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यदि हिंसा नहीं थमी, तो म्याँमार ‘आत्मघाती राह पर’ बढ़ता रहेगा

आग से क्षतिग्रस्त इलाके के मलबे के बीच, एक बुजुर्ग महिला हरे रंग की तिरपाल की छत के नीचे बने बांस के ऊंचे चबूतरे पर बैठी है।
© UNOCHA/Myaa Aung Thein Kyaw म्याँमार में एक भूकम्प प्रभावित महिला, राहत आपूर्ति के साथ.

यदि हिंसा नहीं थमी, तो म्याँमार ‘आत्मघाती राह पर’ बढ़ता रहेगा

शान्ति और सुरक्षा

म्याँमार में आए विनाशकारी भूकम्प को तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन देश अब भी न केवल इस प्राकृतिक आपदा, बल्कि फ़रवरी 2021 के सैन्य तख़्तापलट के बाद से जारी हिंसक संघर्ष की मार भी झेल रहा है. यह अन्तहीन हिंसा, म्याँमार को बर्बादी के कगार पर ले जा रही है.

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जूली बिशप ने मंगलवार को यूएन महासभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि “हज़ारों मौतों और अनगिनत लोगों के घायल होने के बावजूद, हिंसा थमती नहीं दिख रही है.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक युद्धविराम नहीं होता और नागरिकों की ज़रूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक “स्थाई और समावेशी शान्ति की कल्पना भी नहीं की जा सकती.”

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युद्धविराम का आहवान

जूली बिशप ने बताया कि उन्होंने स्वयं घरों, अस्पतालों और स्कूलों के मलबों के बीच जीवन की जंग लड़ रहे लोगों से मुलाक़ात की है और वो लोग जो केवल शान्ति चाहते हैं, ताकि वो फिर से एक सामान्य जीवन जी सकें. 

मगर, हथियारबन्द टकराव के कारण राहत एवं पुनर्निर्माण के प्रयासों में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

हालाँकि कुछ युद्धरत पक्षों ने युद्धविराम की घोषणा की है, उन्होंने बताया कि "इसका पूरी तरह पालन नहीं किया गया है."

यूएन दूत ने हिंसा के अन्त के लिए अपनी अपील दोहराते हुए कहा, “नागरिकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, और स्थाई शान्ति - हम सभी का साझा लक्ष्य.”

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि हिंसा का अन्त नहीं हुआ, तो म्याँमार “धीरे-धीरे आत्मघाती राह पर आगे बढ़ता रहेगा.”

विवादित चुनाव

जूली बिशप ने चेतावनी दी कि जब तक हिंसा का अन्त नहीं होता, तब तक एक समावेशी और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती.

उन्होंने मौजूदा हालात में चुनावों के समावेशी होने पर आशंका जताई, चूँकि अनेक विपक्षी नेताओं को अब भी हिरासत में रखा गया है. उन्होंने आगाह किया कि सैन्य शासन नेतृत्व की चुनाव विरोधी योजनाओं से, देश में प्रतिरोध एवं अस्थिरता और भड़केगी.

उन्होंने आंग सान सू ची और विन म्यिन्त समेत सभी राजनैतिक बंदियों को अविलम्ब रिहा करने की संयुक्त राष्ट्र से अपील की अपील को दोहराया.

रोहिंज्या समुदाय की दुर्दशा

म्याँमार और बांग्लादेश में रह रहे अधिकांश रोहिंज्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों में से 80 फ़ीसदी ग़रीबी में जीवन बिता रहे हैं. राख़ीन प्रान्त में म्याँमार सैन्य बलों और विद्रोही अराकान आर्मी के बीच जारी संघर्ष ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं और वो लगातार भेदभाव, जबरन सैनिक के रूप में भर्ती एवं हिंसा का शिकार हो रहे हैं.

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे रोहिंग्या लोगों को राशन और शिक्षा में कटौती जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है.

जूली बिशप ने कहा कि म्याँमार के बेहतर, स्थायित्वपूर्ण भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि रोहिंज्या समेत सभी समुदायों के लिए सुरक्षा, जवाबदेही व अवसर सुनिश्चित किए जाएं. साथ ही, टकराव, भेदभाव व मताधिकार से वंचित किए जाने के मूल कारणों का समाधान ढूंढना होगा.