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ग़ाज़ा के एक विस्थापन शिविर में एक माँ और बेटी.

युद्धग्रस्त ग़ाज़ा में महिलाओं की मासिक पीड़ा, एक अनदेखा संकट

© UNFPA/Media Clinic ग़ाज़ा के एक विस्थापन शिविर में एक माँ और बेटी.

युद्धग्रस्त ग़ाज़ा में महिलाओं की मासिक पीड़ा, एक अनदेखा संकट

महिलाएँ

ग़ाज़ा में हिंसक टकराव, गहरे मानवीय संकट के बीच महिलाएँ और लड़कियाँ, सैनिटरी पैडसाफ़-सफ़ाई, और जल व निजता के बिना ही हर महीने माहवारी का सामना करने के लिए मजबूर हैं. यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA), इस ख़ामोश संकट से निपटने के लिए माहवारी स्वास्थ्य को मौजूदा राहत प्रयासों का हिस्सा बनाने, उसे प्राथमिकता देने में जुटा है.

गाज़ा की एक युवा विस्थापित लड़की *आइशा कहती हैं, “कभी-कभी मुझे खाने से ज़्यादा, पैड और साबुन की ज़रूरत होती है.” माहवारी स्वास्थ्य, एक ऐसी गम्भीर समस्या है जिसे संकट की स्थिति में अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है:

इसराइल द्वारा ग़ाज़ा में सहायता आपूर्ति पर थोपी गई पाबन्दियों के कारण सैनिटरी पैड्स समेत माहवारी स्वास्थ्य से जुड़ी स्वच्छता सामग्री की गम्भीर कमी हो गई है.

ग़ाज़ा में लगभग 90 प्रतिशत जल और स्वच्छता ढाँचा या तो नष्ट कर दिया गया है या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त है. जल पम्प करने व वितरण के लिए आवश्यक ईंधन की भी भीषण क़िल्लत है.

हर 10 में से 9 घर अब गहरे जल संकट से जूझ रहे हैं. महिलाएँ और लड़कियाँ अब साफ़ जल, साबुन, साधन या निजता के अभाव में ही माहवारी के दिन गुज़ारने के लिए मजबूर हैं. कई महिलाओं के लिए माहवारी अब चिन्ता और एकान्त का सबब बन चुकी है.

ग़ाज़ा की एक युवा लड़की ने बताया, “मेरी माहवारी भीड़ भरे शरण स्थल में शुरू हुई. मेरे पास सिर्फ़ एक सैनिटरी पैड था, तो मैंने उसे टॉयलेट पेपर से लपेट कर लम्बे समय तक चलाने की कोशिश की. मेरे पास उसे धोने का कोई साधन नहीं था, और दर्द असहनीय था. मैं चुपचाप बैठकर पूरे दिन रोती रही.”

गाज़ा में इस समय माहवारी आयु की लगभग 7 लाख महिलाएँ और लड़कियाँ हैं. इनमें हज़ारों अपनी पहली माहवारी का अनुभव कर रही हैं - वो भी बमबारी के बीच, गन्दे व तंग विस्थापन शिविरों में, बिना किसी निजता के.

खान यूनिस की एक क्षतिग्रस्त बस्ती के सामने खड़ी एक महिला.
© UNFPA/Media Clinic खान यूनिस की एक क्षतिग्रस्त बस्ती के सामने खड़ी एक महिला.

बुनियादी मानवाधिकारों का हनन

एक डॉक्टर ने संयुक्त राष्ट्र यौन व प्रजनन एजेंसी (UNFPA) को बताया, “मैं हर दिन महिलाओं को माहवारी, गर्भावस्था और प्रसव जैसी स्थितियों में अपमानजनक परिस्थितियों में जूझते हुए देखती हूँ. एक महिला होने के नाते, मैं इसे गहराई से महसूस करती हूँ. ये अनुभव प्राकृतिक होने चाहिए, न कि पीड़ा और परेशानी भरे.”

डॉक्टर ने सुरक्षा कारणों से अपना नाम गुप्त रखते हुए बताया, “मैं महिलाओं की आँखों में ताक़त देखती हूँ, लेकिन साथ ही गहरा दर्द और छीन ली गई गरिमा की पीड़ा भी दिखाई देती है." 

"आपात स्थिति के दौरान महिलाएँ और लड़कियाँ सबसे अधिक सम्वेदनशील स्थिति में होती हैं. मुझे पता है बिना सैनिटरी पैड्स के माहवारी का सामना करना कितना मुश्किल होता है.”

गम्भीर कमी

हर महीने ग़ाज़ा में लगभग एक करोड़ सैनिटरी पैड्स की ज़रूरत होती है, लेकिन इसमें से केवल 25 फ़ीसदी ही उपलब्ध हो पाते हैं.

