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एक पार्क में चार लोग UN के सतत विकास लक्ष्यों 7, 11, 12 और 13 का प्रतिनिधित्व करने वाले बड़े बक्से पकड़े हुए हैं।

भारत: ऊर्जा कटौती व प्रतिबद्धता के साथ, हरित विकास की राह पर UNDP की पहल

© UNDP India यूएनडीपी ग्रीनिंग मूनशॉट पहल के तहत, भारत में यूएनडीपी कार्यालय ने 2017 से अपनी ऊर्जा की खपत में 48% की कटौती की है.

भारत: ऊर्जा कटौती व प्रतिबद्धता के साथ, हरित विकास की राह पर UNDP की पहल

जलवायु और पर्यावरण

भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) कार्यालय, सतत विकास को बढ़ावा देने और अपने पर्यावरणीय पदचिन्हों में कमी लाने के लिए नए मानक स्थापित करने में जुटा है. यूएन कार्यालय ने वर्ष 2017 के बाद से सौर ऊर्जा छत, ऊर्जा-कुशल भवन, बिजली चालित वाहन और शून्य-कचरा तौर-तरीक़ों के सहारे अपनी खपत में 48 प्रतिशत की कमी की है, जिससे अब यह एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन में सबसे प्रभावशाली कमी दर्ज करने के मामले में पहले पायदान पर है.

यूएन विकास कार्यक्रम की 'Greening Moonshot' पहल कार्बन आधारित ऊर्जा के इस्तेमाल में कमी लाने और नवीकरणीय समाधानों को प्रोत्साहन देने पर केन्द्रित है, ताकि संगठन के दैनिक कामकाज में पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव में कमी लाई जा सके.

नई दिल्ली स्थित UNDP कार्यालय की छत पर लगे 174 किलोवॉट के सौर फ़ोटोवोल्टिक संयंत्र से उत्पन्न स्वच्छ ऊर्जा, अब इस भवन की अधिकतर ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करती है. 

प्रकाश से लेकर एयर कंडीशनिंग और अन्य उपकरणों तक - सौर ऊर्जा, जीवाश्म ईंधन की जगह ले रही है और ऊर्जा खपत में जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप बदलाव लाया जा रहा है.

भारत के नई दिल्ली में UN भवन की छत पर स्थित सौर फोटोवोल्टिक ऊर्जा संयंत्र।
© UNDP India नई दिल्ली में यूएन कार्यालय की छत पर लगा सौर ऊर्जा संयंत्र.

ऊर्जा उपयोग के प्रति नई सोच

यूएन विकास कार्यक्रम का कहना है कि ये केवल सतही बदलाव नहीं है, बल्कि हर परिवर्तन, हर स्तर पर सोच-समझ कर अपनाई गई रणनीति का परिणाम है, और इसके लिए इमारत के हर हिस्से में आवश्यकता अनुसार मरम्मत हुई है और नए पुर्ज़े भी जोड़े गए हैं.

ऊर्जा का दक्षतापूर्ण ढंग से इस्तेमाल करने वाली प्रणाली से, कम ऊर्जा खपत के साथ भवन को ठंडा रख पाना सम्भव हुआ है.

एक तकनीशियन एचवीएसी उपकरण वाले एक मैकेनिकल रूम में एक बड़े हरे पाइप वाल्व को समायोजित कर रहा है।
© UNDP India नए ऊर्जा-कुशल शीतलन मशीनें और HVAC प्रणालियाँ, चीज़ों को ठंडा रखते हुए बिजली की कम खपत करते हैं.

ताप-प्रतिरोधी (heat-reflective) टाइल, ताप अवरोधन (insulation) और दोहरी परत वाले खिड़की के शीशों के ज़रिए, ताप वृद्धि में 40 प्रतिशत की कमी लाने में मदद मिली है. इससे भवन को ठंडा रखने की ज़रूरत भी कमी हुई है और भीतर माहौल ताप-अनुकूल हुआ है.

वहीं, सेंसर-आधारित एलईडी की स्मार्ट प्रकाश व्यवस्था से आवश्यकता न होने पर अब लाइट अपने आप बन्द हो जाती है, जिससे बिजली की बर्बादी में कमी आई है.

हरे-भरे पेड़ों के नजारे वाली बड़ी खिड़कियों के सामने एक टील रंग की आर्मचेयर और पैटर्न वाले तकियों के साथ एक पीला सोफा रखा गया है।
© UNDP India सौर ताप को वापस फेंकने वाली टाइलें, XPS इन्सुलेशन, और डबल-ग्लेज्ड ख़िड़कियों से 40% से अधिक तापमान कम किया जा सकता है, जिससे शीतलन की ज़रूरत कम होती है और कार्यालय के भीतर ठंडक रहती है.

कुशल निगरानी व्यवस्था

दिल्ली में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, और इसलिए UNDP कार्यालय ने वायु शुद्धिकरण प्रणाली को भी अपनी पहल में शामिल किया है. इससे न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य की रक्षा में मदद मिल रही है, बल्कि उनकी कार्यदक्षता भी बेहतर हो रही है.

