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सीरिया, 'अस्थिरता की एक और लहर को सहन नहीं कर सकता', सुरक्षा परिषद में चर्चा

सीरिया में दिसम्बर (2025) के बाद, से लाखों लोग, अपने घरों को वापिस लौट चुके हैं और उन्हें पुनर्वास के लिए मदद की ज़रूरत है.
© UNHCR/Hameed Maarouf
सीरिया में दिसम्बर (2025) के बाद, से लाखों लोग, अपने घरों को वापिस लौट चुके हैं और उन्हें पुनर्वास के लिए मदद की ज़रूरत है.

सीरिया, 'अस्थिरता की एक और लहर को सहन नहीं कर सकता', सुरक्षा परिषद में चर्चा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान, मध्य पूर्व क्षेत्र में भड़के टकराव का सीरिया पर असर होने के प्रति चेतावनी जारी की है. क़रीब 14 वर्ष के गृहयुद्ध के बाद, दिसम्बर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन का पतन हो गया था और अब देश राजनैतिक परिवर्तन की प्रक्रिया से गुज़र रहा है.

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष उप दूत नजत रोश्दी ने कहा, “सीरिया अब एक और अस्थिरता की मार नहीं झेल सकता.”

उन्होंने आगाह किया कि, “क्षेत्रीय तनाव बढ़ने का ख़तरा काल्पनिक नहीं है, यह तात्कालिक, गम्भीर है और सीरिया में शान्ति और दोबारा बहाली की दिशा में हुई नाज़ुक प्रगति को पल भर में उलट सकता है.”

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उन्होंने मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने पर महासचिव द्वारा की गई निन्दा को दोहराया और इसराइल व ईरान से अधिकतम संयम बरतने की उनकी अपील का समर्थन किया.

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने भी और तनाव बढ़ने और उसके सम्भावित नतीजों के प्रति चिन्ता व्यक्त की है.

समावेशी बदलाव पर बल

उप दूत नजत रोश्दी ने सुरक्षा परिषद को बताया कि हाल के महीनों में राजधानी दमिश्क में कार्यवाहक विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सहयोगपूर्ण और रचनात्मक सम्वाद किया गया है.

इन बैठकों के दौरान अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों में हुए सकारात्मक विकास और सभी सीरियाई नागरिकों के हित में एक समावेशी राजनैतिक हस्तांतरण पर बल दिया गया.

विशेष उप दूत रोश्दी ने बताया कि फ़िलहाल नई “पीपल्स असेम्बली” की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसे संक्रमणकाली विधायी प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया जाएगा. 

इसके तहत हाल ही में जारी किए उस आधिकारिक आदेश का भी स्वागत किया, जिसमें इस असेम्बली में चुनावों के लिए एक सर्वोच्च समिति की नियुक्ति की गई है.

उन्होंने जानकारी दी कि पूर्वोत्तर सीरिया में, 10 मार्च को कार्यवाहक प्रशासन और कुर्द नेतृत्व वाले सीरियाई लोकतांत्रिक बलों (SDF) के बीच राष्ट्रीय सेना में एकीकरण के लिए समझौता हुआ, जिसे देश की सम्प्रभुता और एकता के लिए एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है.

इस समझौते के सफल क्रियान्वयन के लिए दोनों पक्षों से गम्भीर प्रयास और समझौते को लागू करने की अपील की गई है, क्योंकि यह क्षेत्र की स्थिरता और राजनैतिक हस्तांतरण की सफलता के लिए बेहद अहम है.

विशेष उप दूत रोश्दी ने सचेत किया कि होम्स, हमा समेत देश के कई हिस्सों में अब भी हत्याओं, अपहरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उल्लंघन समेत अन्य हनन मामलों को अंजाम दिया जा रहा है. दमिश्क में विशेष दूत ने प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की, और दौरान अलावाइट, द्रूज अल्पसंख्यक समुदायों, और महिलाओं को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों पर चिन्ता जताई गई.

इन हमलों को सरकारी नीति का हिस्सा नहीं माना गया है पर ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि अन्तरिम प्रशासन को अभी कुछ गुटों पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है. 

तीन-चौथाई आबादी को मदद की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले छह महीनों में सीरिया में लगभग 6 लाख लोगों ने सीरिया वापसी की है, जिनमें अधिकांश पड़ोसी देशों से लौटे हैं. 13 लाख से अधिक आन्तरिक विस्थापित भी अपने मूल स्थानों पर लौट रहे हैं.

विशेष उप दूत रोश्दी ने कहा, संयुक्त राष्ट्र ऐसे अन्तरराष्ट्रीय प्रयासों का स्वागत करता है जो सीरिया की अर्थव्यवस्था को दोबारा सक्रिय करने में मदद कर रहे हैं, जिनमें अमेरिकी प्रतिबन्धों में छूट, योरोपीय संघ द्वारा आर्थिक प्रतिबन्धों को हटाना और ब्रिटेन द्वारा व्यापार गतिविधियों को आसान बनाने की पहल शामिल हैं.

आपात राहत मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र की उप प्रमुख जॉयस म्सूया ने सुरक्षा परिषद को बताया कि देश की लगभग तीन-चौथाई आबादी को अभी भी मानवीय सहायता की आवश्यकता है. 

बिना फटी हुई आयुध सामग्री के बिखरे होने, उनमें धमाकों से दिसम्बर से अब तक लगभग 414 लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 600 घायल हुए हैं, जिनमें से एक तिहाई बच्चे हैं.

सीरिया की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बुरी तरह प्रभावित है, जहाँ 60 प्रतिशत से कम अस्पताल और आधे से भी कम प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ही पूरी तरह काम कर पा रहे हैं. देश में हैज़ा का प्रकोप बढ़ रहा है, जो विस्थापित आबादी की आवाजाही, जल आपूर्ति में बाधा और सूखे के कारण और भी गम्भीर होने का ख़तरा है.

30 वर्षों में सबसे भयंकर सूखे के चलते कृषि उत्पादन में गिरावट आने का ख़तरा है, विशेष रूप से गेहूँ की फसल पर. इसकी तीन-चौथाई मात्रा पर जोखिम है, जिससे क़रीब 1.6 करोड़ लोगों की एक साल की खाद्य ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है.

जॉयस म्सूया ने कहा, संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार सीमित संसाधनों के बावजूद ज़रूरतमन्दों को हर सम्भव सहायता प्रदान कर रहे हैं और दमिश्क में मानवीय समन्वय के लिए एक प्रभावी और एकीकृत मॉडल पर काम कर रहे हैं. 

हर महीने लगभग 25 लाख लोगों तक जीवन सहायता पहुँचाई जा रही है. उन्होंने धन-कटौती के कारण इन सहायता कार्यक्रमों पर होने वाले असर पर भी चिन्ता जाहिर की.