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ग़ाज़ा: संचार व्यवस्था ठप, सहायता आपूर्ति की कमी, भुखमरी का बढ़ता जोखिम

गाजा में विस्थापित लोग कचरे के एक विशाल ढेर के बीच से गुजर रहे हैं।
© UNRWA ग़ाज़ा में कचरे के जमा होने से स्वास्थ्य पर गम्भीर ख़तरा बढ़ रहा है.

ग़ाज़ा: संचार व्यवस्था ठप, सहायता आपूर्ति की कमी, भुखमरी का बढ़ता जोखिम

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों ने फिर दोहराया है कि उन्हें ग़ाज़ा में मानवीय सहायता पहुँचाने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि वहाँ भुखमरी का ख़तरा बढ़ता जा रहा है और संचार व्यवस्था ठप होने से जीवनरक्षा के लिए राहत प्रयास बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.

ग़ाज़ा में इस सप्ताह की शुरुआत में इन्टरनैट सेवा बन्द हो जाने से मानवीय सहायता नैटवर्क पूरी तरह ठप है. भीषण लड़ाई के दौरान केन्द्रीय और दक्षिणी इलाक़ों को जोड़ने वाली अन्तिम फ़ाइबर केबल के कट जाने से इन्टरनैट व्यवस्था पर असर हुआ है.

यूएन की मानवीय सहायता समन्वय एजेंसी (OCHA) ने कहा, “चूँकि यह नैटवर्क ठप पड़ा हुआ है, हमारे साझेदार न तो एक-दूसरे से सम्पर्क कर पा रहे हैं और न ही राहत कार्यों का समन्वय कर पा रहे हैं. ज़रूरतमन्द लोग अलग-थलग हैं और उनके पास जीवन रक्षक सहायता और आपातकालीन सेवाओं तक पहुँचने के लिए ज़रूरी जानकारी भी नहीं है.”

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संचार सेवा की बहाली  ज़रूरी

OCHA के अनुसार, हाल ही में इसराइली सैन्य बलों ने सोशल मीडिया पर एक चेतावनी जारी की है, जिसमें नक़्शे पर लाल रंग से चिन्हित इलाक़ों को ख़तरनाक युद्ध क्षेत्र बताया गया है और लोगों से इन क्षेत्रों से दूर रहने के लिए कहा गया है.

हालाँकि, इन इलाक़ों में ग़ाज़ा पट्टी के अधिकतर हिस्से शामिल हैं, लेकिन ज़्यादातर लोगों के पास इस चेतावनी को देखने या समझने का कोई साधन नहीं है क्योंकि इन्टरनैट और संचार सेवा ठप है.

इस बीच, दूरसंचार से जुड़े साझेदार संगठन ग़ाज़ा में फ़ाइबर ऑप्टिक केबल की मरम्मत के लिए समन्वय प्रयासों में जुटे हैं, जिनमें पहले से क्षतिग्रस्त मार्ग भी शामिल हैं.

इस वर्ष अप्रैल से अब तक, इसराइली अधिकारियों ने इस मरम्मत कार्य के लिए 20 से ज़्यादा अनुरोधों को अनुमति देने से इन्क़ार कर दिया है.

OCHA ने कहा, "इन लाइनों की मरम्मत की अनुमति तुरन्त दी जानी ज़रूरी है, क्योंकि यह अब ज़िन्दगी और मौत का सवाल बन चुका है."

सहायता मिशन को स्वीकृति नहीं

यूएन मानवतावादी कार्यालय ने बताया कि ग़ाज़ा की 20 लाख से अधिक आबादी तक सहायता पहुँचाने के लिए मिशन को इसराइली अधिकारियों द्वारा अनुमति न दिया जाना जारी है.

संयुक्त राष्ट्र के 18 ऐसे प्रयासों में से आठ को गुरुवार को अस्वीकार कर दिया, जिनके ज़रिए गेहूँ के आटे और ईंधन की आपूर्ति के प्रयास किए जा रहे थे.

इसराइल द्वारा मई महीने के मध्य में सहायता आपूर्ति पर थोपे गए प्रतिबन्ध को अस्थाई रूप से हटा लिया था, जिससे संयुक्त राष्ट्र कुछ हद तक ज़रूरी सहायता मुहैया करा पाया, लेकिन यह मात्रा विशाल आबादी की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी.

मई के अन्त से, संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदारों को दरकिनार करते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल ने एक नया सहायता वितरण मॉडल शुरू किया गया. मगर, इन केन्द्रों पर गोलीबारी की घटनाओं में 200 से ज़्यादा लोग मारे गए और हज़ारों घायल हुए हैं.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों की सहायता के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) ने कहा कि नया सहायता वितरण मॉडल अराजकता फै़ला रहा है, लोगों में डर और भेदभाव बढ़ रहा है, और अब समय आ गया है कि नाकाबन्दी हटाकर संयुक्त राष्ट्र को सुरक्षित ढंग से और व्यापक स्तर पर सहायता पहुँचाने दी जाए.

UN राहत प्रमुख टॉम फ्लेचर ने दक्षिणी गाजा के दीर अल बलाह में स्थित यूएनआरडब्ल्यूए के एक आश्रय स्थल का दौरा किया। उन्हें एक बच्चे से बात करते हुए देखा गया, जबकि एक UN सुरक्षा अधिकारी उनके पास खड़ा था।
© UNOCHA/Olga Cherevko संयुक्त राष्ट्र राहत प्रमुख टॉम फ़्लैचर ग़ाज़ा के एक UNRWA आश्रय में एक बच्चे से बातचीत करते हुए.

‘भूख का जवाब गोलियाँ नहीं ’

संयुक्त राष्ट्र में मानवीय सहायता मामलों के समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने गुरुवार देर रात जारी अपने एक वक्तव्य में सहायता प्रयासों के लिए तुरन्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है.

उन्होंने कहा, "भूख का जवाब कभी भी गोलियों से नहीं दिया जाना चाहिए. मानवीय सहायताकर्मियों को अपना काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए. जीवनरक्षक सहायता ज़रूरतमन्द लोगों तक पहुँचनी चाहिए, और यह मानवतावादी सिद्धान्तों के अनुसार होना चाहिए."

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तुरन्त व्यापक राहत नहीं पहुँची, तो ग़ाज़ा में भुखमरी और अराजकता बढ़ेगी, इसलिए राहतकर्मियों को बेरोकटोक अपना काम करने दिया जाना चाहिए.