अपकेंद्रण यंत्र (centrifuge) का उत्पादन करने वाली एक वर्कशॉप को भी क्षति पहुँची है.
यूएन समर्थित एजेंसी के महानिदेशक राफ़ाएल ग्रोस्सी ने बताया कि बीते सप्ताह यह तीसरी बार है जब ऐसे किसी केन्द्र को निशाना बनाया गया है.
उन्होंने कहा कि यह केन्द्र, अन्तरराष्ट्रीय एजेंसी की निगरानी में रहा है, जिसकी व्यवस्था ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ‘संयुक्त व्यापक कार्ययोजना में की गई थी. यह 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते का हिस्सा है, मगर संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2017 में इससे अपने पाँव वापिस खींच लिए थे.
महानिदेशक ग्रोस्सी ने आगाह किया है कि आम नागरिकों प्रभावित करने वाले किसी विकिरण का रिसाव फ़िलहाल नहीं हुआ है, मगर यह होने का ख़तरा लगातार मौजूद है.
इसफ़हान के अलावा अरक, कराज, नतान्ज़ और तेहरान में भी ऐसे केन्द्रों पर हुई क्षति का आकलन किया जा रह है.
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की बैठक में सभी पक्षों से शान्ति को एक अवसर दिए जाने का आग्रह किया था, और चेतावनी जारी की थी कि यदि इस टकराव का दायरा फैला, तो फिर इससे जो आग फैलेगी, उस पर कोई भी नियंत्रण नहीं कर पाएगा.
बर्बादी के ढेर पर ग़ाज़ा
उधर, फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी तुर्कीये के इस्ताम्बुल में इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक को सम्बोधित करते हुए ग़ाज़ा में हालात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया.
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में 20 लाख लोगों को भूखा रखा जा रहा है. नई, तथाकथित सहायता व्यवस्था दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे हताश लोगों को अपमानित किया जाता है.
UNRWA महाआयुक्त लज़ारिनी ने इस व्यवस्था को मौत का एक जाल बताया, जहाँ लोगों की जान बचाने के बजाय उनकी मौतें हो रही हैं.
इसराइल पर 7 अक्टूबर 2023 को हुए आतंकी हमलों के बाद भड़के इस हिंसक टकराव को क़रीब दो वर्ष होने जा रहे हैं, जिसमें 55 हज़ार फ़लस्तीनियों की जान गई है. इनमें अधिकाँश महिलाएँ व बच्चे हैं.
फ़िलिपे लज़ारिनी ने कहा कि यूएन एजेंसी के 318 मानवीय सहायताकर्मियों की अब तक मौत हो चुकी है, अन्तरराष्ट्रीय स्टाफ़ को बाहर निकाल दिया गया है और भ्रामक जानकारी, दुष्प्रचार किए ज़रिए संगठन के लिए वित्तीय समर्थन को ठप किया जा रहा है.
इन चुनौतियों के बावजूद, UNRWA ज़रूरतमन्दों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने में जुटा है. मगर, उन्होंने आगाह किया है कि अतिरिक्त सहायता धनराशि के अभाव में उहें अभूतपूर्व निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में राहत प्रयासों पर असर होगा.