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ईरान-इसराइल संकट: बढ़ते हिंसक टकराव के बीच सुरक्षा परिषद की आपात बैठक

अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरों पर UN सुरक्षा परिषद की बैठक का एक विस्तृत दृश्य।
UN Photo/Loey Felipe सुरक्षा परिषद ने ईरान से जुड़े ख़तरों पर चर्चा के लिए बैठक की.

ईरान-इसराइल संकट: बढ़ते हिंसक टकराव के बीच सुरक्षा परिषद की आपात बैठक

शान्ति और सुरक्षा

ईरान के परमाणु केन्द्रों पर इसराइली हमलों से उपजा तनाव, मध्य पूर्व में एक ख़तरनाक नए चरण की शुरुआत है, मगर इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर हिंसक टकराव से हर हाल में बचा जाना होगा. राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की आपात बैठक के दौरान सैन्य कार्रवाई की निन्दा करते हुए संयम बरतने की अपील की है.

परिषद ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम को स्थगित करते हुए, तेज़ी से बढ़ते इस संकट पर आपात बैठक बुलाई, जिसे यूएन समर्थित परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) के प्रमुख राफ़ाएल ग्रोस्सी ने भी सम्बोधित किया और क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु सुरक्षा पर मंडराते गम्भीर जोखिमों की चेतावनी दी.

इसराइली सैन्य बलों ने गुरुवार देर रात और शुक्रवार को ईरान के कई परमाणु केन्द्रों को निशाना बनाया, जिनमें नतान्ज़ में संवर्धन स्थल (enrichment site) भी है.

ख़बरों के अनुसार, इन हमलों में इस्लामी क्रान्तिकारी गार्ड्स (IRGC) के प्रमुख हुसैन सलामी और कई अन्य प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो गई है.

इसराइली हमलों में बड़े पैमाने पर क्षति पहुँची है और आम नागरिकों के हताहत होने की भी ख़बरें हैं. इस क्षेत्र में वायु मार्ग को मोटे तौर पर बन्द कर दिया गया है और सुरक्षा बल हाई ऐलर्ट पर हैं.

शुक्रवार को, इसराइल द्वारा स्थानीय समयानुसार शाम को और हमले किए जाने की ख़बरे हैं, और ईरान ने भी इसराइल में बैलेस्टिक मिसाइलों से राजधानी तेल अवीव समेत अन्य इलाक़ों को निशाना बनाया है. 

संयम बरतने की अपील

राजनैतिक व शान्तिनिर्माण मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि इन हमलों के असर पहले ही गूंजने लगे हैं.

उन्होंने कहा, “मैं मध्य पूर्व में किसी भी सैन्य उकसावे के लिए महासचिव की निन्दा को दोहराती हूँ.” 

अवर महासचिव डीकार्लो ने इसराइल और ईरान से अधिकतम संयम बरतने तथा "किसी भी क़ीमत पर क्षेत्रीय अशान्ति के और गहराने और फैलने से बचने" की अपील की है. उन्होंने आगाह किया है कि यह सैन्य तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब कुछ "महत्वपूर्ण कूटनैतिक पहल” की दिशा में कोशिशें की जा रही थीं.

इस सप्ताहान्त ओमान में अमेरिका-ईरान की दोबारा वार्ता शुरू होने की योजना थी. मगर ख़बरें हैं कि अब ईरान इस वार्ता में शामिल नहीं होगा.

रोज़मैरी डीकार्लो ने सभी पक्षों से कूटनैतिक रास्ते पर बने रहने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “... बातचीत के माध्यम से शान्तिपूर्ण समाधान ही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के शान्तिपूर्ण रूप को सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीक़ा है.” 

“हमें किसी भी क़ीमत पर एक बढ़ते हुए टकराव से बचना होगा, जिसका वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा.”

आईएएन के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने न्यूयॉर्क में वीडियो लिंक के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अवगत कराया।
UN Photo/Loey Felipe राफ़ाएल ग्रोस्सी (स्क्रीन पर), अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक, ईरान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक को जानकारी देते हुए.

परमाणु स्थल की सुरक्षा का आग्रह

अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफ़ाएल ग्रोस्सी ने सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए बताया कि यूएन एजेंसी निरन्तर ईरानी परमाणु नियामक प्राधिकरण के सम्पर्क में है, ताकि हमलों में प्रभावित हुए स्थलों की स्थिति का आकलन किया जा सके.

साथ ही, परमाणु सुरक्षा एवं बचाव उपायों पर हुए व्यापक प्रभावों का आकलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि परमाणु स्थलों को किसी भी परिस्थिति में कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.

महानिदेशक ग्रोस्सी के अनुसार, “ऐसे हमलों का परमाणु सुरक्षा, परमाणु बचाव उपायों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा पर गम्भीर प्रभाव पड़ता है.”

उन्होंने कहा कि वह जल्द से जल्द क्षेत्र का दौरा करने के लिए तैयार हैं ताकि स्थिति का जायज़ा किया जा सके और ईरान में सुरक्षा, और परमाणु अप्रसार प्रयासों में सहयोग किया जा सके.

“यह स्पष्ट है कि ईरान, इसराइल, पूरे क्षेत्र और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एकमात्र स्थाई रास्ता, सम्वाद और कूटनीति पर आधारित है, जो शान्ति, स्थिरता व सहयोग सुनिश्चित करता है.”