कई महिलाएँ और लड़कियाँ पुराने कपड़े, फटे हुए कपड़े, या स्पंज का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं, और इन्हें उचित तरीक़े से धोए बिना ही फिर से इस्तेमाल कर रही हैं.

उत्तरी गाज़ा के जबालिया से विस्थापित एक पिता ने बताया, “मैंने अपनी इक़लौती शर्ट को फाड़कर अपनी बेटियों को दिया ताकि वो उन्हें पैड्स की जगह इस्तेमाल कर सकें.”

ये अस्थाई उपाय केवल दर्दनाक और अपमानजनक ही नहीं, ख़तरनाक भी हैं. इससे महिलाओं को प्रजनन तंत्र के संक्रमण, यौन संचारित रोग, मूत्र मार्ग संक्रमण का जोखिम हो सकता है. 

यह सभी कोशिशें, प्रसूति सम्बन्धी जटिलताओं को जन्म दे सकती हैं. ग़ाज़ा में हज़ारों महिलाओं के इन समस्याओं से पीड़ित होने की आशंका है, और स्वास्थ्य प्रणाली के चरमराने के कारण इनमें से अधिकतर महिलाओं को उपचार मिलना भी मुश्किल है.

एक अन्य लड़की ने बताया, “यहाँ कोई निजता नहीं है. मुझे केवल बदलने या नहाने के लिए बाथरूम की क़तार में घंटों इन्तज़ार करना पड़ता है.  वहीं दूसरी लड़की ने बताया, “मैं पैड्स की जगह अपने कपड़े के टुकड़े इस्तेमाल करती हूँ… और उससे मुझे संक्रमण हो गया.”

इसका मानसिक दबाव भी कम भयावह नहीं है. महिलाएँ और लड़कियाँ, शर्म, रक्तस्राव के डर, और लगातार चिन्ता से ग्रस्त रहने की बात करती हैं. एक किशोरी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, “हर बार जब भी मेरी माहवारी आती है, मैं सोचती हूँ काश मैं लड़की न होती.”

ग़ाज़ा में एक माँ अपने बच्चे के साथ ध्वस्त इमारतों के मलबे से होकर गुज़र रही है.
© UNICEF ग़ाज़ा में एक माँ अपने बच्चे के साथ ध्वस्त इमारतों के मलबे से होकर गुज़र रही है.

सहायता प्रयास

ग़ाज़ा में UNFPA की टीम मानवीय सहायता में माहवारी स्वास्थ्य को पूरी तरह से शामिल करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है. अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक, तीन लाख से अधिक महिलाओं और लड़कियों को दो महीने की डिस्पोज़ेबल पैड्स की आपूर्ति की गई है.12 हज़ार से अधिक नवजात शिशुओं की माताओं को प्रसवोत्तर किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं.

यूएन एजेंसी ने नक़दी और वाउचर सहायता के साथ-साथ माहवारी स्वच्छता सामग्री भी वितरित की है, ताकि 1.5 लाख से अधिक महिलाओं और लड़कियों को उनकी बुनियादी स्वच्छता ज़रूरतें पूरा करने में मदद मिल सके. 

विस्थापित महिलाओं को, सैनिटरी पैड और साबुन, तौलिये समेत अन्य सबसे अधिक ज़रूरी चीज़े ख़रीदने की सहूलियत मिली है. ग़ाज़ा में किशोर आयु की लड़कियों के लिए छह हज़ार से अधिक किटें वितरित की गई हैं, जिनमें स्वच्छता सामग्री, शैक्षिक सामग्री और टॉर्च जैसी चीजें शामिल हैं. 

UNFPA द्वारा लिंग आधारित हिंसा, रोकथाम सेवाएँ, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, व यौन प्रजनन अधिकारों की जानकारी प्रदान की गई है. साथ ही, जीवन रक्षक आपूर्ति के साथ, मूत्र और प्रजनन तंत्र जैसे संक्रमणों के इलाज के लिए छह मोबाइल प्रसूति इकाइयाँ स्थापित की गई हैं.

ख़ान यूनिस की एक विस्थापित महिला, मैसा*कहती हैं, “भोजन हमें जीवित रखता है, लेकिन पैड्स, साबुन और निजता गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं. जब हमें स्वच्छता किटें मिलती हैं, तो लगता है कि हमारी भी किसी को परवाह है. ये केवल हमारे स्वास्थ्य की रक्षा नहीं करतीं - ये हमारी गरिमा की रक्षा करती हैं.”

* गोपनीयता और सुरक्षा के लिए नाम बदले गए हैं.

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.