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गम्भीर भूख संकट से जूझ रहे हैं 13 'हॉटस्पॉट्स', भुखमरी के बढ़ते जोखिम पर चेतावनी

दक्षिण सूडान के युनिटी प्रान्त में संयुक्त राष्ट्र द्वारा खाद्य सहायता मुहैया कराई जा रही है.
© UNOCHA
दक्षिण सूडान के युनिटी प्रान्त में संयुक्त राष्ट्र द्वारा खाद्य सहायता मुहैया कराई जा रही है.

गम्भीर भूख संकट से जूझ रहे हैं 13 'हॉटस्पॉट्स', भुखमरी के बढ़ते जोखिम पर चेतावनी

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते मानवीय सहायता प्रयास नहीं किए गए, तो सूडान, फ़लस्तीन, दक्षिण सूडान, हेती और माली में आगामी महीनों में भयावह भूख संकट, भुखमरी और मौतों का सामना करना पड़ सकता है. सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, ये पाँच भूख से सर्वाधिक प्रभावित इलाक़े (hotspots) हैं, जहाँ हिंसक टकराव, विस्थापन को रोकने और पूर्ण स्तर पर राहत अभियान को तुरन्त शुरू किए जाने की आवश्यकता है.

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने सोमवार को जारी हुई अपनी एक संयुक्त रिपोर्ट में भूख संकट से जूझ रहे देशों व क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया है. 

इनमें सूडान, फ़लस्तीन, दक्षिण सूडान, हेती और माली में हालात पर सबसे अधिक चिन्ता है, जहाँ समुदायों को अकाल, अकाल के जोखिम या भयावह स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है.

युद्ध व हिंसक टकराव, आर्थिक बदहाली और प्राकृतिक आपदाएँ मौजूदा खाद्य सुरक्षा संकट को और भी गम्भीर बना रहे हैं. मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए मार्ग उपलब्ध न होने और धनराशि की भारी कमी से हालात और चुनौतीपूर्ण हो रहे हैं.

योरोपीय संघ के समर्थन से प्रकाशित 'Hunger Hotspots' नामक यह रिपोर्ट हर छह महीने में जारी की जाती है, जिसमें आने वाले पाँच महीनों के लिए बिगड़ते खाद्य संकटों की पूर्व चेतावनी और विश्लेषण पेश किया जाता है.

रिपोर्ट के नवीनतम संस्करण में, दुनिया के 13 देशों और क्षेत्रों में गम्भीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति बद से बदतर होने की आशंका व्यक्त की गई है.

सबसे अधिक चिन्ता वाले पाँच 'हॉटस्पॉट्स' के अलावा यमन, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी), म्याँमार और नाइजीरिया, अब ‘अत्यधिक चिन्ता वाले भूख संकट क्षेत्र’ हैं, जहाँ जीवन और आजीविका को बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है.

खाद्य असुरक्षा से प्रभावित अन्य देशों में बुरकिना फ़ासो, चाड, सोमालिया और सीरिया हैं, जहाँ परिस्थितियाँ तेज़ी से बिगड़ रही हैं.

एक रैड ऐलर्ट

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने कहा कि यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत है कि भूख कोई दूर नज़र आने वाला ख़तरा नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों लोगों के लिए रोज़ की आपात स्थिति बन चुकी है. हमें अभी और मिलकर काम करना होगा ताकि जीवनरक्षा की जा सके और आजीविकाएँ सुरक्षित रहें.

"लोगों की खेती और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है, ताकि वे चाहे जितने कठिन हालात हों, वहीं रहकर खाद्य उत्पादन कर सकें. यह केवल आवश्यक नहीं, बल्कि अनिवार्य है."

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन ने कहा, "यह रिपोर्ट एक रैड ऐलर्ट है. हमें पता है कि भुखमरी कहाँ बढ़ रही है और किसे सबसे ज़्यादा ख़तरा है. हमारे पास ज़रूरी संसाधन और अनुभव हैं, लेकिन अगर हमें धन और सहायता मार्ग तक पहुँच नहीं मिली, तो हम लोगों की जान नहीं बचा पाएँगे."

