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समुद्री शैवाल और केल्प से ढकी धूप से जगमगाती पानी के नीचे की चट्टान में कटलफिश का एक समूह तैर रहा है।

महासागरों की बिगड़ती सेहत पर मंथन. क्या 'नीस सम्मेलन' बहाव का रुख़ मोड़ पाएगा?

© Daniel Sly वर्ष 2100 तक, 50 फ़ीसदी समुद्री प्रजातियों के विलुप्त हो जाने का ख़तरा है.

महासागरों की बिगड़ती सेहत पर मंथन. क्या 'नीस सम्मेलन' बहाव का रुख़ मोड़ पाएगा?

जलवायु और पर्यावरण

विश्व भर में, जैसे-जैसे प्रवाल भित्तियों (coral reefs) का क्षरण हो रहा है, मछलियों के भंडार दरक रहे हैं और समुद्री तापमान रिकॉर्ड ध्वस्त कर रहे हैं, महासागरों के संरक्षण, उनकी बिगड़ती सेहत से जुड़ी चिन्ताएँ गहरा रही है. इस पृष्ठभूमि में, विश्व नेता फ़्राँस के नीस शहर का रुख़ कर रहे हैं, जहाँ इस वर्ष का एक अहम सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है.

9 जून से 13 जून तक, तटीय शहर नीस, संयुक्त राष्ट्र के तीसरे महासागर सम्मेलन (UNOC3) की मेज़बानी करेगा. फ्राँस और कोस्टा रीका इस उच्चस्तरीय आयोजन की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं, और इसका उद्देश्य है: गहराती महासागर आपात स्थिति से निपटना, जिसके बारे में वैज्ञानिक निरन्तर चेतावनी जारी कर रहे हैं.

आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव और इस सम्मलेन के लिए महासचिव ली जुनहुआ ने यूएन न्यूज़ को बताया कि जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, पारिस्थितिकी तंत्रों की हानि, और समुद्री संसाधनों के अत्यधिक इस्तेमाल से महासागरों के समक्ष एक अभूतपूर्व संकट उपजा है.

“हमें आशा है कि इस सम्मेलन से अभूतपूर्व महत्वाकाँक्षा, नवाचारी साझेदारी और सम्भवत: एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रेरणा मिलेगी.”

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दबाव चरम पर है. UNOC3 में विश्व नेता, वैज्ञानिक, कार्यकर्ता और व्यवसायी, महासागरों पर मंडराते संकट का सामना करने के इरादे से साझा प्रयासों के लिए एकत्र हो रहे हैं, ताकि नए संकल्पों, साझेदारियों और जवाबदेही को सुनिश्चित किया जा सके.

एक सप्ताह तक चलने वाली इस वार्ता में एक राजनैतिक घोषणापत्र और नीस महासागर कार्रवाई योजना को पेश किए जाने की उम्मीद है, जोकि महासागर संरक्षण व उनके सतत उपयोग पर लक्षित होगी.

महासागर पर मंडराता संकट

यह संकट कोई भविष्य में घटने वाली आशंका नहीं है. यह अभी हो रहा है. इस वर्ष अप्रैल में, समुद्री सतह का तापमान, अपने दूसरे सबसे ऊँचे स्तर को छू गया. वहीं, इतिहास में चिन्ताजनक रफ़्तार से बड़े पैमाने पर मूंगा चट्टानों को नुक़सान पहुँच रहा है, वे सफ़ेद पड़ती जा रही हैं. कैरीबियाई, हिन्द महासागर, और प्रशान्त महासागर के कुछ हिस्सों में यह देखा जा सकता है.

प्रवाल भित्तियाँ (coral reefs), क़रीब 25 फ़ीसदी समुद्री प्रजातियों को पोषित करती हैं और पर्यटन व मछुआरा समुदाय के लिए अरबों डॉलर का सहारा हैं, मगर वे हमारे सामने ग़ायब होती जा रही हैं.

उन्हें हो रहे नुक़सान से जैवविविधता, खाद्य सुरक्षा और जलवायु सहनसक्षमता के लिए चिन्ताजनक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं.