ऊर्जा की खपत के लिए एक टीम द्वारा वास्तविक समय में स्थिति की निगरानी की जाती है. तापमान, वायु व्यवस्था और एयर कंडीशनिंग से लेकर बिजली-चालित वाहनों की चार्जिंग तक, हर निर्णय डेटा के आधार पर लिया जाता है.

नई दिल्ली में एक ऊर्जा निगरानी प्रणाली में एक व्यक्ति इलेक्ट्रिक वाहन को चार्जिंग पोर्ट से जोड़ रहा है।
© UNDP India ऊर्जा निगरानी टीम, वास्तविक समय में निगरानी करके, डेटा-संचालित निर्णय लेने में सक्षम होती है – फिर चाहे HVAC की सेटिंग अनुकूल करने हों या इलैक्ट्रिक वाहनों को अधिक प्रभावी ढंग से चार्ज करना हो.

बिजली-चालित वाहनों से आवाजाही

आवाजाही को ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए UNDP कार्यालय के पास चार बिजली चालित और एक हाइब्रिड वाहन हैं, जिन्हें छत पर लगे सौर पैनल से ही चार्ज किया जाता है. 

इसके ज़रिए कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के साथ-साथ नई दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में भी योगदान मिलता है. और यह एक मिसाल है कि किस तरह कार्यस्थलों में भी स्वच्छ परिवहन को अपनाया जा सकता है.

नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति चार्जिंग स्टेशन पर एक सफेद इलेक्ट्रिक वाहन के बगल में खड़ा है।
© UNDP India कार्यालय में आवाजाही में बिजली-चालित वाहनों का उपयोग किया जा रहा है.

बेहतर कचरा प्रबन्धन 

सतत विकास पर आधारित तौर-तरीक़ों के लिए यह प्रतिबद्धता केवल ऊर्जा और परिवहन तक ही सीमित नहीं है और यह कचरा प्रबन्धन और पुनर्चक्रण (circular use) में भी झलकता है. 

जैविक कचरे को खाद के रूप में इस्तेमाल में लाया जाता है, फेंक दिए गए कागज़ का दोबारा उपयोग हो रहा है, और इलैक्ट्रॉनिक-कचरे का ज़िम्मेदारी से निपटान करने पर ज़ोर है.

हाथ धोने के बाद 'पेपर टॉवल' के इस्तेमाल के बजाय सुखाने के लिए ड्रायर मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, और 100 प्रतिशत री-सायकलिंग वाली सामग्री के इस्तेमाल की तैयारी हो रही है.

एक महिला ऑफिस में रीसाइक्लिंग बिन के बगल में एचपी प्रिंटर का इस्तेमाल कर रही है।
© UNDP India फेंके गए काग़ज़ों को नोटपैड आदि में बदलकर उनका पुन: उपयोग किया जाता है.

जल संरक्षण भी इस रणनीति का हिस्सा है. कार्यालय परिसर में वर्षा जल के संचयन के लिए प्रणाली के ज़रिए, हर वर्ष वर्षा का लगभग आधा हिस्सा संग्रह करने के बाद उसे दोबारा उपयोग में लाया जाता है. वहीं उन्नत शीतलन टावर से जल और ऊर्जा दोनों की खपत घटती है.

भारत में एक महिला UNDP इंडिया की एक हरित इमारत में 'गीले कचरे' और 'हरे कचरे' के डिब्बों के बगल में रखे 'सूखे कचरे' के लेबल वाले लाल डिब्बे में एक गत्ते का डिब्बा डाल रही है।
© UNDP India कचरे को स्रोत पर ही अलग करके, उसकी कुशल री-सायक्लिंग व उचित निपटान सुनिश्चित किया जाता है.

बदलाव की ओर

यूएन विकास कार्यक्रम, यात्राओं के कारण होने वाले कार्बन उत्सर्जन के प्रति भी गम्भीर है, जिसके मद्देनज़र, एक नई हरित यात्रा नीति अपनाई गई है. ज़रूरी नहीं होने पर वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता दी जाती है, आधिकारिक यात्राओं का एक साथ पूरा करने की कोशिश की जाती है और कम उत्सर्जन वाले परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

भारत में UNDP की स्थानीय प्रतिनिधि, एंजेला लुसिगी, कहती हैं, “ग्रीनिंग मूनशॉट केवल एक पहल नहीं, एक दृष्टिकोण है. हम केवल सलाह नहीं देते, बल्कि उसे जीते हैं - सौर ऊर्जा, इलैक्ट्रिक वाहन, कचरा प्रबन्धन और जल संरक्षण के ज़रिए हम अपने हर संचालन को बदलाव की मिसाल बना रहे हैं.”

UNDP के अनुसार, जलवायु कार्रवाई के लिए किसी नीति दस्तावेज़ से आगे बढ़कर, दैनिक कामकाज की संस्कृति में परिवर्तन और दृढ़ संकल्प के साथ क़दम बढ़ाए जाने अहम हैं.

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.