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ग़ाज़ा में ‘बड़े पैमाने पर भुखमरी को रोकने का एकमात्र तरीक़ा’ इसराइली नाकाबन्दी की समाप्ति

युद्धविराम के बाद विस्थापित फिलिस्तीनी अपने घरों को लौटते हुए दक्षिणी गाजा पट्टी के राफा शहर की एक सड़क पर चल रहे हैं।
© UNICEF/Eyad El Baba विस्थापित फ़लस्तीनी, दक्षिणी ग़ाज़ा पट्टी के रफ़ाह में एक सड़क पर रास्ता तय कर रहे हैं.

ग़ाज़ा में ‘बड़े पैमाने पर भुखमरी को रोकने का एकमात्र तरीक़ा’ इसराइली नाकाबन्दी की समाप्ति

शान्ति और सुरक्षा

फ़लस्तीनी शरणार्थी एजेंसी - UNRWA के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी ने रविवार को कहा कि ग़ाज़ा पट्टी में, मानवीय सहायता सामग्री के प्रवेश पर महीनों से चली आ रही इसराइली नाकाबन्दी को हटाना ही “बड़े पैमाने पर भुखमरी” से बचने का एकमात्र तरीक़ा है. 

उन्होंने यह बात ग़ाज़ा के दक्षिणी हिस्से में, एक नए निजी सहायता वितरण केन्द्र के पास, आम लोगों पर इसराइली बलों द्वारा गोलीबारी किए जाने की विवादित ख़बरों के बीच कही है.

फ़िलिपे लज़ारिनी ने एक सोशल मीडिया सन्देश में कहा कि सहायता वितरण “मौत का जाल बन गया है.”

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उन्होंने ज़मीन पर मौजूद अन्तरराष्ट्रीय चिकित्सा कर्मचारियों और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों की ख़बरों का हवाला दिया, जिन्होंने बताया कि इस गोलीबारी में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई और 150 से अधिक लोग घायल हो गए.

वे लोग इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका समर्थित ग़ाज़ा मानवीय संस्थान (GHF) से सहायता सामग्री प्राप्त करने के लिए क़तार में खड़े थे. 

यह निजी वितरण व्यवस्था, मौजूदा यूएन व अन्य सहायता एजेंसियों से अलग है.

‘अपमानजनक व्यवस्था’

फ़िलिपे लज़ारिनी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, “इसराइली-अमेरिकी योजना के तहत ग़ाज़ा के दक्षिणी इलाक़े में रफ़ाह में एक वितरण केन्द्र बनाया गया है.”

उन्होंने कहा, “इस अपमानजनक व्यवस्था ने हज़ारों भूखे और हताश लोगों को दसियों मील पैदल चलकर उस क्षेत्र में जाने के लिए मजबूर किया है, जो इसराइली सेना द्वारा की गई भारी बमबारी के कारण लगभग तबाह हो चुका है.”

उन्होंने कहा कि सहायता सामग्री की आपूर्ति और वितरण “बड़े पैमाने पर और सुरक्षित होना चाहिए. ग़ाज़ा में, ऐसा केवल UNRWA सहित संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से किया जा सकता है.”

ग़ाज़ा मानवतावादी संस्थान निजी ठेकेदारों का उपयोग करता है और अपने स्थलों की सुरक्षा के लिए इसराइली रक्षा बलों (IDF) को शामिल करता है. 

इस संस्थान ने इस बात से दृढ़ता से इनकार किया है कि आम लोगों पर गोलीबारी की गई थी, और हमास आतंकवादियों पर, ग़लत जानकारी मुहैया कराने का आरोप लगाया.

विवादित घटनाएँ

IDF ने सोशल मीडिया पर कहा कि संस्थान से सहायता प्राप्त करने वाले लोगों पर गोलीबारी करने की ख़बरें झूठी हैं: “प्रारम्भिक जाँच से पता चलता है कि IDF ने, मानवीय सहायता सामग्री वितरण स्थल के पास या उसके भीतर मौजूद आम लोगों पर गोलीबारी नहीं की.”

इसराइली बलों ने एक वीडियो प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि बन्दूकधारियों ने सहायता सामग्री एकत्र कर रहे लोगों पर गोली चलाई, और कहा कि "हमास ग़ाज़ा में भोजन के सफल वितरण को रोकने के लिए अपनी पूरी ताक़त लगा रहा है."

ख़ान यूनिस के निकटवर्ती नासिर अस्पताल के चिकित्सा कर्मचारियों ने मीडिया संस्थानों को बताया कि रविवार को लगभग 79 लोगों को भर्ती कराया गया, जिनमें से अधिकांश को गोली लगने के घाव थे, साथ ही कुछ लोगों के शव भी थे.

घटनास्थल पर मौजूद पत्रकारों ने घायलों के साथ गाड़ियों पर शवों को ले जाते हुए वीडियो फुटेज प्रकाशित किए.

'घेराबन्दी हटाई जाए'

UNRWA के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी ने इसराइल से तीन महीने पुरानी सहायता नाकाबन्दी हटाने और सुरक्षित और निर्बाध पहुँच की अनुमति देने की पुकार लगाई.

उन्होंने कहा, "बड़े पैमाने पर भुखमरी को रोकने का एकमात्र यही तरीक़ा है जिससे प्रभावितों में लगभग 10 लाख बच्चे भी हैं."

UNRWA प्रमुख ने ग़ाज़ा पट्टी में अन्तरराष्ट्रीय मीडिया के प्रवेश पर इसराइली प्रतिबन्ध के कारण, वास्तविक स्थितियों को स्पष्ट रूप से स्थापित करने की कठिनाइयों को उजागर किया.

उन्होंने साथ ही कहा कि प्रतिस्पर्धी बयानों और "पूरी तरह से चल रहे दुष्प्रचार अभियानों" के बीच, प्रत्यक्षदर्शी रिपोर्टिंग पर से प्रतिबन्ध तुरन्त हटाया जाना चाहिए.