और यह क्षति केवल यहीं तक सीमित नहीं है. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण निकलने वाले अत्यधिक ताप का 90 फ़ीसदी महासागर ही अवशोषित कर रहे हैं. यह मात्रा अब अपनी सीमाओं को छू रही है.

ली जुनहुआ ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण, जैवविविधता हानि, महासागर अम्लीकरण और उनका बढ़ता तापमान, सभी कुछ जलवायु परिवर्तन से ही जुड़ा हुआ है.

बदलाव के लिए अहम पड़ाव

मगर, इस संकट से निपटने के लिए प्रयासों में प्रगति भी दर्ज की गई है. वर्ष 2022 में, विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने अत्यधिक मात्रा में मछलियों को पकड़ने पर लगाम कसने के लिए एक समझौते को आकार दिया, जिससे अब हानिकारक सब्सिडी पर रोक लगी है.

अगले वर्ष, लम्बे गतिरोध के बाद, सदस्य देशों ने ‘High Seas’ सन्धि को पारित किया, ताकि अन्तरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में समुद्री जीवन को संरक्षित किया जा सके. यह समझौता अब नीस सम्मेलन में लागू किया जा सकता है.

लेकिन केवल नीतियों से ही पारिस्थितिकी तंत्रों के समक्ष उपजे इस जोखिम को दूर नहीं किया जा सकता है. “वैश्विक स्तर पर जवाबी कार्रवाई अपर्याप्त है.”

प्रगति, न केवल राजनैतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है बल्कि उसी स्तर पर संसाधन मुहैया कराए जाने की भी आवश्यकता है.

स्कूबा गोताखोर एंड्रयू किम मोंटेरे खाड़ी में केल्प वन पुनर्स्थापन प्रयोग के दौरान एक जाल से समुद्री अर्चिन इकट्ठा कर रहे हैं।
© Patrick Webster 60 फ़ीसदी से अधिक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र या तो क्षरण का शिकार हैं, या फिर उनका सतत ढंग से इस्तेमाल नहीं हो रहा है.

वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता

महासागर, पृथ्वी पर जीवन को पोषित करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. वे क़रीब 50 फ़ीसदी ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं और जलवायु चरम प्रभावों से हमारी रक्षा. लेकिन उनके संरक्षण, बचाव के लिए प्रयासों को पूरा निवेश नहीं मिल पाता है.

टिकाऊ विकास एजेंडा के 14वें लक्ष्य में जल सतह के भीतर जीवन पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, और इस लक्ष्य को 17 टिकाऊ विकास लक्ष्यों में सबसे कम संसाधन प्राप्त हुए हैं.

एक अनुमान के अनुसार, महासागर संरक्षण व समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली के लिए अगले पाँच वर्षों के दौरान सालाना 175 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी. लेकिन 2015 से 2019 के दौरान, केवल 10 अरब डॉलर ही मुहैया कराए गए.

इन प्रयासों के लिए वित्तीय संसाधन व पर्याप्त स्तर पर निवेश को सुनिश्चित करना, नीस सम्मेलन का एक अहम उद्देश्य है.

नीस कार्रवाई योजना

महासागर सम्मेलन (UNOC3) की थीम है: महासागर संरक्षण व सतत उपयोग के लिए कार्रवाई में तेज़ी और सभी पक्षों की लामबन्दी.

पाँच दिनों के लिए प्रतिभागी अनेक बड़े सवालों पर चर्चा करेंगे: ग़ैरक़ानूनी ढंग से मछली पकड़ने पर लगाम कैसे लगाएं, प्लास्टिक प्रदूषण में कमी कैसे लाई जाए, और समुद्री संरक्षण पर केन्द्रित अर्थव्यवस्थाओं को किस तरह से बढ़ाया जाए.

सैकड़ों नए संकल्पों को व्यक्त किए जाने की सम्भावना है. 2017 में हुए पहले महासागर सम्मेलन के बाद से अब तक, ऐसे दो हज़ार से अधिक स्वैच्छिक संकल्प व्यक्त किए जा चुके हैं.

