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सीरिया पर प्रतिबन्धों में ढिलाई, 'उम्मीद का एक शक्तिशाली सन्देश', IOM

परिवारों और बच्चों सहित विस्थापित व्यक्ति पूर्वोत्तर सीरिया के एक आंतरिक रूप से विस्थापित शिविर से स्वैच्छिक वापसी के लिए एक काफिले के हिस्से के रूप में ट्रकों और वैन के साथ-साथ चल रहे हैं।
© UNHCR/Hameed Maarouf दिसम्बर के बाद, लाखों शरणार्थी, विदेशों से सीरिया वापिस लौटे हैं.

सीरिया पर प्रतिबन्धों में ढिलाई, 'उम्मीद का एक शक्तिशाली सन्देश', IOM

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र की अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संस्था (IOM) ने अमेरिका, ब्रिटेन और योरोपीय संघ द्वारा, सीरिया पर लगे प्रतिबन्धों में राहत दिए जाने का स्वागत किया है. IOM की महानिदेशक एमी पोप ने मंगलवार को कहा है कि सीरिया में, एक दशक से अधिक समय तक चले युद्ध और गम्भीर आर्थिक मन्दी के बाद इन दंडात्मक प्रतिबन्धों को हटाए जाने से, देश में लम्बे समय के लिए पुनर्निर्माण और शान्ति स्थापना को बढ़ावा मिलेगा.

IOM की महानिदेशक एमी पोप ने एक वक्तव्य में कहा, "प्रतिबन्धों को हटाना देश और क्षेत्र में विस्थापित लाखों सीरियाई नागरिकों के लिए उम्मीद का एक मज़बूत सन्देश है."

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, 14 साल चले गृहयुद्ध के दौरान, सीरियाई अर्थव्यवस्था को 800 अरब डॉलर से अधिक का नुक़सान हुआ है.

UNDP की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, यदि वर्तमान वार्षिक विकास दर बनी रही, तो सीरिया की अर्थव्यवस्था, अपने युद्ध पूर्व जीडीपी स्तर तक पहुँचने में, वर्ष 2080 तक का समय लग सकता है.

IOM ने कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और योरोपीय संघ द्वारा लगाए गए लगभग 15 अरब डॉलर के प्रतिबन्धों में राहत से, मुख्य ढाँचे के दोबारा निर्माण के लिए महत्वपूर्ण निवेश के अवसर खुल सकते हैं

ज़्यादातर प्रतिबन्ध मूल रूप से असद शासन के दौरान लगाए गए थे, जिन्हें लम्बे समय से सीरिया की आर्थिक पुनर्बहाली में रुकावट के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता रहा है.

प्रतिबन्धों में दी गई ढील के साथ सऊदी अरब और क़तर ने, विश्व बैंक के प्रति सीरिया की बक़ाया राशि में से, 1.55 करोड़ डॉलर का भुगतान करने का वादा किया है. 

सऊदी अरब और तुर्किये ने एक साथ मिलकर, देश के सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन और ऊर्जा ढाँचे (energy infrastructure) के लिए सहायता देने की भी पेशकश की है.

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लगभग 14 वर्षों तक चला युद्ध 

सीरिया में मार्च 2011 में, जब राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ लोकतंत्र समर्थकों ने प्रदर्शन शुरू होने के साथ ही गृह युद्ध भड़क उठा था.

यह युद्ध लगभग 14 वर्षों तक चला. इस दौरान लाखों सीरियाई नागरिक मारे गए और अनगिनत लोग लापता हो गए. 

हिंसा और असुरक्षा के कारण 1 करोड़ से अधिक नागरिक या तो देश के भीतर विस्थापित हो गए या शरणार्थी बनकर देश के बाहर चले गए.

इस दौरान, निर्धनता दर तीन गुना बढ़ गई, जिससे 90 प्रतिशत आबादी प्रभावित हुई और 66 प्रतिशत लोग अत्यधिक ग़रीबी में जीने को मजबूर हो गए.

जब दिसम्बर 2024 में असद शासन का अन्त हुआ और युद्ध समाप्त हुआ, तो उसके बाद से, लगभग पाँच लाख सीरियाई शरणार्थी देश में वापिस लौट आए हैं. 

इसके अलावा, आन्तरिक रूप से विस्थापित 15 लाख लोग भी अपने मूल स्थानों पर वापस लौटे हैं.

वे लोग सीरिया के भविष्य को लेकर भारी उम्मीदों के साथ लौटे हैं, लेकिन उन्हें गम्भीर आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है.

IOM की महानिदेशक ऐमी पोप ने कहा, "उम्मीद के साथ ठोस समर्थन भी ज़रूरी है. सीरियाई लोगों को केवल लौटने की समर्थता ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और गरिमामय जीवन के लिए पुनर्निर्माण का साधन भी मिलना चाहिए."

80 लाख सीरियाई लोग मदद की आस में

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि सीरिया की लगभग 70 प्रतिशत आबादी यानि 1 करोड़ 65 लाख से अधिक लोग, अब भी मानवीय सहायता पर निर्भर हैं. लेकिन वित्तीय संसाधनों की भारी कमी ने राहत कार्यों को मुश्किल बना दिया है.

जनवरी से जून के बीच, 80 लाख सीरियाई लोगों की मदद के लिए लगभग 2 अरब डॉलर की राशि की ज़रूरत थी, जिसमें से अभी तक केवल 10 प्रतिशत ही धन प्राप्त हो पाया है, जबकि मई का अन्तिम सप्ताह भी ख़त्म होने वाला है.

महानिदेशक ऐमी पोप ने कहा कि अब समय आ गया है कि सीरियाई जनता और अर्थव्यवस्था मानवीय सहायता से आगे बढ़कर दीर्घकालिक समाधानों का रुख़ करे.

उन्होंने कहा, "मानवीय सहायता अब भी बेहद आवश्यक होने के हालात में IOM, धन दाताओं और विकास भागीदारों से अपील करता है कि वे अपने प्रयासों को मध्यम और लम्बी अवधि के पुनर्निर्माण की दिशा में बढ़ाए."