महानिदेशक ग्रोस्सी ने कहा कि IAEA एक तटस्थ मंच के रूप में उपलब्ध है, जहाँ "बयानबाज़ी से ऊपर तथ्य मायने रखते हैं" और जहाँ तकनीकी सम्वाद, तनाव को बढ़ाने के बजाय समाधान का रास्ता बनता है. इस क्रम में, उन्होंने पारदर्शिता, सुरक्षा व शान्तिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने के इरादे से सम्वाद के लिए प्रयासों को समर्थन देने का भरोसा दिया है.

ईरान: जवाबदेही तय किए जाने की मांग

ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने सुरक्षा परिषद को बताया कि वह अपनी सरकार और जनता की ओर से “गम्भीर चिन्ता और तात्कालिकता” के साथ बात कर रहे हैं.

उन्होंने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, परमाणु वैज्ञानिकों और निर्दोष नागरिकों के विरुद्ध हुए सिलसिलेवार बर्बर और आपराधिक हमलों की कड़ी निन्दा की.

ईरानी राजदूत के अनुसार, “ये जानबूझकर और सुनियोजित हत्याएँ न केवल अवैध और अमानवीय हैं, बल्कि यह योजनाबद्ध आक्रमण का भयानक प्रदर्शन भी हैं. ये अपराध स्पष्ट रूप से किसी देशीय आतंकवाद की कार्रवाई हैं और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का घोर उल्लंघन भी.”

उन्होंने कहा कि संरक्षित परमाणु स्थलों पर हमले न केवल अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के मूलभूत सिद्धान्तों का उल्लंघन हैं, बल्कि “सामान्य मानवता की चेतना” के भी विरुद्ध हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे स्थलों को हुए नुक़सान से पूरे क्षेत्र और उससे बाहर भी विनाशकारी परमाणु विकिरण नतीजे हो सकते हैं.

राजदूत इरावानी ने कहा, “केवल एक ऐसी सरकार जो मानवता और ज़िम्मेदारी से परे हो, अपनी विनाशकारी महत्वाकाँक्षाओं के लिए लाखों ज़िन्दगियों को ख़तरे में डाल सकती है.”

उनके अनुसार, इस सरकार के समर्थक, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका प्रमुख है, उन्हें समझना चाहिए कि वे भी इस अपराध में शामिल हैं. इन अपराधों को सहायता और समर्थन देकर वे इन नतीजों की पूरी जि़म्मेदारी साझा करते हैं.

इसराइल: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उठाया क़दम

इसराइली राजदूत डैनी डेनॉन ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों को याद दिलाया कि उनके सम्बोधन के समय ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलें इसराइली शहरों पर हमला कर रही हैं और नागरिक घायल हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इसराइल के हमले, रोकथाम के लिए थे और “सटीकता, उद्देश्य और सबसे उन्नत गोपनीय जानकारी” के साथ किए गए थे.

इसराइली प्रतिनिधि के अनुसार, मिशन स्पष्ट है, “ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करना, उनके आतंक और आक्रमण के ढाँचों को ख़त्म करना और शासन की उस क्षमता को नष्ट करना जिससे वह बार-बार सार्वजनिक रूप से इसराइल को नष्ट करने का प्रण करता है.”

डेनॉन ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की भी आलोचना की कि उसने तेहरान को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की.

उन्होंने कहा, "यह राष्ट्रीय सुरक्षा का एक क़दम था. यह क़दम हमने अकेले उठाया, न कि इसलिए कि हमने चाहा, बल्कि क्योंकि हमारे पास कोई और विकल्प बचा नहीं था."

रूस: इसराइली कार्रवाई की कड़ी निन्दा

संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वसिली नेबेन्ज़िया ने चेतावनी दी कि इसराइल की कार्रवाई मध्य पूर्व को "एक बड़े पैमाने पर परमाणु तबाही" की ओर धकेल रही हैं.

उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से अकारण किया गया हमला है. इसराइल कुछ भी कहे, लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का गम्भीर उल्लंघन है." रूस ने इन हमलों की कड़ी निन्दा की है.

राजदूत नेबेन्ज़िया ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते में शामिल पश्चिमी देशों पर मौजूदा संकट को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि “इन देशों ने हालात को और भड़काने के लिए हरसम्भव प्रयास किए हैं और वास्तव में इस टकराव को उकसाया है.”

राजदूत नेबेन्ज़िया ने फिर से कूटनैतिक प्रयासों में तेज़ी लाने की अपील करते हुए कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल तभी सम्भव है, जब एक शान्तिपूर्ण, राजनैतिक और कूटनैतिक रास्ता अपनाया जाए.

अमेरिका: परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं

संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग के प्रतिनिधि मैककॉय पिट ने आरोप लगाया कि ईरान ने इसराइली नागरिकों पर सीधे और अपने समर्थक गुटों के ज़रिए हमले किए हैं. उनके अनुसार, ईरान पूरे क्षेत्र में आतंक, अस्थिरता और मानव पीड़ा को हवा दे रहा है.

उन्होंने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति ट्रम्प बार-बार कह चुके हैं, इस ख़तरनाक शासन को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती.”

मैककॉय पिट ने बताया कि इसराइली हमलों की जानकारी अमेरिका को पहले ही दे दी गई थी, लेकिन अमेरिका ने सैन्य रूप से इसमें हिस्सा नहीं लिया.

उन्होंने कहा, “हमारी सबसे पहली और सबसे अहम प्राथमिकता क्षेत्र में अमेरिकी नागरिकों, कर्मचारियों और सैनिकों की सुरक्षा है.”

साथ ही, अमेरिका एक राजनयिक समाधान की दिशा में प्रयास करता रहेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे और मध्य पूर्व में अस्थिरता का कारण न बने.