भोजन सहायता की कमी से, बहुत से बच्चों को भूखे पेट भी रहना पड़ रहा है.
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भोजन सहायता की कमी से, बहुत से बच्चों को भूखे पेट भी रहना पड़ रहा है.

करोड़ की भूख का सवाल

सूडान के कुछ हिस्सों में 2024 में अकाल की पुष्टि हुई, जहाँ युद्ध और विस्थापन के कारण लगभग 2.46 करोड़ लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा के गर्त में धँस रहे हैं, विशेष रूप से ग्रेटर कोर्दोफ़ान और दारफू़र में. 6.37 लाख लोग इस वर्ष मई महीने में विनाशकारी स्तर पर भूख से जूझ रहे थे.

उधर, गाजा पट्टी में इसराइली सैन्य कार्रवाई के बीच फ़लस्तीनी आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने में बाधाएँ पेश आ रही हैं, जिससे वहाँ 21 लाख लोग गम्भीर खाद्य संकट में हैं. 4.70 लाख लोगों को सितम्बर 2025 तक विनाशकारी स्तर खाद्य असुरक्षा, अकाल का सामना करना पड़ सकता है.

दक्षिण सूडान में राजनैतिक तनाव, बाढ़ के ख़तरे और आर्थिक बदहाली के कारण जटिल हालात हैं. लगभग 77 लाख लोग, यानि देश की क़रीब 57 प्रतिशत आबादी, खाद्य असुरक्षा के ऊँचे स्तर से प्रभावित हैं. कुछ इलाक़ों में 63 हज़ार लोगो के सामने जुलाई तक अकाल का जोखिम मंडरा रहा है.

हेती में आपराधिक गुटों की हिंसा और असुरक्षा से समुदायों का विस्थापन बढ़ा है. मानवीय सहायता बाधित होने की वजह से जून 2025 में 8,400 से आन्तरिक विस्थापित लोग पहले से ही राजधानी पोर्त-ओ-प्रिन्स भयावह खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं.

वहीं, माली में अनाज की ऊँची क़ीमतों और हिंसक टकराव, सबसे निर्बल परिवारों को प्रभावित कर रहे हैं. अगर समय पर सहायता नहीं मिली तो ढाई हज़ार लोग संकट में पड़ सकते हैं.

म्याँमार में हालिया भूकम्प, हिंसा, विस्थापन, सीमित स्तर पर सहायता और खाने-पीने की वस्तुओं की ऊँची क़ीमत से, खाद्य असुरक्षा बढ़ रही है. काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, गहन रूप धारण करने वाले हिंसक टकराव की वजह से एक बार फिर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित क्षेत्रों में लौट आया है.

इथियोपिया, केनया, लेबनान, मलावी, नामीबिया, निजेर, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बीक़ समेत कई अन्य देशों को भूख से सर्वाधिक प्रभावित इलाक़ों की सूची से हटा दिया गया है, लेकिन स्थिति नाजु़क है और कोई नया संकट उपजने से स्थिति फिर से बिगड़ सकती है.

देश में चल रही हिंसा के परिणामस्वरूप आने वाले महीनों में सूडान में 20 लाख से अधिक लोगों के भूख से मरने की आशंका है.
© WFP/Peter Louis

एकजुटता की अपील

भूख संकट से जूझ रहे कई क्षेत्रों में असुरक्षा, नौकरशाही बाधाओं और मानवीय सहायता मार्ग में कठिनाइयों के कारण राहत पहुँचाना बहुत मुश्किल हो गया है. 

साथ ही, मानवतावादी उद्देश्यों के लिए आवश्यक सहायता धनराशि की कमी के कारण खाद्य रसद में कटौती की जा रही है, और जीवन रक्षक पोषण व कृषि सहायता भी सीमित हो रही है.

इसके मद्देनज़र, इस रिपोर्ट में जल्द से जल्द मानवीय सहायता में निरन्तर निवेश किए जाने पर बल दिया गया है. यूएन विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते की गई मदद से जीवन बचाए जा सकते हैं, खाद्य संकट को कम किया जा सकता है, और लोगों की आजीविका सुरक्षित रहती है.