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ग़ाज़ा: खाद्य वितरण केन्द्रों पर हुई हत्याओं की जाँच कराए जाने का आग्रह

गाजा के खान यूनिस में यूनिसेफ द्वारा समर्थित कुपोषण जांच और उपचार केंद्र पर विस्थापित फिलिस्तीनी बच्चे और परिवार एक जालीदार बाड़ के पीछे इंतजार कर रहे हैं।
© UNICEF/Eyad El Baba दक्षिणी ग़ाज़ा के ख़ान युनिस में यूनीसेफ़ द्वारा समर्थित एक केन्द्र पर बच्चों को भोजन मुहैया कराया जा रहा है.

ग़ाज़ा: खाद्य वितरण केन्द्रों पर हुई हत्याओं की जाँच कराए जाने का आग्रह

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरश ने रविवार को ग़ाज़ा में खाद्य सहायता पाने की कोशिश कर रहे फ़लस्तीनी लोगों को जान से मार दिए जाने और उनके घायल होने की घटना की जाँच की मांग की है.

समाचार माध्यमों के अनुसार, रफ़ाह और मध्य ग़ाज़ा में दो स्थानों पर सुबह भोजन पाने की क़तार में लगे 30 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं. 

ये दोनों खाद्य सहायता केन्द्र, ग़ाज़ा मानवीय सहायता फ़ाउंडेशन (GHF) द्वारा संचालित हैं, जिसका हाल ही में गठन किया गया था. 

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इस संगठन को इसराइल और अमेरिका का समर्थन प्राप्त है और इसमें अमेरिकी निजी सुरक्षा ठेकेदारों की मदद ली जा रही है, जो इसराइली सेना की निगरानी में काम कर रहे हैं. 

यह सहायता वितरण मई के अन्त में शुरू हुआ, और इसमें संयुक्त राष्ट्र व अन्य मानवीय सहायता एजेंसियों को दरकिनार कर दिया गया है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को जारी अपने एक वक्तव्य में कहा है कि वह इन घटनाओं की ख़बरों से “स्तब्ध” हैं. उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह अस्वीकार्य है कि फ़लस्तीनी सिर्फ़ भोजन पाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं.”

“मैं इन घटनाओं की तत्काल और स्वतंत्र जाँच की मांग करता हूँ और दोषियों को जवाबदेह ठहराए जाने की अपील करता हूँ.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानूनों के तहत इसराइल का यह स्पष्ट दायित्व  है कि मानवीय सहायता को अनुमति दी जाए और उसे सुगम बनाया जाए.

सहायता अनुमति देने पर बल

महासचिव ने कहा, “ग़ाज़ा में विशाल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर बिना किसी रुकावट के सहायता की आपूर्ति तत्काल बहाल की जानी होगी." 

उनके अनुसार, मानवतावादी सिद्धान्तों का पूरी तरह सम्मान करते हुए, संयुक्त राष्ट्र को सुरक्षित परिस्थितियों में काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

यूएन प्रमुख ने ग़ाज़ा में तत्काल, स्थाई और सतत युद्धविराम लागू किए जाने तथा सभी बन्धकों की बिना शर्त तत्काल रिहाई की अपील दोहराई है. उन्होंने कहा, “यही एकमात्र रास्ता है जिससे सभी के लिए सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है. इस युद्ध का कोई सैन्य समाधान नहीं है.”

संयुक्त राष्ट्र ने एक बार फिर ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता और ज़रूरी सामान पर लगे सभी प्रतिबन्धों को पूरी तरह हटाने की मांग की है. पिछले 20 महीनों के युद्ध और क़रीब तीन महीने तक जारी रही नाकाबन्दी के कारण, 20 लाख से अधिक लोग भुखमरी के कगार पर हैं.

हाल ही में इसराइल ने सहायता आपूर्ति पर थोपी गई पाबन्दी को हटाया है और केरेम शलोम सीमा चौकी के ज़रिए यूएन एजेंसियों को सीमित मात्रा में शिशु फ़ॉर्मूला, आटा, दवाएँ और अन्य मदद पहुँचाने की अनुमति दी थी. यह व्यवस्था तब तक के लिए थी, जब तक कि ग़ाज़ा मानवीय सहायता संस्था (GHF) पूरी तरह सक्रिय न हो जाए.

यूएन महासचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र किसी भी ऐसे सहायता कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा जिससे अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और मानवतावादी सिद्धान्तों यानि मानवता, निष्पक्षता, स्वतंत्रता व तटस्थता का उल्लंघन हो.

युद्धविराम के बाद विस्थापित फिलिस्तीनी अपने घरों को लौटते हुए दक्षिणी गाजा पट्टी के राफा शहर की एक सड़क पर चल रहे हैं।
© UNICEF/Eyad El Baba विस्थापित फ़लस्तीनी, दक्षिणी ग़ाज़ा पट्टी के रफ़ाह में एक सड़क पर रास्ता तय कर रहे हैं.

