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ग़ाज़ा: भोजन की तलाश में जीवन पर मंडराते जोखिम से जूझते लोग

गाजा के दीर अल-बलाह शरणार्थी शिविर में स्थित यूएनआरडब्ल्यूए स्कूल के आंगन में एक फिलिस्तीनी लड़की खाना बना रही है, जबकि अन्य विस्थापित बच्चे और महिलाएं उसे देख रही हैं।
© UNRWA/Louise Wateridge ग़ाज़ा में एक UNRWA स्कूल में फ़लस्तीनियों ने शरण ली है.

ग़ाज़ा: भोजन की तलाश में जीवन पर मंडराते जोखिम से जूझते लोग

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों ने सोमवार को चेतावनी जारी की है कि ग़ाज़ा में बदतरीन मानवीय संकट से पीड़ित फ़लस्तीनी आबादी, अभूतपूर्व स्तर पर हताशा से जूझ रही है. लोगों को अपना जीवन जोखिम में डालने और परिवार का भरण पोषण करने के बीच विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इस बीच, खाद्य सहायता वितरण के लिए हाल ही में स्थापित किए गए केन्द्रों पर लोगों के हताहत होने की भी ख़बरें हैं.

मई महीने के अन्तिम दिनों से, ग़ाज़ा में राहत सामग्री का वितरण इसराइल-अमेरिका समर्थित एक नई व्यवस्था के ज़रिए किया जा रहा है, जोकि संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और उनके साझेदार संगठनों को दरकिनार करते हुए संचालित हो रही है. 

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पिछले कुछ दिनों में इन केन्द्रों से जानलेवा घटनाओं और अफ़रातफ़री मचने की ख़बरें सामने आई हैं और बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी हताहत हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के साझेदार अन्तरराष्ट्रीय रैड क्रॉस समिति (ICRC) ने सोमवार को बताया कि रफ़ाह में उनके फ़ील्ड अस्पताल में 29 हताहत पहुँचाए गए थे, जिनमें से 8 की मौत हो चुकी थी. लगभग सभी को विस्फोटक की चपेट में आने की वजह से गम्भीर चोटें आई थीं, जबकि दो लोगों को गोली लगने के ज़ख्म थे.

संयुक्त राष्ट्र उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि "संयुक्त राष्ट्र फिर दोहराता है कि आम लोगों की हमेशा रक्षा की जानी होगी." 

"किसी भी व्यक्ति को, कहीं भी, परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करने और अपनी जान जोखिम में डालने के बीच विकल्प चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए."

ईंधन की भारी क़िल्लत

इस बीच, ग़ाज़ा में ईंधन भंडार बेहद ख़राब स्थिति में हैं, जिससे ज़रूरी सेवाओं और मानवीय राहत कार्यों पर और ज़्यादा दबाव पड़ रहा है. बीते सप्ताहान्त, उत्तरी ग़ाज़ा में लगभग 2.6 लाख लीटर ईंधन लूट लिया गया.

इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र ने कई बार इन ईंधन भंडारों तक पहुँचने और उन्हें वापिस लाने की कोशिश की थी, लेकिन 15 मई के बाद से अब तक इसराइली अधिकारियों ने ऐसे 14 प्रयासों को अस्वीकार किया है.

उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने कहा कि दक्षिणी ग़ाज़ा में स्थित "रफ़ाह के ईंधन भंडार तक पहुँचने की हमारी कोशिशें भी लगातार रोकी जा रही हैं."

इसके मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कोई समाधान नहीं निकलने की स्थिति में, मानवीय राहत व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो सकती है.

गाजा के खान यूनिस में यूनिसेफ द्वारा समर्थित कुपोषण जांच और उपचार केंद्र पर विस्थापित फिलिस्तीनी बच्चे और परिवार एक जालीदार बाड़ के पीछे इंतजार कर रहे हैं।
© UNICEF/Eyad El Baba

'भूख से तड़पते, लाचार लोग'

उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने बताया कि ग़ाज़ा पट्टी में बेहद ज़रूरी मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयास जारी हैं, जहाँ 20 लाख से ज़्यादा लोग अकाल जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को एक मिशन का नेतृत्व किया, जिसके तहत केरेम शलोम सीमा चौकी के ज़रिए ग़ाज़ा में प्रवेश करने वाली राहत सामग्री को ग़ाज़ा सिटी तक पहुँचाया जा रहा है.

19 मई को इसराइल द्वारा सीमित मात्रा में मानवीय सहायता को ग़ाज़ा में प्रवेश की अनुमति दिए जाने के बाद, संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार अब तक केरेम शलोम से केवल 4,600 मीट्रिक टन गेहूँ का आटा ही जुटा पाए हैं.

यूएन प्रवक्ता के अनुसार, "इसमें से ज़्यादातर सामग्री भूख से बेहाल लोगों ने अपने निर्धारित केन्द्रों तक पहुँचने से पहले ही ले ली. कुछ मामलों में यह सहायता सामग्री हथियारबन्द गिरोहों द्वारा लूट ली गई."

तुरन्त बहाल हो मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र ने ज़ोर देकर कहा है कि एक क़ाबिज़ शक्ति के तौर पर, इसराइल का यह दायित्व है कि ग़ाज़ा में सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

इसके तहत, यह भी अहम है कि अनेक रास्तों और सीमा चौकियों के ज़रिए और अधिक मात्रा में सहायता सामग्री को अन्दर जाने दिया जाए, ताकि मानवीय ज़रूरतें पूरी हों और लूटपाट की घटनाओं में कमी आए.

ग़ाज़ा में खाद्य सुरक्षा पर काम कर रहे संयुक्त राष्ट्र के साझेदारों का अनुमान है हर परिवार को कम से कम एक थैला गेहूँ का आटा पहुँचाने के लिए 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन अनाज की आवश्यकता होगी.

उप प्रवक्ता हक़ ने कहा कि, "ग़ाज़ा में मानवीय सहायता का सतत और बिना रोकटोक प्रवाह तुरन्त फिर से शुरू होना चाहिए."

गाजा बंदरगाह के पास विस्थापित फिलिस्तीनियों के सफेद तंबू लगाए गए हैं, और अग्रभूमि में मलबा और कचरा बिखरा हुआ है।
UN News

ख़तरनाक रास्ते और चालकों की कमी

बीते सप्ताहान्त, केरेम शलोम सीमा चौकी से सहायता आपूर्ति एकत्र करने के लिए कोई मिशन नहीं हो पाया, चूँकि इसराइल ने यह क्रॉसिंग शुक्रवार और शनिवार को बन्द रहने की पहले से ही सूचना दे दी थी.

मानवीय सहायता कार्यों में जुटे लोगों को अब भी बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. 

बेहद ख़तरनाक रास्ते, जाँच के बाद अनुमति प्राप्त वाहन चालकों की भारी कमी और राहत अभियान में होने वाली देरी समेत अन्य चुनौतियाँ, अभियान संचालन की उनकी क्षमता को प्रभावित कर रही हैं.