भारत: असम के एक गाँव का दूषित पेयजल से स्वच्छ पानी तक का सफ़र
स्वच्छ जल तक सबकी पहुँच बेहद आवश्यक है, लेकिन भारत के कई ग्रामीण समुदायों के लोग आज भी इस मूलभूत अधिकार और बुनियादी ज़रूरत पूरी होने से वंचित हैं. असम के नलबाड़ी ज़िले में दूरदराज़ के इलाक़े में बसा गाँव नम्बर 1 निमुआलतिमा भी एक समय, असुरक्षित हैंडपम्प के कारण गम्भीर जल समस्याओं से परेशान था. मगर अब हालात बदल चुके हैं...
भारत के असम प्रदेश में नलबाड़ी ज़िले का नम्बर 1 निमुआलतीमा गाँव कभी दूषित पानी की समस्या से जूझ रहा था. 2022 में जल जीवन मिशन (JJM) की शुरुआत के साथ, UNOPS के सहयोग से, गाँव में नई जलापूर्ति योजना बनी और हर घर में नल लगाए गए. अब गाँव में हर परिवार को स्वच्छ पानी मिल रहा है.
यहाँ के ग्रामीण, लम्बे समय से, लोहे से युक्त, धातु के स्वाद वाले लाल रंग का पानी देने वाले हैंडपम्पों पर निर्भर थे.
जल निकासी के उपायों की कमी के कारण अक्सर पेयजल दूषित होता था, जिससे जलजनित बीमारियाँ आम हो गई थीं.
इसका सबसे अधिक ख़ामियाज़ा महिलाओं को भुगतना पड़ता था, जिन्हें बहुत समय लगाकर रेत छननी तकनीक से पानी को साफ़ करना पड़ता था. इससे उनका स्वास्थ्य व आजीविकाएँ प्रभावित होती थीं.
2022 में, नम्बर 1 निमुआलतिमा ग्राम को भारत सरकार के जल जीवन मिशन में शामिल किया गया. इसके तहत, निर्माण कार्य 2022 में शुरू होकर, 28 जून, 2024 को पूरा हुआ. नतीजतन आज इस गाँव के, हर घर में एक नल मौजूद है.
समुदाय की हिस्सेदारी
जल जीवन मिशन के ज़रिए यह सुनिश्चित किया गया है कि नलों में आने वाला पानी भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस:10500) के गुणवत्ता मानकों को पूरा करता हो. इसके लिए, गाँव में एक फ़ील्ड टैस्ट किट (FTK) महिला समूह का गठन किया गया. यह समूह नियमित रूप से जल गुणवत्ता की निगरानी करता है, और पाइप से आने वाले पानी में समुदाय का विश्वास बरक़रार रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
फ़ील्ड टैस्टिंग किट समूह की सदस्य मामानी डेका बताती हैं, "जल आपूर्ति प्रणाली की स्थापना से गाँव की महिलाओं को होने वाली कठिनाइयाँ काफ़ी कम हो गई हैं और अब उन्हें उनके दैनिक के कामकाज के लिए बहुत समय मिल जाता हैं."
भारत में संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (UNOPS), दिसम्बर 2022 से ही, नम्बर 1 निमुआलतिमा समेत, 57 गाँवों में समुदाय के नेतृत्व वाले जल प्रबन्धन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है.
भारत में UNOPS के देश प्रबन्धक विनोद मिश्रा कहते हैं, “UNOPS, भारत सरकार के जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में योगदान देकर गर्व महसूस कर रहा है."
"डेनमार्क सरकार के सहयोग से यह परियोजना, भारत में हर घर तक नल के पानी की सुविधा सुनिश्चित कर रही है. हम समुदायों की क्षमता निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि ये सेवाएँ लम्बे समय तक स्थाई बनी रहें. यह परियोजना, भारत में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और हमें विश्वास है कि भविष्य में भी यह प्रभावी रहेगी.”
अग्रिम पंक्ति में महिलाएँ
जल उपयोगकर्ता समिति (WUC)) को भागेदारी योजना और प्रशिक्षण के माध्यम से, ख़ुद इसकी ज़िम्मेदारी उठाने के लिए प्रेरित किया गया है.
ग्रामीण समुदाय के सदस्यों ने, महिलाओं के सशक्तिकरण और महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
महिलाएँ, WUC की निर्णयात्मक प्रक्रियाओं का नेतृत्व करती हैं. एक महिला उपसमिति, मासिक जल कर एकत्र करके, उसका रिकॉर्ड रखती है. मीनाक्षी लाहकर नामक एक महिला पम्प ऑपरेटर की नियुक्ति से तकनीकी भूमिकाओं में लैंगिक बाधाओं को तोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं.
परियोजना का प्रभाव
निमुआलतिमा गाँव ने, 100% घरेलू नल लगवाने के साथ, पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित करके, जल सुलभता में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है.
इस गाँव में इस समय, 149 घरों में से हर एक के पास अब एक घरेलू नल मौजूद है.
ग्रामीण जन, अपने जल उपयोग की ख़ुद निगरानी करते हैं, रिसाव को तुरन्त ठीक करवाते हैं, और इस संसाधन का ज़िम्मेदारी के साथ उपयोग सुनिश्चित करते हैं.
जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी
सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए, FTC महिला समूह, हर महीने जल गुणवत्ता की जाँच करता है. उनका काम स्वच्छ, सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना तथा स्थानीय महिलाओं को जल प्रबन्धन में प्रशिक्षित करना है.
आज, नम्बर 1 निमुआलतिमा गाँव, इलाक़े में सामूहिक कार्रवाई, समुदाय की भागेदारी और महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श उदाहरण बन चुका है.
भारत सरकार के जल जीवन मिशन और UNOPS के समर्थन से, इस गाँव में आने वाला बदलाव स्पष्ट करता है कि एकता व स्थानीय भागेदारी से स्थाई परिवर्तन सम्भव है.