संक्षेप में: यमन में पीड़ा का अन्त करने की अपील, दक्षिण सूडान में खाद्य असुरक्षा पर चिन्ता
यमन अब और लम्बे समय तक दरारों, आर्थिक बदहाली और मानव पीड़ा को नहीं झेल सकता है. संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने गुरूवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को बताया कि देश में शान्ति स्थापना के लिए समय तेज़ी से बीता जा रहा है. वहीं, खाद्य एवं कृषि संगठन ने दक्षिण सूडान में गहराती खाद्य असुरक्षा पर चिन्ता जताई है और हिंसक टकराव फिर न भड़कने देने की अपील की है.
विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने वीडियो लिंक के ज़रिये सदस्य देशों को बताया कि यमन अब भी राजनैतिक, मानवीय और विकास संकट में फँसा हुआ है. और समाधान के लिए कोई क़दम न उठाने की एक बड़ी क़ीमत चुकानी होगी.
देश की क़रीब आधी आबादी, 1.7 करोड़ लोग गम्भीर कुपोषण से पीड़ित हैं. सतत मानवीय समर्थन के अभाव में 60 लाख लोग आपात स्तर पर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं, जिसके मद्देनज़र अन्तरराष्ट्रीय समर्थन मुहैया कराया जाना ज़रूरी है.
यमन में कठिन हालात में मानवीय सहायता प्रयास जारी हैं लेकिन ज़रूरतमन्द आबादी तक आवश्यकतानुसार मदद प्रदान कर पाना सम्भव नहीं है.
यमन में हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) ने पिछले एक वर्ष से बड़ी संख्या में मानवीय सहायताकर्मियों, नागरिक समाज प्रतिनिधियों और राजनयिकों को मनमाने ढंग से हिरासत में रखा हुआ है.
विशेष दूत ने सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि इन गुटों पर अधिकतम दबाव डाला जाना होगा, ताकि वे बिना शर्त के इन सभी बन्धकों को रिहा कर सकें.
लाल सागर जल क्षेत्र में जहाज़ों पर हमलों और पश्चिमी देशों की जवाबी कार्रवाई के बाद हालात फ़िलहाल स्थिर हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका और हूथी लड़ाकों के बीच टकराव पर विराम लगाने के बाद ऐसा हुआ है.
हालांकि, ग़ाज़ा में फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता दर्शाने के इरादे से हूथी लड़ाकों ने इसराइल को निशाना बना कर कई हमले किए हैं.
यमन में नाज़ुक हालात और लड़ाई फिर शुरू होने के जोखिम के बीच, संयुक्त राष्ट्र एक रोडमैप तैयार करने के लिए प्रयासरत है, जिसका उद्देश्य देश में व्यापक स्तर पर युद्धविराम लागू करना, आर्थिक क़दम उठाना और समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है.
दक्षिण सूडान में गहरी खाद्य असुरक्षा पर चिन्ता
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि दक्षिण सूडान के अपर नाइल प्रान्त में कुछ इलाक़े अकाल की दिशा में बढ़ रहे हैं.
यूएन एजेंसी ने बढ़ती हिंसा और निरन्तर बिगड़ती खाद्य सुरक्षा स्थिति के बीच गुरूवार को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है.
बताया गया है कि इस प्रान्त में स्थित 13 काउंटी में से 11 में लोग आपात स्तर पर भूख से पीड़ित हैं, जबकि 32 हज़ार विनाशकारी स्तर पर भूख का सामना कर रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण सूडान में कुल 77 लाख गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगे, जोकि देश की कुल आबादी का आधे से अधिक है.
इसके अलावा, 23 लाख बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं, और इस वर्ष की शुरुआत में यह आँकड़ा 21 लाख था. FAO ने इस संख्या में वृद्धि होने की आशंका जताई है.
संगठन के अनुसार, जिन इलाक़ों में हिंसा थम गई है, वहाँ खाद्य सुरक्षा की स्थिति बेहतर हुई है, जिसमें कृषि उत्पादन में वृद्धि और मानवीय सहायता प्रयासों से मदद मिली है. हालांकि भूख की समस्या अभी दूर नहीं है.
दक्षिण सूडान को वर्ष 2011 में स्वाधीनता हासिल हुई थी, मगर उसके कुछ ही समय बाद देश में क्रूर, भयावह गृहयुद्ध भड़क उठा. 2018 में परस्पर विरोधी राजनैतिक दलों के बीच एक शान्ति समझौते के बाद हिंसक टकराव समाप्त हो गया.
हालांकि पिछले कुछ महीनों में राजनैतिक तनाव और हिंसा का ख़तरा बढ़ा है, जिससे शान्ति समझौते के धूमिल हो जाने और देश के फिर टकराव के गर्त में धँसने का जोखिम है.
यूएन एजेंसी ने आगाह किया है कि दक्षिण सूडान में फिर व्यापक हिंसा भड़कने नहीं दी जा सकती है, जिससे पहले से ही कठिन हालात का सामना कर रहे लोगों को गम्भीर खाद्य असुरक्षा से जूझना पड़ेगा.