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सूडान में मानवीय सहायता क़ाफ़िले पर हमले में, पाँच राहतकर्मियों की मौत

'प्रोग्राम एलिमेंटेयर मोंडियल चाड' के नाम से चिह्नित एक ट्रक सहित मानवीय सहायता से भरे ट्रक, दारफुर के एल फाशेर के पास एक रेगिस्तानी इलाके में एक कच्ची सड़क पर खड़े हैं, और आसपास लोग खड़े हैं।
UN Sudan/Toby Harward ट्रकों में लदी सहायता सामान को नॉर्थ दारफ़ूर के अल फ़शर में पहुँचाने की तैयारी.

सूडान में मानवीय सहायता क़ाफ़िले पर हमले में, पाँच राहतकर्मियों की मौत

मानवीय सहायता

सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में अकाल प्रभावित इलाक़े में मानवीय सहायता ले जा रहे एक सहायता क़ाफ़िले पर हुए हमले में कम से कम पाँच राहतकर्मियों की मौत हुई है, अनेक अन्य घायल हुए हैं और अहम मानवीय सहायता आपूर्ति को नुक़सान पहुँचा है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मानवतावादी क़ाफ़िले पर हुए हमले की निन्दा की है और ध्यान दिलाया है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत सहायता की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जानी होगी.

यूएन एजेंसियों ने अपने साझा वक्तव्य में कहा कि राहत क़ाफ़िलों की रक्षा की जानी होगी और यह युद्धरत पक्षों का दायित्व है कि ज़रूरतमन्द आम नागरिकों के लिए राहत सामग्री को बेरोकटोक आने की अनुमति दी जाए.

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस हमले की कठोर निन्दा की है.

यूएन खाद्य कार्यक्रम और यूनीसेफ़ के अनुसार, यह क़ाफ़िला 1,800 किलोमीटर दूर स्थित पोर्ट सूडान से रवाना हुआ था, जहाँ पहले ड्रोन हमले हो चुके हैं.

15 ट्रकों में लदी पोषण सामग्री को नॉर्थ दारफ़ूर पहुँचाए जाने की योजना थी, जहाँ आन्तरिक रूप से विस्थापित लाखों लोगों पर कुपोषण व भुखमरी का जोखिम है.

यूएन एजेंसियों के अनुसार, सभी युद्धरत पक्षों को इस क़ाफ़िले और उसकी गतिविधियों के बारे में पहल से सूचित कर दिया गया था.

अल फ़शर शहर से क़रीब 80 किलोमीटर पहले, ये ट्रक सड़क पर खड़े थे और आगे जाने की स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे थे, जब उन पर हमला कर दिया गया.

विस्थापितों के लिए विकट हालात

पिछले एक वर्ष में अल फ़शर में प्रवेश करने वाला यह पहला क़ाफ़िला हो सकता था. अप्रैल में, इस शहर में और नज़दीक स्थित ज़मज़म विस्थापन शिविरों को निशाना बनाया गया था.

इन हमलों में लाखों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए, जबकि बड़ी संख्या में पहले से ही विस्थापन का शिकार थे.

सूडान में पिछले दो वर्षों से अधिक समय से, देश की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच हिंसक टकराव जारी है, जिससे 90 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.

नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त के अल फ़शर समेत अनेक स्थानों पर अकाल की घोषणा कर दी गई है, जबकि अन्य इलाक़ों पर इसकी चपेट में आने का जोखिम है.

इससे पहले भी, सूडान में आम लोगों व नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले हो चुके हैं. यूएन एजेंसियों ने ऐसी घटनाओं की कठोर निन्दा की है और मानवीय सहायताकर्मियों पर हमलों को तुरन्त रोके जाने की मांग की है.