बिगड़ते हालात

मानवीय सहायता मामलों के लिए यूएन एजेंसी (OCHA) ने बताया है कि ग़ाज़ा में ज़मीनी हालात हर दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं. हाल ही में, दो खाद्य वितरण केन्द्रों पर हुए हमलों में भारी संख्या में लोग हताहत हुए और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जारी हमलों से हालात और गम्भीर हो गए हैं.

OCHA के अनुसार, उत्तरी ग़ाज़ा स्थित एक डायलिसिस स्वास्थ्य केन्द्र पर रविवार को हमला हुआ. ग़ाज़ा की स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि, अक्टूबर 2023 में हिंसा तेज़ होने के बाद से 40 प्रतिशत डायलिसिस मरीज़ों की मौत हो चुकी है, क्योंकि या तो ये केन्द्र हमलों की चपेट में आ गए या फिर वे आम लोगों की पहुँच से बाहर हो गए.

हिंसा की वजह से लोग एक बार फिर अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं. इसराइल ने शनिवार को ख़ान युनिस और डेयर अल-बलाह में एक और विस्थापन आदेश जारी किया, जिससे 200 से अधिक अस्थाई राहत शिविरों में रह रहे लगभग एक लाख लोगों पर असर पड़ा है.

मानवीय सहायता संगठनों का अनुमान है कि 18 मार्च से अब तक ग़ाज़ा में 6.4 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं, जो वहाँ की कुल आबादी का लगभग एक-तिहाई है. इस नए विस्थापन आदेश के कारण कम से कम आठ हज़ार छात्रों की पढ़ाई रुक गई है, और कई अस्थाई शिक्षण केन्द्र व सार्वजनिक स्कूलों को अपना संचालन बन्द करना पड़ा है.

कुपोषण व लूटपाट

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठन, फ़लस्तीनी बच्चों में कुपोषण की पहचान और इलाज की लगातार कोशिश कर रहे हैं, हालांकि मानवीय सहायता पर कड़े प्रतिबन्ध और सीमित आपूर्ति के चलते यह कार्य बेहद मुश्किल हो गया है. बीते सप्ताह, गम्भीर चुनौतियों के बावजूद, लगभग 40 हज़ार बच्चों को पोषण आपूर्ति वितरित की गई.

इसी बीच, भुखमरी और भोजन की भारी कमी के चलते लूटपाट की घटनाएँ भी सामने आ रही हैं. OCHA के अनुसार, “अधिकाँश लोग बेहद मजबूरी में खुले ट्रकों से आटा उठा रहे हैं. यह हताशा को दर्शाता है." हालांकि, अब आपराधिक लूटपाट के कुछ मामले भी सामने आए हैं.

आम लोगों को लगातार पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. उदाहरण के लिए, डेयर अल-बलाह में जो पाइपलाइन हर दिन लगभग 12 हज़ार घन मीटर पानी की आपूर्ति करती थी, वह अब भी काम तक नहीं कर रही है. "मरम्मत के लिए किए गए मानवीय प्रयासों को समन्वित मिशन के रूप में पूरा करने की अनुमति नहीं दी गई है."

इसराइल ने सोमवार को उत्तरी ग़ाज़ा के जबालिया में विस्थापन शिविरों में पीने का पानी पहुँचाने के लिए प्रस्तावित पाँच मानवीय सहायता मिशनों को स्वीकृति देने से मना कर दिया है.

गाजा बंदरगाह के पास विस्थापित फिलिस्तीनियों के सफेद तंबू लगाए गए हैं, और अग्रभूमि में मलबा और कचरा बिखरा हुआ है।
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राहत पहुँचाने के प्रयास

OCHA ने बताया कि बीते सप्ताहांत के दौरान संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदारों ने केरेम सलोम सीमा चौकी पर सहायता आपूर्ति लाने के प्रयास जारी रखे.

शनिवार और रविवार को 100 से अधिक ट्रक खाद्य व चिकित्सा सामग्री पहुँचाई गई. यह क्रॉसिंग दोबारा खुलने के बाद से अब तक ग़ाज़ा के लिए 300 से अधिक ट्रकों की खेप उठाई जा चुकी है.

OCHA ने बताया, "आज, हमारे एक प्रयास को इसराइली अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी. दूसरा प्रयास बमबारी रुकने, रास्ता सुरक्षित होने और इसराइल की हरी झंडी का इन्तज़ार कर रहा है."

"भले ही सीमा चौकी खुली हो, लेकिन पाबन्दियों के कारण मानवीय सहायता दल बहुत सीमित मात्रा में ही सामान ला पा रहे हैं, जो थोड़ी बहुत आपूर्ति पहुँच रही है, वह ज़रूरतों की तुलना में बेहद कम है."