नीस महासागर कार्रवाई योजना, कुनमिंग-मॉन्ट्रियाल वैश्विक जैवविविधता फ़्रेमवर्क के अनुरूप जगह दी जाएगी. जैवविविधता संरक्षण पर 2022 में हुए समझौते में 2030 तक कम से कम 30 फ़ीसदी समुद्री व पृथ्वी पर मौजूद पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण की पुकार लगाई गई है.

नए संकल्पों के अलावा, इस कार्रवाई योजना में एक औपचारिक घोषणापत्र भी होगा, ठोस क़दमों पर लक्षित एक राजनैतिक दस्तावेज़ बताया गया है.

ऑस्ट्रेलिया और काबो वैर्डे की अगुवाई में इस राजनैतिक घोषणापत्र में महासागर संरक्षण और सतत महासागर-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, और उनकी बेहतरी के लिए तेज़ी से क़दम उठाए जाने के प्रयास किए जाएंगे.

चंद अहम आँकड़े

  • हर वर्ष 1.2 करोड़ मीट्रिक टन प्लास्टिक महासागरों में समा जाता है, जोकि प्रति मिनट कूड़े से लदे एक ट्रक के समतुल्य है. नीस में जुटे प्रतिनिधि, प्लास्टिक प्रदूषण से उसके स्रोत पर निपटने के लिए एक वैश्विक समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे.
     
  • 60 फ़ीसदी समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र क्षरण का शिकार हैं, या फिर उनका टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. इस सम्मेलन में 2030 तक 30 फ़ीसदी महासागरों के संरक्षण के लिए प्रयासों को मज़बूती देने का लक्ष्य रखा गया है और समुद्री परिवहन में कार्बन पर निर्भरता घटाने के लिए एक रोडमैप पेश किया जाएगा.
     
  • वैश्विक मछली भंडार, 1970 में अपने सुरक्षित जैविक स्तर का 90 फ़ीसदी थे, मगर 2021 में घटकर 62 प्रतिशत रह गए हैं. नीस सम्मेलन में उम्मीद है कि सतत ढंग से मछली पकड़ने के लिए एक अन्तरराष्ट्रीय समझौते का मार्ग प्रशस्त होगा.
     
  • तीन अरब से अधिक लोग अपनी दैनिक गुज़र-बसर के लिए समुद्री जैवविविधता पर निर्भर हैं. सम्मेलन में समुद्र आधारित अर्थव्यवस्थाओं के लिए वित्त पोषण को मज़बूती देने और समुदायों के नेतृत्व में समाधानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा.
कंकड़ और समुद्री शैवाल से भरा एक समुद्र तट पानी के किनारे पर फेंके गए प्लास्टिक कचरे को दर्शाता है, जिसमें एक मास्क और एक प्लास्टिक बैग शामिल है।
UN News/Laura Quinones समुद्री तटों पर व महासागर की गहराई में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, काग़ज़, लकड़ी, धातु और अन्य पदार्थ घुल गए हैं.

पेरिस से नीस तक

नीस में यह सम्मेलन, पेरिस जलवायु समझौते के एक दशक बाद आयोजित हो रहा है. पेरिस समझौते में बढ़ते वैश्विक औसत तापमान में कमी लाने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं.

नीस सम्मेलन के दौरान, महासागरों को जलवायु कार्रवाई के केन्द्र में रखने की पुरज़ोर कोशिश की जाएगी और यह आपस में गुंथे हुए संकटों से निपटने का एक प्रयास होगा.

फ्राँस का नीस शहर केवल एक मेज़बान भर नहीं है. यह इस कहानी का एक हिस्सा भी है. भूमध्यसागर का तापमान बढ़ने की गति, वैश्विक औसत से 20 प्रतिशत अधिक है, और इसलिए जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से यह एक ‘हॉटस्पॉट’ है.

इस सम्मेलन से महासागरों की सेहत की रक्षा करने के प्रयासों को वास्तव में बल मिलता है या फिर केवल संकल्पों का पुलिन्दा, यह देशों, कम्पनियों और समुदायों द्वारा पेश किए जाने वाले उपायों व समाधानों पर निर्भर करेगा.