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बाल अधिकार हनन मामलों में लगातार तीसरे साल उछाल

ग़ाज़ा के जबालिया से विस्थापित हुए कुछ लोग, एक ध्वस्त इमारत में रह रहे हैं.
UN News
ग़ाज़ा के जबालिया से विस्थापित हुए कुछ लोग, एक ध्वस्त इमारत में रह रहे हैं.

बाल अधिकार हनन मामलों में लगातार तीसरे साल उछाल

मानवाधिकार

वर्ष 2023 में बच्चों के विरुद्ध गम्भीर उल्लंघन के 41,370 मामले दर्ज और सत्यापित किए गए, जोकि 2023 की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक हैं. सशस्त्र टकराव में बच्चों पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, यह लगातार तीसरा वर्ष है जब बाल अधिकार हनन के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है.

इनमें से 22,495 उल्लंघन मामले सीधे तौर पर बच्चों के विरुद्ध दर्ज किए गए, जबकि शेष मामले, उन बुनियादी ढाँचों को निशाना बनाए जाने से जुड़े थे जिनका उपयोग बच्चे करते हैं - जैसेकि स्कूल और मानवीय सहायता केन्द्र.

बच्चों व सशस्त्र टकराव पर यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने कहा, “22,495 मासूम बच्चों की चीखें, जिन्हें पढ़ाई करने या गेंद खेलने की उम्र में गोलीबारी और बमबारी से बचना सीखना पड़ा, हमें रात भर जगाए रखने के लिए काफ़ी होनी चाहिए.”

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इस रिपोर्ट में केवल उन्हीं मामलों को जुटाया गया है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जा सका है. वास्तविक उल्लंघन मामलों और प्रभावित बच्चों की संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.

‘बच्चे युद्ध का शिकार नहीं होने चाहिए’

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकार हनन मामलों में वृद्धि का कारण, शहरी इलाक़ों में किए जा रहे बेतरतीब हमले, शान्ति समझौतों की अनदेखी और गहराते वैश्विक मानवीय संकट बताए गए हैं.

वर्जीनिया गाम्बा ने कहा, “हम जब बच्चों से उनका बचपन छीनने की अनुमति देते हैं, तो हम न केवल उनकी सुरक्षा करने में विफल होते हैं, बल्कि उनसे गरिमा, शिक्षा और उम्मीद के साथ जीने का अवसर भी छीन लेते हैं.”

व्यापक स्तर पर हुई वृद्धि के अलावा, एक से अधिक गम्भीर उल्लंघन मामलों के शिकार बच्चों की संख्या में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

उल्लंघन के सबसे अधिक मामले (8,554,) इसराइल और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में दर्ज किए गए - जोकि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के मामलों से दोगुना अधिक हैं.

अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की स्पष्ट अवहेलना

रिपोर्ट में बताया गया है कि जहाँ ग़ैर-सरकारी पक्षों ने व्यक्तिगत उल्लंघनों में बड़ी भूमिका निभाई, वहीं बच्चों की हत्या, उन्हें विकलांग बनाने, स्कूलों व अस्पतालों पर हमलों और मानवीय सहायता से इनक़ार करने जैसे अपराधों में अक्सर सरकारी पक्ष ज़िम्मेदार पाए गए.

वर्जीनिया गाम्बा ने कहा, “बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा की अन्तरराष्ट्रीय मान्यता को अपनाने के बजाय, दुनिया भर में सरकारें और सशस्त्र समूह उस क़ानून को पूरी तरह नज़रअन्दाज़ कर रहे हैं, जिसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को बच्चा माना जाता है.”

रिपोर्ट में आठ देशों की सूची दी गई है जिनके सरकारी सैन्य बलों ने बच्चों के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया. इनमें, इसराइल, रूस, म्याँमार, सीरिया, सूडान, दक्षिण सूडान, सोमालिया और काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) हैं.

चेतावनी की घंटी

वर्ष 2024 में, अतीत में सशस्त्र समूहों से जुड़े 16,482 बच्चों को संरक्षण प्रदान किया गया या उन्हें पुनः समाज में एकीकृत करने में सहायता दी गई है. फिर भी, बच्चों के विरुद्ध उल्लंघनों की संख्या अब भी अत्यधिक बनी हुई है.

यूएन महासचिव ने सभी सदस्य देशों से अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करते हुए बच्चों के अधिकारों और विशेष सुरक्षा सुनिश्चित करने और संघर्ष से प्रभावित बच्चों के लिए सेवाओं का दायरा बढ़ाने का आग्रह किया है.

विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने दोहराया कि गम्भीर उल्लंघन मामलों में हो रही यह बढ़ोत्तरी एक ‘चेतावनी की घंटी’ है. अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझना होगा कि ऐसे अपराधों के प्रति उदासीनता से कभी स्थाई शान्ति स्थापित नहीं हो सकती.

उन्होंने कहा, “हमारे सामने एक विकल्प है, जो यह तय करेगा कि हम किस तरह के लोग हैं - क्या हम परवाह करने वाले हैं, या मुँह मोड़ लेने वाले? यह हम सभी की ज़िम्मेदारी है कि इस पीड़ा को समाप्त करने के संकल्प के साथ, आज और अभी कार्रवाई करें. इसे कल पर या बाद के लिए टालें नहीं.”